Jat Sikh and Hindu JAT are same = JAT ..!!!!!!

अरे उपेंदर भाई...मुझे ये समझ नहीं आ रहा क आपने हिन्दू होने का दुःख है..या सिख जाट या मुस्लमान जाट बी है इस बात का....जैचंद ने ये कर दिया..मुसलमानों ने ये किया..फिर सिख बन गए...इन्द्रा जी जैसी सच्ची इंसान ko सीखो ने मार दिया..फिर सिख मार दिए..फिर हिन्दू मर दिए गए....भाई जान शिकायत तो एक बच्चे की तेरह कर रहे हो..पर जब पूरी बातो का पता ही नहीं है तो क्यों लिख रहे हो...हमइ यहाँ हिन्दू और सिख जाटो का भाईचारा बढाने की कोशिश कर रहे है और आप पेट्रोल ले क आग लगाने मी लगे हो...अरे भलेमानस इंसान ...अब सुनो इन्द्रा जी की...शायद आपको ये नहीं पता की खालीस्थान बनाने की साजिश किसकी थी..भिंडरावाले को पैसा बंदूके और बाकि मदद कहा से आती थी...जब उसकी ताकत जयादा बड गे और इन्द्रा क लिए खतरा बन गया तो ऑपरेशन bluestar करव दिया...जिन बातो का पूरा ज्ञान न हो उनपे ज्यादा चर्चा नहीं करते..पहले खुद study कर लेनी कहिये... मुझे लगता है हिस्टरी आपका पसंदीदा विषय रहा हैजो हर बार आप पीछे चले जाते हो...परन्तु ये भी लगता है क हिस्ट्री अच्छी तेरह से पढ़ी भी नहीं जिससे आज आप आधी अधूरी बाते लिख रहे हो....और एक बात की आपसे गुज़ारिश है क अगर कोई अच्छे काम में मदद न की जा सके तो उसमे टांग भी नहीं आडानी चाहिए ...आप तो किसी RSS या किसी फालतू संगठन के सदस्य की तेरह बात कर रहे है..जो लकीर क फ़कीर होते है..जो एक चीज़ बता दी उसी को आखे बंद करके बोलते रहते हैं.....जागो उपेंदर जी जागो..भाईचारे को बढाने में मदद करो..!
और अगर नहीं कर सकते तो भाई जी ये फालतू का रोना धोना बंद कर दो....!!

~~~~~जागो जाटो जागो~~~~~~

सनेह्पुर्व्क
देओल..



हकीकत आप बता दो जनाब, लेकिन किसी ठोस प्रमाण के साथ बताना...

मेरी ये समझ में नहीं आता लोग हिंदुओं के इतने दुश्मन क्यों हो जाते हैं...लगभग 1000 साल पहले भारत में सब हिंदू ही थे...इसके बाद जयचंद ने गद्दारी की तो यहां मुसलमान पैठ बना गए...इसके बाद यहां हिंदुओं को मिटाने की खूब कोशिश हुई...क्यों??? क्या कसूर था हिंदुओं का? क्या यह कसूर था कि उन्होंने कड़ी मेहनत से बेशुमार धन जोड़ा था और भारत को दुनिया का सबसे अमीर देश बनाया था? क्या यह कसूर था की सदियों पुरानी अपनी संस्कृति को संभाला था? एक जयचंद ने गद्दारी की तो देश के लिए बलिदान भी तो अनेकों हिंदुओं ने दिया...इसके बाद अंग्रेज आ गए...मुसलमानों का पतन हो गया, लेकिन अंग्रेज हावी हो गए...इस बीच लगभग 300 साल पहले गुरु गोबिंद सिंह के नेतृत्व में सिखों का उदय हुआ...1947 में किसी तरह देश आजाद हुआ...देश का बटवारा हुआ...भारी खून-खराबा हुआ...जैसे ही कोई नया धर्म वजूद में आता है तो उसे मानने वाले खुद की अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं...मुसलमान, जिनमें से अधिकतर कभी हिंदू ही थे, वे हमारे दुश्मन बन गए और हमें मिटाने में लग गए...वे तो बंगाली मुसलमानों को भी कुचलने में लग गए, जिसके चलते 1971 में उन्हें सबक सिखाया गया...जो सिख धर्म कभी भारत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हुआ था, उसमें से एक धड़ा खालिस्तान की मांग करने लगा...पंजाब में हिंदुओं पर जुल्म ढहाने लगा...क्यों??? क्या कसूर था हिंदुओं का??? ...इसके बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ, इतनी अच्छी नेता इंदिरा गांधी को मार दिया गया...फिर सिखों का कत्ले-आम हुआ...इसमें कोई मुझे बताए कि हिंदुओं की कहां गलती है? पहले हिंदुओं को सताया गया...तब हिंदुओं को सख्ती दिखानी पड़ी...
