Bheem Singh Bana Ji, aapke Aurangjeb ke example ko aur pukhta kar raha hu yahaan ek example de ke:
अंतरजातीय और अंतर्धर्म विवाह के कुतर्क:
अंतरजातीय - विवाहों की यह कह के कि "इनसे धर्म और जाति की सीमायें, विवेचनाएँ खत्म हो जाती हैं" वकालत करने वालों से मेरा एक सवाल कि उनके इस भ्रामक तथ्य में इतनी सच्चाई होती तो औरंगजेब को तो हिन्दुओं का कत्लेआम और उनका धर्म परिवर्तन करवाना बिलकुल भी नहीं करना चाहिए था? क्योंकि उसकी दादी एक हिन्दू ही तो थी? याद नहीं हो तो जोधाबाई को याद कीजिये, जो अकबर की रानी ...बनी और फिर औरंगजेब की दादी यानी औरंगजेब की रगों में 2 धर्मों का खून होने के बावजूद भी उसनें हिन्दुओं-सिखों का कत्लेआम से ले धर्म-परिवर्तन तक करवाया|
उदहारण: औरंगजेब ने बादशाह बनते ही सर्वखाप पंचायत को सुलह-समझोते के लिए दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा| सर्वखाप ने निमंत्रण स्वीकार कर जिन २१ (21) नेताओं को दिल्ली भेजा था उनमें ग्यारह जाट, तीन राजपूत, एक ब्रह्मण, एक वैश्य, एक सैनी, एक त्यागी, एक गुर्जर, एक खान और एक रोड थे. इन २१ (21) नेताओं के सामने औरंगजेब ने धोखा किया और इनके सामने इस्लाम या मौत में से एक चुनने का हुक्म दिया| दल के मुखिया राव हरिराय ने औरंग...जेब से जमकर बहस की तथा कहा कि शर्वखाप पंचायत शांति चाहती है वह टकराव नहीं| औरंगजेब ने जिद नहीं छोड़ी तो इन नेताओं ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया| परिणाम स्वरुप सन १६७० (1670) ई. की कार्तिक कृष्ण दशमी के दिन चांदनी चौक दिल्ली में इन २१ (21) नेताओं को एक साथ फंसी पर लटका दिया गया| जब यह खबर पंचायत के पास पहुंची तो चहुँओर मातम छा गया| इसके बाद धर्मान्तरण की आंधी चलने लगी| साथ ही सर्वखाप पंचायत का अस्तित्व खतरे में पड़ गया|
उन 21 धर्म पर कुर्बान होने वालों के नाम थे: उनके नाम थे- राव हरिराय, धूम सिंह, फूल सिंह, शीशराम, हरदेवा, राम लाल, बलि राम, माल चंद, हर पाल, नवल सिंह, गंगा राम, चंदू राम, हर सहाय, नेत राम, हर वंश, मन सुख, मूल चंद, हर देवा, राम नारायण, भोला और हरिद्वारी|
सो जो ये दावे ठोंकते हैं कि अंतरजातीय या अंतर्धर्म विवाहों से जाति-पाती और धार्मिंक उन्माद खत्म किया जा सकता है तो वो ख्यालों की दुनिया में जा के दावे ठोंकते हैं|