amit_sheoran
Member
तख्ती - मुलतानी मिट्टी से तख्ती को पोतना
bhayio s k yaad thamne..takhti
shayi ki dwaat..
kalam..
salet..
bhayio s k yaad thamne..takhti
shayi ki dwaat..
kalam..
salet..
bhayio s k yaad thamne..takhti
shayi ki dwaat..
kalam..
salet..
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सलेट पै लिक्खण ताहीं एक लाम्बा सा 'चाक' हुया करता (धौले रंग का - पिलसण जिसा।) उसनै 'सलेटी पिलशण' या सिर्फ 'सलेटी' कहया करते। कई बाळकां नै तै सलेटी घणी स्वाद लाग्या करती - उसनै सारै दिन चाबते रहया करते, ज्यूकर छोटे बाळक माटी खाया करैं ।
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Hmm DND ji haam to us ne BITTI kahya karte ... bhaut khaiii wo bhi ek nyara hi swaad thaa ...
सही कही देसवाल साहब, उं त खाण की चीज़ ना थी पर स्वाद लाग्या करती | अर तफरी में तख्ती पोतना भी एक कला हुया करती | जय किसे बालक त लड़ाई हो ज्या त वा तख्ती हथियार का काम भी करया करती | मास्टर जी जै डंडा लयाना भूल ज्यांते त तख्ती बालकां के पीटन ताहीं काम में ल्याया करते | कलम भी दो तरियां की हुया करती | सरुये/पोरुवे की अर नेजे की | नेजे आली कलम भी हथियार का काम कर दिया करती |
माट्टी खाणा खटकड़ |
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सलेट पै लिक्खण ताहीं एक लाम्बा सा 'चाक' हुया करता (धौले रंग का - पिलसण जिसा।) उसनै 'सलेटी पिलशण' या सिर्फ 'सलेटी' कहया करते। कई बाळकां नै तै सलेटी घणी स्वाद लाग्या करती - उसनै सारै दिन चाबते रहया करते, ज्यूकर छोटे बाळक माटी खाया करैं ।
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म्हारे गाम मा के रेल जाया करे,होड़े कोयले पा जाया करदे उनकी की भी पिस के सयाही बना लिया करदे,अर्र ऊं ते पुडिया बी आया करदी..कई बार लिखाण के घनी तावल के चक्कर में कलम दावत में एकदम फस जाती अर्र सारी स्याही घिंद जाया करती..भोत बालकांक रींट बड़ा आया करता लिखते हाणी ,बेचारे कोशिश ते करते समान की पर टपक इ जाया करदी कापी पे के तख्ती पे..हम स्कूल में ते आते ते रा में धोरा पड्या करता जिसमे ते एक बगल के खेत में पानी जाया करता..सारे बालक उसमे तख्ती धोया करदे...जिस तख्ती में गांठ ज्यादा होती वा ना लिया करते, क्यूँ वा लड़ते हाणी जल्दी पाट जाया करती..
बावलों आपण ते नुये परेशान होरे सां, वे धोरे , तख्ती अर्र स्याही ना आवें वापिस इब..
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सलेट पै लिक्खण ताहीं एक लाम्बा सा 'चाक' हुया करता (धौले रंग का - पिलसण जिसा।) उसनै 'सलेटी पिलशण' या सिर्फ 'सलेटी' कहया करते। कई बाळकां नै तै सलेटी घणी स्वाद लाग्या करती - उसनै सारै दिन चाबते रहया करते, ज्यूकर छोटे बाळक माटी खाया करैं ।
Deswal ji, Bhiwani side me us chalk ko 'BURTA' kahya karate. Takhti potane ke liye multani; baad mein sarkande se bani kalam roshnai ki kali shyahi ka pryog kaun bhoola sakata hai.
सही कही देसवाल साहब, उं त खाण की चीज़ ना थी पर स्वाद लाग्या करती | अर तफरी में तख्ती पोतना भी एक कला हुया करती | जय किसे बालक त लड़ाई हो ज्या त वा तख्ती हथियार का काम भी करया करती | मास्टर जी जै डंडा लयाना भूल ज्यांते त तख्ती बालकां के पीटन ताहीं काम में ल्याया करते | कलम भी दो तरियां की हुया करती | सरुये/पोरुवे की अर नेजे की | नेजे आली कलम भी हथियार का काम कर दिया करती |
म्हारे गाम मा के रेल जाया करे,होड़े कोयले पा जाया करदे उनकी की भी पिस के सयाही बना लिया करदे,अर्र ऊं ते पुडिया बी आया करदी..कई बार लिखाण के घनी तावल के चक्कर में कलम दावत में एकदम फस जाती अर्र सारी स्याही घिंद जाया करती..भोत बालकांक रींट बड़ा आया करता लिखते हाणी ,बेचारे कोशिश ते करते समान की पर टपक इ जाया करदी कापी पे के तख्ती पे..हम स्कूल में ते आते ते रा में धोरा पड्या करता जिसमे ते एक बगल के खेत में पानी जाया करता..सारे बालक उसमे तख्ती धोया करदे...जिस तख्ती में गांठ ज्यादा होती वा ना लिया करते, क्यूँ वा लड़ते हाणी जल्दी पाट जाया करती..
बावलों आपण ते नुये परेशान होरे सां, वे धोरे , तख्ती अर्र स्याही ना आवें वापिस इब..
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