बिना धर्म के कोई नहीं जी सकता...यही कारण है कि इस दुनिया में अधिकतर लोगों का कोई न कोई धर्म है. आखिर कोई तो वजह होगी जो अमेरिका और यूरोप के 'बेहद बुद्धिमान' एवं तथाकथित अत्याधुनिक विचारों के लोगों ने भी किसी न किसी धर्म को अपनाया हुआ है...जो ये समझता हो कि ये धर्म वगैरह सब फिजूल की बातें हैं तो फिर वो बिना धर्म के जीकर दिखाए, तब मानेंगे...इसके लिए ऐसा नाम रखना होगा, ऐसी वेशभूषा, ऐसा रहन-सहन अपनाना होगा, जो किसी भी धर्म से ताल्लुक न रखता हो...खुद के, बच्चों के शादी-ब्याह के समय, कोई नौकरी हासिल करते समय, कहीं दाखिला लेते समय भी ये कहना होगा कि मेरा कोई धर्म नहीं है...पता चल जाएगा कि बिना धर्म के जीना क्या होता है...कोई भले ही कितनी ही डींगें हांकता रहे कि वो तो धर्म में यकीन ही नहीं करता, इसके बावजूद वो किसी न किसी रूप में धर्म से जुड़ा होता है...जब हम किसी को अपना नाम बताते हैं तो बस वहीं हम धर्म का फायदा उठा लेते हैं...ऐसे तथाकथित 'नास्तिक' व्यापार में, ऑफिस में, नौकरी में कुछ ऐसा नाम बताकर दिखाएं, जिसका किसी धर्म से ताल्लुक न हो...तब चलेगा असली पता कि धर्म का क्या फायदा मिल रहा होता है उन्हें...बिना धर्म के इंसान पशु समान है...अगर हमें किसी धर्म का लाभ मिल रहा है तो ये हमारा फर्ज बनता है कि हम उस धर्म का अहसान मानें और उसकी भलाई सोचें...ये ठीक वैसे ही है, जैसे कि कोई पेड़ हमें छाया का सुख दे रहा है तो हमारा फर्ज बनता है कि उस पेड़ की जड़ें न काटें, बल्कि उसका कुछ भला सोचें...जाट सदियों से हिंदू धर्म की छात्र-छाया में जी रहे हैं, बल्कि यूं कहना चाहिए कि जाट हिंदू धर्म का एक बेहद अहम हिस्सा हैं...ऐसे में हिंदू धर्म की रक्षा करना सभी जाटों का फर्ज बनता है और अधिकतर जाट ऐसा कर भी रहे हैं. जाट हिंदू धर्म की बहुत शान बढ़ा रहे हैं और आशा की जानी चाहिए कि आगे भी बढ़ाते रहेंगे. यह कहना कोई अतिशयोक्ति न होगा कि यह हिंदू धर्म की, भारत देश की महानता ही है कि जाट जैसी महान जाति उसके पास है...
अब जनाब आप बताओ अपनी...इस हिंदू धर्म ने आपके साथ या आपके हिसाब से अन्य जाटों के साथ ऐसा क्या बुरा कर दिया, जो आपको हिंदू धर्म छोड़कर सिख धर्म अपनाना पड़ा...? मजे की बात यह है कि आप सिख भी पूरी तरह से नहीं बने...न आप दिखने में, न बोल-चाल में कहीं से सिख लगते हो...न ही आपका नाम सिखों वाला है...मुझे तो ऐसा लगता है कि यदि कोई सिख आपसे कहेगा कि देखा सिख धर्म कितना महान है, तुम्हें सिख बनने पर विवश कर दिया तो आप उसे कहोगे कि आप तो सिख बने ही नहीं हो और यदि कोई आपको हिंदू कहेगा तो आप कहोगे कि नहीं आप तो सिख हो...ये आपका बढ़िया तरीका है...:suspicion:
 
who ever is supporting khalistan let it b a jaat or a bappa or a sc sikh it is totally wrong...agar khalistan ban gaya to pakistan 1 din se kam time mai khalistan pur kajza kar leega..pher india ke liye aur dikkat ho jayegi....tab khalistan supporters to samajh aayegi ki unhone kitni baadi galti kar di hai bilkul waise hi jaise ki jinnah ko pakistan bana kar bahut pachtawaa hua tha..
 
अरे उपेंदर भाई...मुझे ये समझ नहीं आ रहा क आपने हिन्दू होने का दुःख है..या सिख जाट या मुस्लमान जाट बी है इस बात का....जैचंद ने ये कर दिया..मुसलमानों ने ये किया..फिर सिख बन गए...इन्द्रा जी जैसी सच्ची इंसान ko सीखो ने मार दिया..फिर सिख मार दिए..फिर हिन्दू मर दिए गए....भाई जान शिकायत तो एक बच्चे की तेरह कर रहे हो..पर जब पूरी बातो का पता ही नहीं है तो क्यों लिख रहे हो...हमइ यहाँ हिन्दू और सिख जाटो का भाईचारा बढाने की कोशिश कर रहे है और आप पेट्रोल ले क आग लगाने मी लगे हो...अरे भलेमानस इंसान ...अब सुनो इन्द्रा जी की...शायद आपको ये नहीं पता की खालीस्थान बनाने की साजिश किसकी थी..भिंडरावाले को पैसा बंदूके और बाकि मदद कहा से आती थी...जब उसकी ताकत जयादा बड गे और इन्द्रा क लिए खतरा बन गया तो ऑपरेशन bluestar करव दिया...जिन बातो का पूरा ज्ञान न हो उनपे ज्यादा चर्चा नहीं करते..पहले खुद study कर लेनी कहिये... मुझे लगता है हिस्टरी आपका पसंदीदा विषय रहा हैजो हर बार आप पीछे चले जाते हो...परन्तु ये भी लगता है क हिस्ट्री अच्छी तेरह से पढ़ी भी नहीं जिससे आज आप आधी अधूरी बाते लिख रहे हो....और एक बात की आपसे गुज़ारिश है क अगर कोई अच्छे काम में मदद न की जा सके तो उसमे टांग भी नहीं आडानी चाहिए ...आप तो किसी RSS या किसी फालतू संगठन के सदस्य की तेरह बात कर रहे है..जो लकीर क फ़कीर होते है..जो एक चीज़ बता दी उसी को आखे बंद करके बोलते रहते हैं.....जागो उपेंदर जी जागो..भाईचारे को बढाने में मदद करो..!
और अगर नहीं कर सकते तो भाई जी ये फालतू का रोना धोना बंद कर दो....!!

~~~~~जागो जाटो जागो~~~~~~

सनेह्पुर्व्क
देओल..
bhai jahaa tak maine pada hai to bindrawala ko weapons pakistan se milte thee.....facts to jatland pur kissi ko nahi pata waise to sab apne apne andazee se kehtee hai...kissi bhi tarahh ki desh se gaddari galat hai chahai gaddarr hindu ho ya sardar ho ya muslim ho....aajtak ka sabse khatarnak terrorist tha jo eek hindu tha prabhakaran jisne sri lanka mai eek alag desh ki maang ki thi mai to usse bhi galat maanta hu....mujhe 3 tarah se logo se bahut nafrat hai..1st jo mere desh ke khilaf kuch bole 2nd jo mere dharam ke khilaf kuch bole n 3rd jo meri jaati ke liye kuch bole...
 
Sandeep kisi ko pasand nhi ye teen baate...sabko apne desh .kaum se payar hota hai aur gaddaro se nafrat.....main yaha kisi bhindrawale ya parbhakran ko support nahi kar raha ..mera post dhang se pad..main yaha indra ji k bluestar operation ki wajah bata raha hun jiski wajah 84 k dange aur baad main hindu sikh dange hue the jise shock se upender bahi abhi tak ubhar nahi paye hain......aur bhindrawale ko banae wali b indra ya Congress thi aur khatam karne wali b..but nuksaan kiska hua?? humara... koi b reply karne se pehle dhyan se pad liya kar....last post main maine sari baate bhula k bhaichara badane ki baat pe jor diya hai...na ki kisi gaddar ko support kia na kuch aur...better tc next time b4 reply...


bhai jahaa tak maine pada hai to bindrawala ko weapons pakistan se milte thee.....facts to jatland pur kissi ko nahi pata waise to sab apne apne andazee se kehtee hai...kissi bhi tarahh ki desh se gaddari galat hai chahai gaddarr hindu ho ya sardar ho ya muslim ho....aajtak ka sabse khatarnak terrorist tha jo eek hindu tha prabhakaran jisne sri lanka mai eek alag desh ki maang ki thi mai to usse bhi galat maanta hu....mujhe 3 tarah se logo se bahut nafrat hai..1st jo mere desh ke khilaf kuch bole 2nd jo mere dharam ke khilaf kuch bole n 3rd jo meri jaati ke liye kuch bole...
 
Sandeep kisi ko pasand nhi ye teen baate...sabko apne desh .kaum se payar hota hai aur gaddaro se nafrat.....main yaha kisi bhindrawale ya parbhakran ko support nahi kar raha ..mera post dhang se pad..main yaha indra ji k bluestar operation ki wajah bata raha hun jiski wajah 84 k dange aur baad main hindu sikh dange hue the jise shock se upender bahi abhi tak ubhar nahi paye hain......aur bhindrawale ko banae wali b indra ya Congress thi aur khatam karne wali b..but nuksaan kiska hua?? humara... koi b reply karne se pehle dhyan se pad liya kar....last post main maine sari baate bhula k bhaichara badane ki baat pe jor diya hai...na ki kisi gaddar ko support kia na kuch aur...better tc next time b4 reply...
waise maine apne post mai kaha leekha hai ki tune kissi ko support kiya hai...next comment daale to meree uss point ko highlight jaroor kar diyo......doosri baaat indraa se zeyada haath pakistan ka thaa bindrawala ko bananee mai...pakistan harr us admi ke sath hota hai jo india ke against koi kaam karta hai......maane koi issi baat na ki jisse bhaicharaa kharab hota hoo...
 
kissi bhi tarahh ki desh se gaddari galat hai chahai gaddarr hindu ho ya sardar ho ya muslim ho....aajtak ka sabse khatarnak terrorist tha jo eek hindu tha prabhakaran jisne sri lanka mai eek alag desh ki maang ki thi mai to usse bhi galat maanta hu....mujhe 3 tarah se logo se bahut nafrat hai..1st jo mere desh ke khilaf kuch bole 2nd jo mere dharam ke khilaf kuch bole n 3rd jo meri jaati ke liye kuch bole...

Teri ye line pad k nu lagya jukr mane koi support kar diya ho ya hamne to apne desh kaum te payar e konya...aur ek baat aur tune kaha indra se jayads support pakistan ne kia..maanli teri baat..but indra ne kyu karya..pakistan to sre aam dushman se..vo to aise kaam karega..indra ne to gaddari hi kari na..jo khule am dushman hai vo kam khatarnak hoya kare..dost ya koi apna jab gaddari karta hai to ghar apna hi jalta hai aur bharosa b...


waise maine apne post mai kaha leekha hai ki tune kissi ko support kiya hai...next comment daale to meree uss point ko highlight jaroor kar diyo......doosri baaat indraa se zeyada haath pakistan ka thaa bindrawala ko bananee mai...pakistan harr us admi ke sath hota hai jo india ke against koi kaam karta hai......maane koi issi baat na ki jisse bhaicharaa kharab hota hoo...
 
जो सिख धर्म कभी भारत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हुआ था, उसमें से एक धड़ा खालिस्तान की मांग करने लगा...पंजाब में हिंदुओं पर जुल्म ढहाने लगा...क्यों??? क्या कसूर था हिंदुओं का??? ...इसके बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ, इतनी अच्छी नेता इंदिरा गांधी को मार दिया गया...फिर सिखों का कत्ले-आम हुआ...इसमें कोई मुझे बताए कि हिंदुओं की कहां गलती है? पहले हिंदुओं को सताया गया...तब हिंदुओं को सख्ती दिखानी पड़ी...


पंजाब में अकालियों की काट करने के लिये इंदिरा गांधी ने ही भिंडरावाला को शह दी थी । लेकिन ताकतवर होने के बाद भिंडरावाला भस्मासूर बन गया और अलग खालिस्तान की मांग करने लगा । अगर इंदिरा गांधी आपरेशन ब्लू स्टार की इज़ाज़त नहीं देती तो भिंडरावाला पकिस्तान की सहयता से पंजाब में शस्त्र विद्रोह की तैयारी कर चुका था । इंदिरा गांधी ने मौके पर कार्यवाही कर इस नापाक इरादे को नेस्तनाबूत कर दिया । भिंडरावाला मारा गया लेकिन उसके अनुयाईयों को लगा कि इंदिरा गांधी ने उनके साथ धोखा किया है इसिलिये उन्होने इंदिरा गांधी की हत्या कर दी । इंदिरा गांधी को सिखों ने नहीं बल्कि भिंडरावाला के शागिदों ने मारा और तमाम सिख कौम को इससे जोडना सरासर गलत है ।
 
kissi bhi tarahh ki desh se gaddari galat hai chahai gaddarr hindu ho ya sardar ho ya muslim ho....aajtak ka sabse khatarnak terrorist tha jo eek hindu tha prabhakaran jisne sri lanka mai eek alag desh ki maang ki thi mai to usse bhi galat maanta hu....mujhe 3 tarah se logo se bahut nafrat hai..1st jo mere desh ke khilaf kuch bole 2nd jo mere dharam ke khilaf kuch bole n 3rd jo meri jaati ke liye kuch bole...

