Pseudo secularism?


आप अब २ विचारो को मिला कर उनकी खिचड़ी बना रहे है. जितना खून आप का खोल रहा है उतना ही किसी भी भारतवासी का खोलेगा, इसका अर्थ ये नहीं की आप अपशब्दों को भडावा दे ? क्या आप उन चाँद मुसलमानों के कारन पुरे जित द्वारा पुरे धरम को दी गई गाली का समर्थन कर रहे है ?



aapka khoon khoula k nahi...!!!
ya aapne kuch (ku)tark de ke thanda kar liya ...!!!
 


पहले मैं aap के तर्क का तर्क से जवाब देता हु बाद मैं आप के कुतर्क का जवाब दूंगा
1) आम आदमी की आय पिछले चंद सालो मैं 10% से ऊपर पढ़ रही है
2) 2009 मैं per capita इंकम सबसे तेज़ी से बढ़ी और 7 सालो मैं दुगुनी हो गई




Or AAM aadmi k liye MEHANGAI kis speed ya pratishat se badhi hai,,us par bhi timla dal do ...!!!!
 
कोई लड़ता है यहाँ पाकिस्तान के लिए,
कोई लड़ता है उर्दू जुबान के लिए।
सब चुप हो जाते हैं श्री राम के लिए,
अब तो गूंजते हैं नारे तालिबान के लिए,
हिन्दू परेशान है नौकरी और दुकान के लिए।


मुस्लिमों का फतवा हिन्दू भेजो शमशान के लिए,
भारत माँ को डायन बोला गया झूठी शान के लिए,
झंडे में हरा रंग है केवल हिंदुत्व के अपमान के लिए।


मैं पूछता हूँ इसका समाधान कहाँ है ?
अरे तुम ही बोलो हिन्दू का हिन्दुस्थान कहाँ है?


source : Rajkumar Dasare (fb)
 
On paper, isn't it.
A good read, and before you tag Anil Padmanabhan or Mint as paid media do check the story he has done in the past:
http://www.livemint.com/Home-Page/LII3Dy7mZVrxJox7pZrRxI/What-Manmohan-Singh-wants-he-gets.html

So much overlap between these two. Direct cash transfer is also meant for food(e.g Rice, Wheat). So why subsidy for Wheat, Rice etc as well. You brought in Direct Cash transfer scheme(Without discussing with anyone, without getting inputs from people who need this) because you think PDS system has huge leakages. At the same time, you also think that PDS is good system for procurement. WOW!!

Cash PDS is much different than grain one and both are existing parallel systems, though both has corruption, more easy to corrupt cash transfer. Aadhar and food bill entirely aiming at fixing to different but existing systems, why are you so hell bent to mix them and crossing them over with each other?


You think that only wheat and Rice can eradicate malnutrition. What about Milk, Eggs, etc. Cause of malnutrition is not just hunger, it also occurs because of vitamin deficiencies. Who will consider it?

We all know how government procurement works. Government does not have enough warehouses and cold storages to store food and how would you procure more at such an unprecedented rate.

By brininging this food security bill, government not only overlapping so much efforts but also responsible for Budget deficit, Food inflation which will eventually make life tough for everyone. Congress believes in only one ideology, "We are only right, rest are fools". And Might is right! Thats what it reflects in this government efforts. So many five year plans which cost nation a fortune, get implemented even without discussing with people. From these Five years plans and bills like Food security bill, people get what they don't want! If this is a good governance then only God can save this country.

This is your grunt against congress, not the bill so I will leave it there. Like I said, BJP has the same system already implemented in chattisgarh.
 
अंततः मुस्लिम अपनी औकात बताही देते हैं, आज समस्त मुसलमान यह प्रश्न उठा रहे हैं कि उनके सम्प्रदाय के अनुसार 'वन्दे मातरम' गाना गलत है इसलिए वो इसे नहीं गा सकते। अब इन निकृष्ट कोटि के मुसलमानों से जो कि पूरे मुस्लिम समाज का लगभग ९९% भाग बनता है, यह पूछना अनिवार्य हो गया है कि आखिर पाकिस्तान के निर्माण के समय इन्हें अच्छा विकल्प दिया गया था कि वो या तो अपनी मातृभूमि चुनें अथवा अपना सम्प्रदाय चुनें। तब इनके बाप दादाओं ने तो मातृभूमि को चुन लिया था जब इनके बापदादाओं ने पहले ही अपने मातृभूमि औ रसम्प्रदाय में से मातृभूमि को बड़ा मान लिया है तो ये होते कौन हैं जो ये कहे कि हम वन्दे मातरम नहीं गा सकते।
जिन्हें वन्दे मातरम नहीं गाना था उसका स्थान पाकिस्तान है, पवित्र भारत भूमि नहीं और जब भारत पाकिस्तानके विभाजन के समय संविधान सभा में यह बात उठी थी कि जब पाकिस्तान मुस्लिमों का है तो भारत हिन्दुओं का क्यों नहीं? तब इन्हीं भारतीय मुसलमानों के बाप दादा चिल्ला चिल्ला कर तर्क दे रहे थे कि हम लोगों का सम्प्रदाय मुसलमान भले ही हो पर हम आज भी अपने आप को राम कृष्ण की संतान मानते हैं और आज स्वतंत्रता के ६४-६५ वर्षों के पश्चात चिल्लाने लगे कि इन्हें बाबर प्रिय है राम नहीं, औरंगजेब प्रिय है गुरु गोबिंद नहीं।



