raghbirdeol
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अरे उपेंदर भाई...मुझे ये समझ नहीं आ रहा क आपने हिन्दू होने का दुःख है..या सिख जाट या मुस्लमान जाट बी है इस बात का....जैचंद ने ये कर दिया..मुसलमानों ने ये किया..फिर सिख बन गए...इन्द्रा जी जैसी सच्ची इंसान ko सीखो ने मार दिया..फिर सिख मार दिए..फिर हिन्दू मर दिए गए....भाई जान शिकायत तो एक बच्चे की तेरह कर रहे हो..पर जब पूरी बातो का पता ही नहीं है तो क्यों लिख रहे हो...हमइ यहाँ हिन्दू और सिख जाटो का भाईचारा बढाने की कोशिश कर रहे है और आप पेट्रोल ले क आग लगाने मी लगे हो...अरे भलेमानस इंसान ...अब सुनो इन्द्रा जी की...शायद आपको ये नहीं पता की खालीस्थान बनाने की साजिश किसकी थी..भिंडरावाले को पैसा बंदूके और बाकि मदद कहा से आती थी...जब उसकी ताकत जयादा बड गे और इन्द्रा क लिए खतरा बन गया तो ऑपरेशन bluestar करव दिया...जिन बातो का पूरा ज्ञान न हो उनपे ज्यादा चर्चा नहीं करते..पहले खुद study कर लेनी कहिये... मुझे लगता है हिस्टरी आपका पसंदीदा विषय रहा हैजो हर बार आप पीछे चले जाते हो...परन्तु ये भी लगता है क हिस्ट्री अच्छी तेरह से पढ़ी भी नहीं जिससे आज आप आधी अधूरी बाते लिख रहे हो....और एक बात की आपसे गुज़ारिश है क अगर कोई अच्छे काम में मदद न की जा सके तो उसमे टांग भी नहीं आडानी चाहिए ...आप तो किसी RSS या किसी फालतू संगठन के सदस्य की तेरह बात कर रहे है..जो लकीर क फ़कीर होते है..जो एक चीज़ बता दी उसी को आखे बंद करके बोलते रहते हैं.....जागो उपेंदर जी जागो..भाईचारे को बढाने में मदद करो..!
और अगर नहीं कर सकते तो भाई जी ये फालतू का रोना धोना बंद कर दो....!!
~~~~~जागो जाटो जागो~~~~~~
सनेह्पुर्व्क
देओल..
और अगर नहीं कर सकते तो भाई जी ये फालतू का रोना धोना बंद कर दो....!!
~~~~~जागो जाटो जागो~~~~~~
सनेह्पुर्व्क
देओल..
हकीकत आप बता दो जनाब, लेकिन किसी ठोस प्रमाण के साथ बताना...
मेरी ये समझ में नहीं आता लोग हिंदुओं के इतने दुश्मन क्यों हो जाते हैं...लगभग 1000 साल पहले भारत में सब हिंदू ही थे...इसके बाद जयचंद ने गद्दारी की तो यहां मुसलमान पैठ बना गए...इसके बाद यहां हिंदुओं को मिटाने की खूब कोशिश हुई...क्यों??? क्या कसूर था हिंदुओं का? क्या यह कसूर था कि उन्होंने कड़ी मेहनत से बेशुमार धन जोड़ा था और भारत को दुनिया का सबसे अमीर देश बनाया था? क्या यह कसूर था की सदियों पुरानी अपनी संस्कृति को संभाला था? एक जयचंद ने गद्दारी की तो देश के लिए बलिदान भी तो अनेकों हिंदुओं ने दिया...इसके बाद अंग्रेज आ गए...मुसलमानों का पतन हो गया, लेकिन अंग्रेज हावी हो गए...इस बीच लगभग 300 साल पहले गुरु गोबिंद सिंह के नेतृत्व में सिखों का उदय हुआ...1947 में किसी तरह देश आजाद हुआ...देश का बटवारा हुआ...भारी खून-खराबा हुआ...जैसे ही कोई नया धर्म वजूद में आता है तो उसे मानने वाले खुद की अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं...मुसलमान, जिनमें से अधिकतर कभी हिंदू ही थे, वे हमारे दुश्मन बन गए और हमें मिटाने में लग गए...वे तो बंगाली मुसलमानों को भी कुचलने में लग गए, जिसके चलते 1971 में उन्हें सबक सिखाया गया...जो सिख धर्म कभी भारत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हुआ था, उसमें से एक धड़ा खालिस्तान की मांग करने लगा...पंजाब में हिंदुओं पर जुल्म ढहाने लगा...क्यों??? क्या कसूर था हिंदुओं का??? ...इसके बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ, इतनी अच्छी नेता इंदिरा गांधी को मार दिया गया...फिर सिखों का कत्ले-आम हुआ...इसमें कोई मुझे बताए कि हिंदुओं की कहां गलती है? पहले हिंदुओं को सताया गया...तब हिंदुओं को सख्ती दिखानी पड़ी...