Teri ye line pad k nu lagya jukr mane koi support kar diya ho ya hamne to apne desh kaum te payar e konya...aur ek baat aur tune kaha indra se jayads support pakistan ne kia..maanli teri baat..but indra ne kyu karya..pakistan to sre aam dushman se..vo to aise kaam karega..indra ne to gaddari hi kari na..jo khule am dushman hai vo kam khatarnak hoya kare..dost ya koi apna jab gaddari karta hai to ghar apna hi jalta hai aur bharosa b...
indira to khudd eee parsi thi tu usse aur kee expect karegaaa.....yoo gandhi n nehru parivaar ne desh ka naash kar diyaa...maane to yoo na beraa ki ye nehru sirname bana kab.....maine aaj tak nehru family ko chod ke kissi aur ke naam ke aage nehru sir name nahi deekha....if we want to hav bhaichara among all indians thn we hav to get rid off this gandhi family...they r d biggest traitors..
 
'Jaat' and 'jatt' are different groups.....different cultures.....different languages.....different philosophies.....different religions.....different segments...different subsets !!

For me they are different !!

Unity - When one talks about the unity then he/she should not restrict himself/herself to this hindu jaat and sikh jatt unity only. He must think about the unity of all the castes and religions and i am pretty much sure that, after considering this thought, he/she will be able to explore that humanity is above all of these small small little little concepts and thoughts.
 
उपेंदर कह तो तेरे पाँव पकड़ ल्यु मांफी देता हो तो उन भी तू बढ़ा स ;)
के तो इतिहास ठीक कर ले अगर ठीक स तो तेरे वाली इतिहास की किताब मैंने दे दे मैं मेरा ठीक कर ल्यु :)


पंजाब के अंतकवाद का सबसे बड़ा कसूरवार लाला जगत नारायण था | इद्रा का हाथ जरनैल सिंह भिंडरावाला के ऊपर नहीं लाला के ऊपर था | जनरल सुबेग सिंह भंगु ने भिंडरावाला का साथ दिया इस सारी लड़ाई की प्लानिंग जनरल साहब किया करते थे | जनरल भंगु साहब इन्द्रा और जरनल अरोरा की साजिश के शिकार हुए थे जो की बाद में वो कोर्ट से जीत भी गए थे परन्तु उन्होंने इस सरकार के साथ से भिंडरावाला का साथ बेहतर समझा |
पंजाब में उग्रवाद इन भापो के कारण आया था ना के हिन्दू लोगो के कारण , धर्म का जामा तो इसे बाद में पहनाया गया था | पंजाब में हिन्दू ज्यादातर शहरो में बसते हैं , जिनमे अरोरा , खत्री , बनिए , ब्राह्मण मुख्य जातियां हैं | इन हिन्दुओ में से कितने बनियों और ब्राह्मणों ने इस उग्रवाद के डर से पंजाब से पलायन किया ? गिनती के लोगो ने किया होगा , वहा से जो सबसे बड़ी तादाद में भागने वाले हिन्दू थे वे थे अरोरा , खत्री | अगर ऐसा ही धर्म के नाम पर कट्टरवाद की लड़ाई होती तो वहा बनिए नहीं मिलने थे | मैंने उस दौर को नजदीक से देखा हैं पंजाब के सुनाम , रामपुराफूल, मलेरकोटला , अहमदगढ़ , लुधियाना , पटियाला , भटिंडा , राजपुरा , मोर मंडी , संगरूर आदि कस्बो में रहा हु | आप लोग जो बाते कर रहे हैं यह सब मीडिया की बताई हुई हैं उस वक़्त की हकीक़त से इसका कोई वास्ता नहीं हैं |
 