तो गलती किसकी हिन्दुओ की अथवा इन दोगले मुसलमानों की। इन्हें भारत में रहना है तो वन्देमातरम गाना ही होगा क्योंकि इनके बाप-दादाओं को इसी शर्त पर यह मातृभूमि मिली थी कि वो सम्प्रदाय और मातृभूमि में से मातृभूमि को बड़ा मानते हैं। ज़बरदस्ती इनसे विवाद करने एवं यह समझाने की आवश्यकता नहीं है, इसमें मातृभूमि को केवल बड़ा बताया गया, पूजा जैसा कुछ नहीं और नहीं मानते तो सरकार को इनके बाप-दादों के द्वारा दिया गया वचन याद स्मरण करा कर इन्हें ऐसा दण्ड दिया जाय कि इनकी सात पीढियां स्मरण रखें।

ये देश इनको अधिकार में नहीं मिला है अपितु भिक्षा में मिला है इन्हें यह स्मरण रखना ही चाहिए जिन्हें न विश्वास हो संविधान सभा के बैठकों से निष्कर्ष निकाल ले और यदि ये कहते हैं कि इनको इस देश में बराबरी का अधिकार है इन्हें पाकिस्तान की तरफ देख लेना चाहिए जो कि इनके इसी अधिकार के तहत दिया गया है।
 

शफीकुरहमान वर्क ! क्या तुम्हारे इस्लाम में ये जायज है?
देखो एक मुसलमान दुसरे मुसलमान को कैसे नोच- नोच कर खा रहा है?




http://www.youtube.com/watch?v=oXkXcWkehc0
 
Rajpalji,

There is a similarity to be seen between this barbaric act and the countless acts of beheading and mutilating Indian soldiers by the Pakistanis.

Hope Jaichands' eyes open up before they strengthen the hands of the communal forces who are bent upon having the same JUNGLE RAJ here in India!


शफीकुरहमान वर्क ! क्या तुम्हारे इस्लाम में ये जायज है?
देखो एक मुसलमान दुसरे मुसलमान को कैसे नोच- नोच कर खा रहा है?




http://www.youtube.com/watch?v=oXkXcWkehc0
 
Excellent post!

Only hope these Jaichands stop strengthening the hands of the communal Congress which is hell bent on turning our country into Islamic caliphate with Shariah laws.

कोई लड़ता है यहाँ पाकिस्तान के लिए,
कोई लड़ता है उर्दू जुबान के लिए।
सब चुप हो जाते हैं श्री राम के लिए,
अब तो गूंजते हैं नारे तालिबान के लिए,
हिन्दू परेशान है नौकरी और दुकान के लिए।


मुस्लिमों का फतवा हिन्दू भेजो शमशान के लिए,
भारत माँ को डायन बोला गया झूठी शान के लिए,
झंडे में हरा रंग है केवल हिंदुत्व के अपमान के लिए।


मैं पूछता हूँ इसका समाधान कहाँ है ?
अरे तुम ही बोलो हिन्दू का हिन्दुस्थान कहाँ है?


source : Rajkumar Dasare (fb)
 
The Union Home Minister advocates fast track courts for jailed Muslim youths. What about Hindu youth????


Is this Congress govt. only for Muslims? What about Hindus and others? Are they any less human or less Indian??

Reservation for muslims, jobs for muslims, scholarships for muslims, fast track courts for muslims. WHY NOT FOR ALL INDIANS and not just one particular community???????????

Yet we say BJP is communal???
 
राजपाल जी इस वंदे मातरम गीत के इतिहास पर कुछ प्रकाश डालेंगे , किसने कब और क्यो लिखा !!!

