आज की काण दी स, "भारती मालिक सिन्धु"
correction.. मलिक--malik..
[/color][/b][/color][/color][/b][/color][/b][/color][/color][/b]यु "मलिक" आउट ऑफ़ कंट्रोल होर्या स ,कदे मालिक हो जा स ,कदे घणा बड्डा हो जा स ,कदे घणा छोट्टा हो जा स ,कदे काला घणा | इह मलिक के गोला-लाठ्ठी देणी पड़ेगी |
ल्भ्क-लितरा
आज की काण दी स , "दयानंद देशवाल जी " के :-
http://www.jatland.com/forums/member.php?6008-dndeswal
[COLOR=#000000][B][B][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][B][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000]ल्भ्क-लितरा
[I][I][I][FONT=verdana][COLOR=#000000][COLOR=#333333][COLOR=#000000][COLOR=#000000][FONT=arial][FONT=tahoma]पर एक मेरे बात समझ में ना आई ,अक ये रिवाड़ी ,भयाणी ,हिस्सार आले पहलम ते सोनीपत रोहतक में बियाह करवा लेवें अर फेर इन् ने उत बतावें ,कईयाँ ने ते इतना डर लागे स [/I][/I][/I][/FONT][/FONT][/FONT]अक आजकाल आपणा जिला -ए सोनीपत बताणा शुरू कर दिया | [COLOR=#000000][COLOR=#000000]
[COLOR=#000000][FONT=arial][B][B][B][URL]http://www.jatland.com/forums/member.php?34252-drkarminder[/URL][/FONT]
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रविंदरजीत, ग़ालिब जिन्दा होता तो शायद कुछ यों तुकबंदी किये बगैर नहीं रहता :
ये डर नहीं मोहब्बत है ग़ालिब, जो खींच लाती है हमें बारहा,
गर ना होती फिजाओं में रंगीनी क्यों आते हम यहाँ
यहाँ की तो हर दरो दीवार से होता है ससुराल का एहसास
ना बनाते हम यहाँ आशियाना, गर ना होता हमें वफ़ा का पास
गर ना होती नज़रे-इनायत बागबाँ-ऐ-चमन-ऐ-सोनीपत ओ बहारों की [COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][B]
[COLOR=#000000][FONT=arial]ना खिलते ग़ुलाब रेगज़ार-ऐ-भिवानी में ना संवरती ज़िन्दगी कुंवारों की [/FONT]
[FONT=arial]लगती है यहाँ की हर चीज़ अपनी सी, सोने के जेवर सी,[/FONT]
[FONT=arial]गाली भी लगती है यहाँ की चुटकी साली की और मीठी घेवर सी i [/FONT]
[FONT=arial]इतने भी हम बेवफा नहीं के दिल लगा कर चल दे मुहं मोड़ कर,[/FONT]
[FONT=arial]राशन कार्ड भी बन गया अब कौन जाये ग़ालिब, सोनीपत की गलियाँ छोड़कर i [/FONT]
[COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][B][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][COLOR=#000000][B][COLOR=#000000][COLOR=#000000]
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ल्भ्क-लितरा
आज काण दी स "दीपक मलिक " के :-
[color=#000000][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][b][b]एक लेण की बात पे ,आप ने मेरे काण चढ़ा दी |वाह बहुत खूब वि.पि.जी |[/b][/b][/b][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/b][/b][/b][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/b][/b][/color][/color][/color][/color][/b][/b][/color][/color][/color][/color][/b][/color][/color][/color][/color][/b][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/b][/b][/b][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/b][/b][/color][/color][/color][/color][/b][/color][/color][/color][/color][/b][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/b][/b][/b][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/color][/color][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][b][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][color=#000000][color=#000000]
रविंदरजीत, ग़ालिब जिन्दा होता तो शायद कुछ यों तुकबंदी किये बगैर नहीं रहता :
ये डर नहीं मोहब्बत है ग़ालिब, जो खींच लाती है हमें बारहा,
गर ना होती फिजाओं में रंगीनी क्यों आते हम यहाँ
यहाँ की तो हर दरो दीवार से होता है ससुराल का एहसास
ना बनाते हम यहाँ आशियाना, गर ना होता हमें वफ़ा का पास
गर ना होती नज़रे-इनायत बागबाँ-ऐ-चमन-ऐ-सोनीपत ओ बहारों की [color=#000000][color=#000000][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][b]
[color=#000000][font=arial]ना खिलते ग़ुलाब रेगज़ार-ऐ-भिवानी में ना संवरती ज़िन्दगी कुंवारों की [/font]
[font=arial]लगती है यहाँ की हर चीज़ अपनी सी, सोने के जेवर सी,[/font]
[font=arial]गाली भी लगती है यहाँ की चुटकी साली की और मीठी घेवर सी i [/font]
[font=arial]इतने भी हम बेवफा नहीं के दिल लगा कर चल दे मुहं मोड़ कर,[/font]
[font=arial]राशन कार्ड भी बन गया अब कौन जाये ग़ालिब, सोनीपत की गलियाँ छोड़कर i [/font]
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सोनीपत आले तै नूए धूमे ठाया करै .......
[color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][b][b][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][color=#000000][font=arial]एक लेण की बात पे ,आप ने मेरे काण चढ़ा दी |वाह बहुत खूब वि.पि.जी |[/font]
फेर आग किह पे बळवाया करो ?
हा हा हा परवीन बजार्ड जिस्सा | पहलवान हो तो दारा सिंह जिस्सा आर _ _ _ _ _ _ _ _ हो तो परवीन बजार्ड जिस्सा ? समझ तो थम गए ऐ होगे |ल्भ्क-लितरा
हा हा हा परवीन बजार्ड जिस्सा | पहलवान हो तो दारा सिंह जिस्सा आर _ _ _ _ _ _ _ _ हो तो परवीन बजार्ड जिस्सा ?
थम छोरे का JL पे आना बंद करवाओगे |
समझ तो थम गए ऐ होगे |भाई इस तागे में नु होना चाहिए अक काण जिब्बे उतरेगी जिब आगले में काण द्योगे |
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