अरे उपेंदर भाई...मुझे ये समझ नहीं आ रहा क आपने हिन्दू होने का दुःख है..या सिख जाट या मुस्लमान जाट बी है इस बात का....जैचंद ने ये कर दिया..मुसलमानों ने ये किया..फिर सिख बन गए...इन्द्रा जी जैसी सच्ची इंसान ko सीखो ने मार दिया..फिर सिख मार दिए..फिर हिन्दू मर दिए गए....भाई जान शिकायत तो एक बच्चे की तेरह कर रहे हो..पर जब पूरी बातो का पता ही नहीं है तो क्यों लिख रहे हो...हमइ यहाँ हिन्दू और सिख जाटो का भाईचारा बढाने की कोशिश कर रहे है और आप पेट्रोल ले क आग लगाने मी लगे हो...अरे भलेमानस इंसान ...अब सुनो इन्द्रा जी की...शायद आपको ये नहीं पता की खालीस्थान बनाने की साजिश किसकी थी..भिंडरावाले को पैसा बंदूके और बाकि मदद कहा से आती थी...जब उसकी ताकत जयादा बड गे और इन्द्रा क लिए खतरा बन गया तो ऑपरेशन bluestar करव दिया...जिन बातो का पूरा ज्ञान न हो उनपे ज्यादा चर्चा नहीं करते..पहले खुद study कर लेनी कहिये... मुझे लगता है हिस्टरी आपका पसंदीदा विषय रहा हैजो हर बार आप पीछे चले जाते हो...परन्तु ये भी लगता है क हिस्ट्री अच्छी तेरह से पढ़ी भी नहीं जिससे आज आप आधी अधूरी बाते लिख रहे हो....और एक बात की आपसे गुज़ारिश है क अगर कोई अच्छे काम में मदद न की जा सके तो उसमे टांग भी नहीं आडानी चाहिए ...आप तो किसी RSS या किसी फालतू संगठन के सदस्य की तेरह बात कर रहे है..जो लकीर क फ़कीर होते है..जो एक चीज़ बता दी उसी को आखे बंद करके बोलते रहते हैं.....जागो उपेंदर जी जागो..भाईचारे को बढाने में मदद करो..!
और अगर नहीं कर सकते तो भाई जी ये फालतू का रोना धोना बंद कर दो....!!

~~~~~जागो जाटो जागो~~~~~~

सनेह्पुर्व्क
देओल..


पढ़े-लिखे होकर ये फिजूल की बातें क्यों करते हो??? मेरी पोस्ट तो दिख गई, लेकिन राका की वो पोस्ट नहीं दिखी, जिसके जवाब में मुझे इतिहास में जाना पड़ा... राका ने कहा था "उपेंद्र का rss वालों ने कबूतर बना रखा हैं , जो बिल्ली न आती देख आँख मींच लिया करे न्यू ए यो कोणी देखना चाहवे के हक़ीक़त के स ...." अब हकीकत देखने के लिए मैं इतिहास में चला गया तो क्या गलत किया?
भाई, मुझे हिंदू होने का कोई दुःख नहीं है...हां, इस बात का बहुत दुःख है कि हमारे कुछ भाई दूसरे धर्मों से जुड़ गए...उन्हें दिग्भ्रमित किया जा रहा है...उन्हें अपने ही भाईयों से अलग होने के लिए उकसाया जा रहा है...पाकिस्तानी जाट तो एक तरह से अलग हो ही गए हैं, सिख धर्म के नाम पर पंजाब के जाटों को भी बराबर अलगाव के लिए भड़काया जा रहा है...
मुझे कोई बस ये बताए कि जब सिख धर्म के 10 के 10 गुरुओं में से कोई भी जाट नहीं है तो फिर जाटों के सिख होने का मतलब क्या है? अगर ये बात सबको पता चल जाए तो हमारे सिख जाट भाईयों का जीना मुश्किल हो जाएगा...ये निर्दयी दुनिया उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करेगी...अभी अधिकतर दुनिया को ये बात पता नहीं है कि कोई भी सिख गुरु जाट नहीं था...जिन्हें पता है, वे जाटों का मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते...मैंने ये बात खुद नोट की है...मैंने खुद इस बाबत गैर-जाट सिखों को जाटों की मजाक उड़ाते देखा है...एक मौके पर कुछ गैर-जाट सिख यह कहकर जाटों की बेइज्जती कर रहे थे कि अधिकतर सिख गुरु गैर-जाट थे...तब मैंने समझा था कि हो सकता है कोई एकाध गुरु तो जाट होगा, लेकिन बाद में पता चला कि कोई भी नहीं है...कोई मुझे बताए कि यदि हमारा कोई पढने-लिखने वाला या कोई काम-धंधा करने वाला, खुद पर गर्व करने वाला सिख जाट भाई गैर-जाट सिखों में बैठा हो और उसे यह कहा जाए कि "ओए जट्ट, तू है की?...जिन गुरुआं मोड़े तू शीश झुकान्ना ए उन्ना विच कोई वी जट्ट नि ए, सब दे सब खत्री पंजाबी ने..." तो उस जाट भाई के पास क्या जवाब होगा? और भाई, इस थ्रेड में इस विषय को छेड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन राका ने ऐसा करने के लिए उकसाया...तुम हिंदू और सिख जाटों को एक करना चाहते हो, तो तुम्हारी कोशिश का स्वागत है...
 
@raka

जनाब आपकी समस्या यह है कि बहुमत में से कुछेक गलत लोगों को ध्यान में रखोगे, लेकिन बाकी ठीक लोगों पर ध्यान नहीं दोगे...आपको मुट्ठी-भर गद्दार याद रहते हैं, लेकिन अनगिनत देशभक्त याद नहीं रहते, आपको भ्रष्ट याद रहते हैं, लेकिन ईमानदार याद नहीं रहते, न ही यह याद रहता कि भ्रष्टों के खिलाफ कार्रवाई भी होती है...आपने ये तो देख लिया कि कुछेक जाट अंतर्राज्यीय विवाह पसंद नहीं करते, लेकिन ये नहीं देखा कि बहुत सारे पसंद भी करते हैं..
इंदिरा गांधी का हाथ चाहे लाला जगतनारायण पर था, चाहे जरनैल सिंह भिंडरावाले पर, लेकिन ये खालिस्तान की मांग क्यों उठी? बेक़सूर हिंदुओं पर क्यों जुल्म ढहाए गए? अगर भिंडरावाले को अकालियों की काट के रूप में तैयार किया गया था तो वो पंजाब की राजनीति में हाथ आजमाता...वहां का मुख्यमंत्री बनता...जो सिख गुरु भारत की भलाई के लिए मर-मिट गए, क्या भिंडरावाला उन गुरुओं से भी बड़ा था??? और आपकी जानकारी के लिए बता दूं लाला जगत नारायण भिंडरावाले का भी और कांग्रेसी नेताओं का भी कटु आलोचक था. उसे तो 1981 में ही मरवा दिया गया था. आतंकवाद वहां इसके काफी बाद में फैला.
 
pannu veer ji .....but still they are not more then 2-3 %.....there is no influence of pro khalistanis elements...most of pro khalistani want that Rajoana should be hanged so that they might destabilized punjab again..... most of them are weakend and situational Khalistani means some time they try to show there anger against 1984 and bluestar operation by showing there hate against india and some time they think its cool to be Khalistani ..most of these guys are from semi urban and upper middle class families but they are not more then 3-4%....in recent election pro khalistani parties got 0.78% of vote share