बिना धर्म के कोई नहीं जी सकता...यही कारण है कि इस दुनिया में अधिकतर लोगों का कोई न कोई धर्म है. आखिर कोई तो वजह होगी जो अमेरिका और यूरोप के 'बेहद बुद्धिमान' एवं तथाकथित अत्याधुनिक विचारों के लोगों ने भी किसी न किसी धर्म को अपनाया हुआ है...जो ये समझता हो कि ये धर्म वगैरह सब फिजूल की बातें हैं तो फिर वो बिना धर्म के जीकर दिखाए, तब मानेंगे...इसके लिए ऐसा नाम रखना होगा, ऐसी वेशभूषा, ऐसा रहन-सहन अपनाना होगा, जो किसी भी धर्म से ताल्लुक न रखता हो...खुद के, बच्चों के शादी-ब्याह के समय, कोई नौकरी हासिल करते समय, कहीं दाखिला लेते समय भी ये कहना होगा कि मेरा कोई धर्म नहीं है...पता चल जाएगा कि बिना धर्म के जीना क्या होता है...कोई भले ही कितनी ही डींगें हांकता रहे कि वो तो धर्म में यकीन ही नहीं करता, इसके बावजूद वो किसी न किसी रूप में धर्म से जुड़ा होता है...जब हम किसी को अपना नाम बताते हैं तो बस वहीं हम धर्म का फायदा उठा लेते हैं...ऐसे तथाकथित 'नास्तिक' व्यापार में, ऑफिस में, नौकरी में कुछ ऐसा नाम बताकर दिखाएं, जिसका किसी धर्म से ताल्लुक न हो...तब चलेगा असली पता कि धर्म का क्या फायदा मिल रहा होता है उन्हें...बिना धर्म के इंसान पशु समान है...अगर हमें किसी धर्म का लाभ मिल रहा है तो ये हमारा फर्ज बनता है कि हम उस धर्म का अहसान मानें और उसकी भलाई सोचें...ये ठीक वैसे ही है, जैसे कि कोई पेड़ हमें छाया का सुख दे रहा है तो हमारा फर्ज बनता है कि उस पेड़ की जड़ें न काटें, बल्कि उसका कुछ भला सोचें...जाट सदियों से हिंदू धर्म की छात्र-छाया में जी रहे हैं, बल्कि यूं कहना चाहिए कि जाट हिंदू धर्म का एक बेहद अहम हिस्सा हैं...ऐसे में हिंदू धर्म की रक्षा करना सभी जाटों का फर्ज बनता है और अधिकतर जाट ऐसा कर भी रहे हैं. जाट हिंदू धर्म की बहुत शान बढ़ा रहे हैं और आशा की जानी चाहिए कि आगे भी बढ़ाते रहेंगे. यह कहना कोई अतिशयोक्ति न होगा कि यह हिंदू धर्म की, भारत देश की महानता ही है कि जाट जैसी महान जाति उसके पास है...
अब जनाब आप बताओ अपनी...इस हिंदू धर्म ने आपके साथ या आपके हिसाब से अन्य जाटों के साथ ऐसा क्या बुरा कर दिया, जो आपको हिंदू धर्म छोड़कर सिख धर्म अपनाना पड़ा...? मजे की बात यह है कि आप सिख भी पूरी तरह से नहीं बने...न आप दिखने में, न बोल-चाल में कहीं से सिख लगते हो...न ही आपका नाम सिखों वाला है...मुझे तो ऐसा लगता है कि यदि कोई सिख आपसे कहेगा कि देखा सिख धर्म कितना महान है, तुम्हें सिख बनने पर विवश कर दिया तो आप उसे कहोगे कि आप तो सिख बने ही नहीं हो और यदि कोई आपको हिंदू कहेगा तो आप कहोगे कि नहीं आप तो सिख हो...ये आपका बढ़िया तरीका है...:suspicion: