.i studied at D.N.college hisar (11th and 12th)..hisar is very close to my heart..
..hisar gave me sm good frnds..
..nd sm romantic days of my life were spent at hisar..(my first girlfrnd :tongue:..)..thats also coz hisar is very special to me...
....H.A.U,dabra chowk,ganesh market, vidya devi jindal school..:victorious:...i was everywhere....each and every sector of hisar...
..i just love that city..
हिसार थाकड़ सहर हे हरयाणा का. किसे ज़माने में यु हरयाणा पंजाब का सबते बड़ा जिला था. फिर इस्त्ते कई जिले बना दिए जणू सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी etc .यो शहर राजस्थान और पंजाब के लोवे हे तो अड़े सरदार और राजस्थानी मानस बहोत मिल जांगे. इस खातर पंजाबी हर राजस्थानी आड़े के लोगां के आसानी त समज आजा हे. जिद हाम छोटे थे तो महारा लोकल दूरदर्शन केंद्र न था तो म्हारे जालंदर आला दूरदर्शन के कार्यक्रम देखा करदे लोग गामां में भी. पंजाबी फिल्म उस ज़माने( १९८०-९०) में भी एंडी होया करदी
आड़े की सबते अची बात मेने या लगे हे के थोडा सा उपरेने जाओ तो राजस्थान आजे हे हर माडा सा और सीधे चले जाओ तो पंजाब आजे हे. smuggling भी बहोत होवे हे इस चक्कर में. बाकि आड़े पाकिस्तान त आयोडे भी बहोत हे. म्हारे एक चौक का नाम मुल्तानी चौक हे जो मुल्तानियाँ के कारन पड़ा. एक कैंप एरिया हे उसमे भी मुल्तान त आयोडे बहोत लोग बस रहे हे.
बाकी सांज ने---
I found Bhiwani guys more superior in "Sheep"....but Rohtki & Rewari aale "MINUS" mei na jaan dete....( P.S. this is usuall TAASH language)
Bhai akshay, meeting fix karwa ooh bhiwani aale gela junsa ghna tej se "seep" me..
mhari class me 8-10 jane the bhiwani ke.. aindy paakya karte taasha me. shart laa ke haraya karte bhaiya ne(jabki ve regular khelniye the train me).. lya hum bhi bichaas leve ek ber oohne!! :stupid:
Sunpat kenha "Bairang" naam ka khel ghna khelya jaaya kare taasha me.
ओल्य्म्पिक में शामिल करवानी पड़ेंगी ताश भी ...... पक्का गोल्ड मेडल स........ हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
bahadurgarh ke paneer ke pakode mashoor se.
हिसार का जाट कालेज बहुत प्रसिद्द स.... उसके प्रिंसिपल इन्दर सिंह लाख्लन खुद एक धाकड़ जाट आदमी स...... मेरे याद स 1996 में मेरे चाचा जी गेल उन तें मिलन गया था... उनके दोस्त तें वो.... तो हम बैठ गे एक साइड में सोफे पे क्यूंकि तो काम में बीजी थे... दाखिले का टाइम चाल रा था........ लांबी लाइन लाग री थी... एक छोरा हांसी का ... दाखिला लेवन आया.... तो लाख्लन साब ने कही की भाई हांसी में कालेज रह्य... तू उत ए पढ़ ले........ छोरा था घना सयाना ... जिब तो चला गया..... एर थोड़ी सी हाँ में फेर आ गया लाइन में लाग के.... आक जानू भूल जगा प्रिंसिपल...... जाट राम कित भूले था.......... बोल्या अपने peon तें ... ल्या रे एक डंडा ल्या .... ....... पसार लो इस ने ...........इस ने दयून दाखिला ...... भाई वो छोरा तो छूट लिया हूड तें.........
बुल्लेट मोटरसाइकिल पे कॉलेज में आवानिया धाकड़ जाट प्रिंसिपल मेंने पहली बार देखा था.... एब तो शायद हैं की न बेरा नहीं.......
Ek Aur:
हिसार जाट कालेज के हॉस्टल की भी बात याद आ गी....... उस टाइम में अखबार पढना शुरू करा था ..... थोडा थोडा बेरा पाटन लाग्या था आक कित के चाल रा स.......... तो खबर पढ़ी की जाट कालेज के हॉस्टल का वार्डन था श्री रघबीर सिंह गोयत......... शायद मिलिट्री साईंस का lecturer था .... campus में रह्य करता ........... तो भाई बंसीलाल मुख्मंत्री बना उस साल एर उस ने शराब बंधी करी..... शायद एक तारीख थी उस महीने की.... एर पहल्ड़े दिन ए गोयत साब पकडे गए दारु पीये हुए.... जमानत करवा के ल्याए बालक..हा हा हा हा हा हा हा हा हा. ...... खबर पढ़ के बहुत हांसी आई... मका इब इसका प्रिंसिपल के हाल करेगा.... हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
शहरां की खासियत बताणी थी तम सारे जाणे इब्ब माणसआँ की खासियत बताण लागे | ऋतू जी कंट्रोल करो ना ते आड़े एक दो सींग फसानिये आगे ते खूंड बाज ज्या गा ,तांक- झाँक ते करगे सें वे |
Shyad "billu" naam se oohka, jiske ye pakode famous se. Bus adde te thoda sa likad ke se uski dukan, jhajjar mod ke lowe si..
हिसार धाकड़ सहर हे हरयाणा का.
बाकी सांज ने---
(and also for roaming around the Home Science Faculty.)
बाकी सांज ने---
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