Bajwa bhai,,
very recently what we have witnessed in punjab shows the influence of pro-khalistanis, ( the judgement on Balwant Singh ''Rajoana'') . People were openly out on streets and shouting Khalistan slogans too..!!!
 
Jatt in Punjab are not homogeneous people at all......We are Divided in four sets jatt from malwa,jatt from doaba, jatts from Majha and jatt from west punjab ...and all have negative views about each other....and there is no intermarriage with each other till mid 19th century only relgian bound us but culturally and linguistically we are bit different from each other we bajwas,virk,cheema,heer,ghuman,waraich,sandhalwa and kahlon are jatt from west punjab we are among that first jats those converted to sikhism all great jat sikh warriors are from west punjab maharaja ranjit singh,kopar singh virk and bhagat singh and many more ..after anglo sikh war our political domination came to end ..we are very secular in nature and respect all religion and we are very educated then others jatt of punjab ....jatts of Majha are culturally very close to us they are very brave most of jatt clan in majha are randhawa,sandhu,chahal,bhagnu gill, bal and dhillon but take hardline stands on sikh issue but most of them are secular.....then came jatts of doaba they are bit banya type of jatts and has down nothing for punjab or for sikhism.. not much secular.. converted to sikhism in 19th century only ..and most of them want khalistan also intermarriage with non jatt like saini,rajput and lubana but they have no political power so they cant do any think most of jatt clan in doaba are bains,dosangh,pannu,deol,padda,bhandal,aujla narwal and johal..... jats of malwa are now the political power of punjab they are first one who mix religion and politices they still have very strong hindu influence over them but they are the one who promote negative view about hinduism in punjab most of them are still very much uneducated ....for them sikhism is a political issue most of jatt clan of malwa is mann,dhaliwal,grewal,sidhu,brar,beniwal,punia,atha wal,dhindsa,chahal,gill,dhaiya,dullat,dhull,chahal and jakhar.........
'Jaat' and 'jatt' are different groups.....different cultures.....different languages.....different philosophies.....different religions.....different segments...different subsets !!

For me they are different !!

Unity - When one talks about the unity then he/she should not restrict himself/herself to this hindu jaat and sikh jatt unity only. He must think about the unity of all the castes and religions and i am pretty much sure that, after considering this thought, he/she will be able to explore that humanity is above all of these small small little little concepts and thoughts.
 
Last edited:
Excuse me brother, but looking at your views I can easily guess how well educated Jat from Western region are !
 
Guru Baba Deep Singh Ji

Guru Baba Deep Singh was born into a Jat Sikh family in 1682 in the district of Amritsar. His father's name was Bhagto Singh Sandhu from the village of Pahuwind. Sindhu (सिंधु) Sandhu (संधु) Sindher (सिंढर) Sindhu / Sindhoo (सिन्धू) Sindhar (सिंधर) Sindhad (सिंधड़) gotra Jats are found in Haryana, Punjab, Rajasthan, Uttar Pradesh, Jammu and Kashmir in India and also in Pakistan. Sindhu is an ancient Jat gotra.

Source:
http://www.jatland.com/home/Baba_Deep_Singh & http://www.jatland.com/home/Sandhu
 
Last edited:
What one was wanting to say has been proved by the facts given by the below quoted lines. I appreciate that it is agreed that Hindu Jaat and Sikh Jatt are different and even Sikh Jatt are divided in different subgroups.

A normal hand has 4 fingers and 1 thumb. They all are different fingers and associated with different activities which they are made by Him for. But in the end they form a hand and ultimately a body. So, in the same way, different castes, religions, cultures and sub-cultures etc. are different but combined to form the universe.