[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]वन्दे मातरम की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने १८८४ में अपने अमर उपन्यास 'आनंद मठ' में की थी। तभी से यह देशभक्ति पूर्ण गीत स्वतन्त्रता सेनानियों का प्रेरणा स्त्रोत रहा है। १८८६ में कोलकाता में हुए कांग्रेस अधिवेशन का शुभारम्भ इसी गीत से हुआ था। विश्व कवि रविन्द्र नाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध करके अपने स्वर में गाया था। बंग - भंग आन्दोलन में ये गीत बच्चे-बच्चे की जीभ पर था।
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]
[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]जब मुसलमानों ने वन्दे मातरम का विरोध किया तो १९३७ में कांग्रेस ने एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जिसमें सुभाषचंद्र बोस,रविन्द्रनाथ टैगोर एवं जवाहरलाल नेहरु सम्मिलित थे। इस कमेटी ने भविष्य में वन्दे मातरम के दो 'पदों' को राष्ट्र गीत के रूप में गाने की सिफारिश की थी। कांग्रेस कार्यकारिणी समिति ने इस राष्ट्र गीत के जिस अंश को राष्ट्र गीत के रूप में मान्यता दी थी उसमें निम्नलिखित अंश थे:-[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif] [/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]'वन्देमातरम, सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम शस्य श्यामलां मातरम्।[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम फुल्ल कुसुसित द्रुमदलशोनिभिनीम,[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]सुहार्सिनीम सुमधुर भाषिणीम सुखदां वरदां मातरम्।।'[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]
[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]वन्देमातरम के उपरोक्त अंश में कौन सा शब्द ऐसा है जो किसी भी धर्म के विरुद्ध है अथवा जिसमें किसी की वन्दना की गयी है। क्या मातृभूमि की विशिष्टताओं का वर्णन करना दोषपूर्ण है? एक दर्जन से अधिक मुस्लिम देशों के राष्ट्र गीतों में उन देशों की इसी प्रकार प्रशंसा की गयी है। उन पर तो आज तक किसी भी मुस्लिम विद्वान ने कभी आपत्ति नहीं की। [/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif] [/FONT]
[/FONT]
 
वन्दे-मातरम गीत गाने के जो विरुद्ध हैं।
पैदा होने वाली ऐसी नस्ले अशुद्ध हैं।
आबरू वतन की जो आंकते हैं ख़ाक की।
कैसे मान लें के वो हैं पीढ़ी अशफाक की।
गीता ओ कुरान से न उनको है वास्ता।
सत्ता के शिखर का वो गढ़ते हैं रास्ता।
हिन्दू धर्म के ना अनुयायी इस्लाम के।
बन सके हितैषी वो रहीम के ना राम के।
गैरत हुज़ूर कही जाके सो गई है क्या।
सत्ता, माँ की वंदना से बड़ी हो गई है क्या।
देश तज, मजहबो के जो वशीभूत हैं।
अपराधी हैं वो लोग ओछे हैं कपूत हैं।
माथे पे लगा के माँ के चरणों की ख़ाक जी।
चढ़ गए हैं फांसियों पे लाखो अशफाक जी।
वन्दे-मातरम कुर्बानियो का ज्वार है।
वन्दे-मातरम जो ना गाये वो गद्दार है।

 
सेकुलर कौन?

1. जो यह घोषणा करे कि भारत के संसाधनों पर प्रथम अधिकार मुस्लिमों का है।

2. जो केवल मुस्लिम लड़कियों को दसवीं उत्तीर्ण करने पर 30,000रुपए दे।

3. जो 25 लाख छात्रवृत्ति केवल मुस्लिम विद्यार्थियों को दे।

4. मुस्लिम लडकियों के 50% अंकों पर उनको स्कूटी दे।

5. जो हिन्दू विद्यार्थियों को 15-18 प्रतिशत पर शिक्षा के लिए ऋण दिलाये और मुस्लिमों को 2 से 4प्रतिशत पर।

6. जो गोधरा स्टेशन पर 59 हिन्दू तीर्थयात्रियों की निर्मम हत्या को भूल जाए।

7. जो केवल मदरसे, मख्तबों, मस्जिदों के मुल्ला-मौलवियों * को वेतन दे।

8. जो मुस्लिमों को आरक्षण दे।


9. जो केवल हज पर सब्सिडी दे।

10. जो मुस्लिम आतंकी के मरने पर उसके परिवार को 6 लाख की क्षतिपूर्ती दे।

11.जो एक मुस्लिम 'dsp' के मरने पर उसको 50 लाख और उसके घर के 6 सदस्यों को सरकारी नौकरी दे एवं हिन्दू सैनिक के शीश काटने पर केवल 5 लाख तथा कोई सरकारी नौकरी नहीं।

12. जो बांग्लादेशी व पाकिस्तानी मुस्लिम घुसपैठियों, जिहादियों को तो राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड व नागरिकता तक दे परन्तु पाकिस्तान में कट्टरवादियों के भय से भारत आए हिन्दुओं को पाकिस्तान पुनः भेजने पर अड़ा रहे।
 
