Haryanvi Paheliyaan (Part 1)

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रूंख बोझड़े चोटि ताहीं डूब्बे,
चिड़िया त्शायी उडदी जावें ,
पणीहारी का बासण ना भर:
हाथी मॉल-मॉल न्हावे |


बताओ क्यूकर ?


 
इसा तो "डूब्बा" में हो सके से जब बदरो ठाडी ठुकी चाले ....


गलत जबाब ,कोए डुब्बा नहीं आ री | इशारा --तडके के बखत इस्सा होया करे |
 
र ये मेरे सर पे तीन डंडे रंग तें भरण ने होरे सें , कोए इन् ने बध्वाइओ लाम्बे |
 
ओस बन जाया करे

फेर तू भी कती घेरा दे-दे के ने उत्तर धोरे ल्याणा पड़े स ,मारणी खोला की ढाल | सही जबाब | तेरे ताहीं एक बुख्टा टाट इनाम में |त्ड्कें -ए तडक बड़ी सुवाद लाग्या करें जब खेत मांह तें ओश में भीजी होड़ टाट फोड़- फोड़ खावे |
 
घेर बीचाले बोत्डी खडी,
सौ जन्याँ ने ली चून्घ ,
फेर भी वा पौस्सी खडी ,
सही जबाब दो ढूँढ |
 
फेर तू भी कती घेरा दे-दे के ने उत्तर धोरे ल्याणा पड़े स ,मारणी खोला की ढाल | सही जबाब | तेरे ताहीं एक बुख्टा टाट इनाम में |त्ड्कें -ए तडक बड़ी सुवाद लाग्या करें जब खेत मांह तें ओश में भीजी होड़ टाट फोड़- फोड़ खावे |


हा हा हा... जे डूब्बा आली मान लेंते तो घेरा गेरन की जरूरत ऐ ना थी... :cool:
टाट के होल्ले भी सुवाद लाग्या करे.. मेरी दादी भून के खुवाया करती..
 
नकलची संदीप | तेरे ताहीं एक ढाली टाट की इनाम में |

नक़ल नहीं करी सर जी पेज अपडेट होने से पहले लिख दिया था अपडेट हुआ तो नक़ल हो गयी |
 
माटी का महल ,
लोहे की छात ,
छात पे छाबड़ी ,
बाहरने में आग |




बताओ के ?
 
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