Jatt in Punjab are not homogeneous people at all......We are Divided in four sets jatt from malwa,jatt from doaba, jatts from Majha and jatt from west punjab ...and all have negative views about each other....and there is no intermarriage with each other till mid 19th century only relgian bound us but culturally and linguistically we are bit different from each other we bajwas,virk,cheema,heer,ghuman,waraich,sandhalwa and kahlon are jatt from west punjab we are among that first jats those converted to sikhism all great jat sikh warriors are from west punjab maharaja ranjit singh,kopar singh virk and bhagat singh and many more ..after anglo sikh war our political domination came to end ..we are very secular in nature and respect all religion and we are very educated then others jatt of punjab ....jatts of Majha are culturally very close to us they are very brave most of jatt clan in majha are randhawa,sandhu,chahal,bhagnu gill, bal and dhillon but take hardline stands on sikh issue but most of them are secular.....then came jatts of doaba they are bit banya type of jatts and has down nothing for punjab or for sikhism.. not much secular.. converted to sikhism in 19th century only ..and most of them want khalistan also intermarriage with non jatt like saini,rajput and lubana but they have no political power so they cant do any think most of jatt clan in doaba are bains,dosangh,pannu,deol,padda,bhandal,aujla narwal and johal..... jats of malwa are now the political power of punjab they are first one who mix religion and politices they still have very strong hindu influence over them but they are the one who promote negative view about hinduism in punjab most of them are still very much uneducated ....for them sikhism is a political issue most of jatt clan of malwa is mann,dhaliwal,grewal,sidhu,brar,beniwal,punia,atha wal,dhindsa,chahal,gill,dhaiya,dullat,dhull,chahal and jakhar.........
 
पहले तो उपेंदर भाई को नमस्कार...ab thodi si is pade likhe ki fijool baate aur sun lo... ...भाई जान अगर इतिहास की बात कर रहे है तो चलो शुरू से शुरू करते हैं...हिन्दू धरम क हिसाब से दुनिया दो लोगो से शुरू हुई थी ..मनु और शकुन्तला..मुस्लिम धरम के हिसाब से आदम और हब्बा ..और इसाई धरम क हिसाब से एडम और हीव ...यानि इसका मतलब है क इस हिसाब से सब भाई बहिन हुए कही न कही...और उन लोगो का कोई धरम नहीं था..न vo जाट थे न ब्रहमिन न राजपूत na कोई और..vo siraf इंसान थे...चलो अब बात करते है गुरु लोगो की या हमारे भगवानो की....आपने कहा क कोई बी सिख गुरु जाट नहीं था हो सिख जाट कैसे हो गए...हिन्दू धरम क आनुसार और हमारी कायनात क रचियता ब्रम्हा विष्णु और महेश हैं...अब ये बताऊ इनमे से जाट कौन था?? या आपका कोई जात गुरु अलग से हो तो बता दो..भाई साब ये जाती पति इंसान क अपने कर्मो से बननी है और इंसान ही है जिसने अपने अपने धरम बनाये और उन्ही के पीछे चलते रहे..उनेंदर भाई बाते बहुत है ..आपके हर सवाल का जवाब भी है..पर मुझे लगता है क आप समझने की बजाये आपको ये फील होता है की आपकी बात कम कैसे राह गयी..मैंन मंदिर बी चला जाता हूँ..मैं church बी जाता हूँ..मैं पीर पे या दरगाह पे भी चला जाता हूँ और गुरूद्वारे भी ..क्युकी सब धरम लोगो को एक ही बात बताते है की भाईचारा..सच्च और आचे काम करो...बस नाम अलग अलग है...फिर भी जम कौम बन ही गयी है तो कौम क लिए बी जिम्मेवारी बनती है..तो भाई जान पहले तो एक बात साफ़ कर दू क हर धरम एक विश्वास है एक धारणा है जिसे हम मानते है...इसका किसी भी तरीके से ये मतलब नहीं होना कहिये की किस धरम का गुरु जाट था या राजपूत या ब्रहमिन होना कहिये तभी उसे माना जायेगा ...धरम या धरना किसी गुरु की जात को देख कर नहीं बनती बल्कि उनके द्वारा किये हुए दुनिया क भलई क कामो के लिए बनती है..मेरी कोशिश सिर्फ मिलाने की है न की तोड़ने की ..अगर आप बी इसमें सहायता करे तो बहुत ख़ुशी होगी...उम्मीद है की मेरी ये थोड़े से शब्दों मैं कही गयी बात आपको समझ आ गयी होगी..






पढ़े-लिखे होकर ये फिजूल की बातें क्यों करते हो??? मेरी पोस्ट तो दिख गई, लेकिन राका की वो पोस्ट नहीं दिखी, जिसके जवाब में मुझे इतिहास में जाना पड़ा... राका ने कहा था "उपेंद्र का rss वालों ने कबूतर बना रखा हैं , जो बिल्ली न आती देख आँख मींच लिया करे न्यू ए यो कोणी देखना चाहवे के हक़ीक़त के स ...." अब हकीकत देखने के लिए मैं इतिहास में चला गया तो क्या गलत किया?
भाई, मुझे हिंदू होने का कोई दुःख नहीं है...हां, इस बात का बहुत दुःख है कि हमारे कुछ भाई दूसरे धर्मों से जुड़ गए...उन्हें दिग्भ्रमित किया जा रहा है...उन्हें अपने ही भाईयों से अलग होने के लिए उकसाया जा रहा है...पाकिस्तानी जाट तो एक तरह से अलग हो ही गए हैं, सिख धर्म के नाम पर पंजाब के जाटों को भी बराबर अलगाव के लिए भड़काया जा रहा है...
मुझे कोई बस ये बताए कि जब सिख धर्म के 10 के 10 गुरुओं में से कोई भी जाट नहीं है तो फिर जाटों के सिख होने का मतलब क्या है? अगर ये बात सबको पता चल जाए तो हमारे सिख जाट भाईयों का जीना मुश्किल हो जाएगा...ये निर्दयी दुनिया उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करेगी...अभी अधिकतर दुनिया को ये बात पता नहीं है कि कोई भी सिख गुरु जाट नहीं था...जिन्हें पता है, वे जाटों का मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते...मैंने ये बात खुद नोट की है...मैंने खुद इस बाबत गैर-जाट सिखों को जाटों की मजाक उड़ाते देखा है...एक मौके पर कुछ गैर-जाट सिख यह कहकर जाटों की बेइज्जती कर रहे थे कि अधिकतर सिख गुरु गैर-जाट थे...तब मैंने समझा था कि हो सकता है कोई एकाध गुरु तो जाट होगा, लेकिन बाद में पता चला कि कोई भी नहीं है...कोई मुझे बताए कि यदि हमारा कोई पढने-लिखने वाला या कोई काम-धंधा करने वाला, खुद पर गर्व करने वाला सिख जाट भाई गैर-जाट सिखों में बैठा हो और उसे यह कहा जाए कि "ओए जट्ट, तू है की?...जिन गुरुआं मोड़े तू शीश झुकान्ना ए उन्ना विच कोई वी जट्ट नि ए, सब दे सब खत्री पंजाबी ने..." तो उस जाट भाई के पास क्या जवाब होगा? और भाई, इस थ्रेड में इस विषय को छेड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन राका ने ऐसा करने के लिए उकसाया...तुम हिंदू और सिख जाटों को एक करना चाहते हो, तो तुम्हारी कोशिश का स्वागत है...
 
पहले तो उपेंदर भाई को नमस्कार...ab thodi si is pade likhe ki fijool baate aur sun lo... ...भाई जान अगर इतिहास की बात कर रहे है तो चलो शुरू से शुरू करते हैं...हिन्दू धरम क हिसाब से दुनिया दो लोगो से शुरू हुई थी ..मनु और शकुन्तला..मुस्लिम धरम के हिसाब से आदम और हब्बा ..और इसाई धरम क हिसाब से एडम और हीव ...यानि इसका मतलब है क इस हिसाब से सब भाई बहिन हुए कही न कही...और उन लोगो का कोई धरम नहीं था..न vo जाट थे न ब्रहमिन न राजपूत na कोई और..vo siraf इंसान थे...चलो अब बात करते है गुरु लोगो की या हमारे भगवानो की....आपने कहा क कोई बी सिख गुरु जाट नहीं था हो सिख जाट कैसे हो गए...हिन्दू धरम क आनुसार और हमारी कायनात क रचियता ब्रम्हा विष्णु और महेश हैं...अब ये बताऊ इनमे से जाट कौन था?? या आपका कोई जात गुरु अलग से हो तो बता दो..भाई साब ये जाती पति इंसान क अपने कर्मो से बननी है और इंसान ही है जिसने अपने अपने धरम बनाये और उन्ही के पीछे चलते रहे..उनेंदर भाई बाते बहुत है ..आपके हर सवाल का जवाब भी है..पर मुझे लगता है क आप समझने की बजाये आपको ये फील होता है की आपकी बात कम कैसे राह गयी..मैंन मंदिर बी चला जाता हूँ..मैं church बी जाता हूँ..मैं पीर पे या दरगाह पे भी चला जाता हूँ और गुरूद्वारे भी ..क्युकी सब धरम लोगो को एक ही बात बताते है की भाईचारा..सच्च और आचे काम करो...बस नाम अलग अलग है...फिर भी जम कौम बन ही गयी है तो कौम क लिए बी जिम्मेवारी बनती है..तो भाई जान पहले तो एक बात साफ़ कर दू क हर धरम एक विश्वास है एक धारणा है जिसे हम मानते है...इसका किसी भी तरीके से ये मतलब नहीं होना कहिये की किस धरम का गुरु जाट था या राजपूत या ब्रहमिन होना कहिये तभी उसे माना जायेगा ...धरम या धरना किसी गुरु की जात को देख कर नहीं बनती बल्कि उनके द्वारा किये हुए दुनिया क भलई क कामो के लिए बनती है..मेरी कोशिश सिर्फ मिलाने की है न की तोड़ने की ..अगर आप बी इसमें सहायता करे तो बहुत ख़ुशी होगी...उम्मीद है की मेरी ये थोड़े से शब्दों मैं कही गयी बात आपको समझ आ गयी होगी..






पढ़े-लिखे होकर ये फिजूल की बातें क्यों करते हो??? मेरी पोस्ट तो दिख गई, लेकिन राका की वो पोस्ट नहीं दिखी, जिसके जवाब में मुझे इतिहास में जाना पड़ा... राका ने कहा था "उपेंद्र का rss वालों ने कबूतर बना रखा हैं , जो बिल्ली न आती देख आँख मींच लिया करे न्यू ए यो कोणी देखना चाहवे के हक़ीक़त के स ...." अब हकीकत देखने के लिए मैं इतिहास में चला गया तो क्या गलत किया?
भाई, मुझे हिंदू होने का कोई दुःख नहीं है...हां, इस बात का बहुत दुःख है कि हमारे कुछ भाई दूसरे धर्मों से जुड़ गए...उन्हें दिग्भ्रमित किया जा रहा है...उन्हें अपने ही भाईयों से अलग होने के लिए उकसाया जा रहा है...पाकिस्तानी जाट तो एक तरह से अलग हो ही गए हैं, सिख धर्म के नाम पर पंजाब के जाटों को भी बराबर अलगाव के लिए भड़काया जा रहा है...
मुझे कोई बस ये बताए कि जब सिख धर्म के 10 के 10 गुरुओं में से कोई भी जाट नहीं है तो फिर जाटों के सिख होने का मतलब क्या है? अगर ये बात सबको पता चल जाए तो हमारे सिख जाट भाईयों का जीना मुश्किल हो जाएगा...ये निर्दयी दुनिया उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करेगी...अभी अधिकतर दुनिया को ये बात पता नहीं है कि कोई भी सिख गुरु जाट नहीं था...जिन्हें पता है, वे जाटों का मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते...मैंने ये बात खुद नोट की है...मैंने खुद इस बाबत गैर-जाट सिखों को जाटों की मजाक उड़ाते देखा है...एक मौके पर कुछ गैर-जाट सिख यह कहकर जाटों की बेइज्जती कर रहे थे कि अधिकतर सिख गुरु गैर-जाट थे...तब मैंने समझा था कि हो सकता है कोई एकाध गुरु तो जाट होगा, लेकिन बाद में पता चला कि कोई भी नहीं है...कोई मुझे बताए कि यदि हमारा कोई पढने-लिखने वाला या कोई काम-धंधा करने वाला, खुद पर गर्व करने वाला सिख जाट भाई गैर-जाट सिखों में बैठा हो और उसे यह कहा जाए कि "ओए जट्ट, तू है की?...जिन गुरुआं मोड़े तू शीश झुकान्ना ए उन्ना विच कोई वी जट्ट नि ए, सब दे सब खत्री पंजाबी ने..." तो उस जाट भाई के पास क्या जवाब होगा? और भाई, इस थ्रेड में इस विषय को छेड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन राका ने ऐसा करने के लिए उकसाया...तुम हिंदू और सिख जाटों को एक करना चाहते हो, तो तुम्हारी कोशिश का स्वागत है...
 
( और भाई, इस थ्रेड में इस विषय को छेड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन राका ने ऐसा करने के लिए उकसाया..)

अब ये बताये की आप उम्मर और तजुर्बे मैं
humse बड़े है पर आप किसी की बात से गुसा हो गए...आप बच्चे तो हैं नहीं की आपको किसी ne uksaya और आपने इस tarah से उकास भी गए ...भाई जी हर इंसान अपनी बात कहता है..उनके कहने का तरीका अगर आपको पसंद नहीं है तो आप उनसे बात कर सकते है की आपको ऐसी बात पसंद नहीं है या ऐसी बात न की जाये ..... न की आप किसी की भाईचारे को बढाने वाली कोशिश की ऐसी तैसी कर देने पे उत्तारु हो जाये ...उम्मीद karta हूँ की aage से आप शांति से काम लेंगे गुस्से से नहीं....और भाईचारे को बढाने मैं मदद करेंगे...
 
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