कल २३ जून २०१३ को ndtv पर बरखा दत्त ने नितीश कुमार से साक्षात्कार में पूछा कि बाबरी ध्वंस के आरोपी लालकृष्ण आडवाणी को आप सेक्युलर कैसे कह सकते हैं ? इस पर उन्होंने जो उत्तर दिया उसे सब लोग ध्यान से पढ़ें, सुनें, अपनी प्रतिक्रिया दें और इसे शेयर कर- कर के पूरे हिन्दुस्थान में फैला दें. नितीश ने कहा कि - " यह सही है कि आडवाणी जी ने राम जन्म भूमि आन्दोलन में भाग लिया लेकिन बाद में वो पाकिस्तान गए और जिन्ना को महान बताया. इसलिए आप कह सकते हैं कि वो सेक्युलर हो गए." यह है नितीश का सेकुलरवाद. यदि किसी ने पुण्यभूमि अयोध्या में श्री रामजन्म भूमि पर मंदिर बनवाने की बात की तो वह साम्प्रदायिक यानि पापी हो गया और यदि उसको अपना शुद्धिकरण करना है तो उसे पाकिस्तान जाकर देश के हत्यारे जिन्ना की मजार पर मत्था रगड़ना पड़ेगा. हम तो अब तक यही सुनते आये हैं कि एक बार पूरे मन से राम नाम के स्मरण से ही जीव के अनंत कोटि पाप भस्म हो जाते हैं. और शमशान या कब्र की पूजा करने वाले लोग भूत-प्रेत बनते हैं. लेकिन बाबू नितीश कुमार ने तो पूरा सिद्धांत ही उलट कर रख दिया. उनके इस बयान से जिन्ना के समर्थक और होने वाले भूत-प्रेत तो खुश हो सकते हैं लेकिन बिहार की रामभक्त और राष्ट्रभक्त जनता अगले चुनाव में उनको उनके इस सिद्धांत का मुंहतोड़ उत्तर जरूर देगी.
 
इशरत जहां लष्कर ए तय्यबा की फिदायीन आतंकवादी थी - डेविड हेडली
इशरत जहां लष्कर ए तय्यबा की आतंकवादी थी - fbi (अमेरिकी संस्था)
इशरत जहां हमारी मुजाहिदीन थी जो इस्लाम के लिए शहीद हुई - लष्कर ए तय्यबा

इशरत जहां छोटे-मोटे ब्लास्ट करने आई थी ना की मोदी को मारने - इंडियन मिडिया
इशरत जहां मासूम और बेगुनाह थी - कांग्रेस
इशरत जहां मेरी बेटी जैसी थी - शरद पवार
 
यूपी में संभल लोकसभा सीट से बीएसपी सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा है कि वह मॉनसून सत्र में भी संसद में अनुपस्थित रहकर 'वंदे मातरम' का बहिष्कार करेगा।
आज तथाकथित सेक्युलर पार्टियाँ इस नीच देशद्रोही के बयान पर चुप क्यों हैं? कहाँ हैं वोट के भूखे मुल्लायम, मायावती, सोनिया गाँधी और ममता बैनर्जी ?
किसी भी कोने से कोई स्वर क्यो नहीं आ रहे हैं?
ना अरुन्धती राय की, ना शबाना आज़मी की, ना कम्यूनिस्ट्स की और ना कोई इस देश को चाहने का ढोंग करने वालों की?
ना बिकाऊ भांड मीडिया की?
क्या सब के सब मरे और बिके हुए हैं?
जागो दोस्तों मित्रों नही तो पता नही आगे और क्या क्या सुनना पड़ेगा और देखना पड़ेगा ?
किन्तु तब तक संभवतः बहुत विलम्ब हो चुका होगी।
 
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http://aajtak.intoday.in/story/will-boycott-vande-matarm-in-parliament-barq-1-738173.html
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मॉनसून सत्र में भी 'वंदेमातरम' का बहिष्कार करेंगे शफीकुर्रहमान बर्क: ख़बरें: आज तक
aajtak.intoday.inउत्तर प्रदेश में संभल लोकसभा सीट से बीएसपी सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा है कि वह मॉनसून सत्र में भी संसद में अनुपस्थित रहकर वंदेमातरम का बहिष्कार करेंगे.




 
अभी कुछ दिनों पहले लोकसभा अध्यक्ष अजमेर दरगाह पर चादर चढ़ाने आई थी ..एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने आरटीआई से पूछा --
१- क्या ये मीरा कुमार की निजी यात्रा थी या सरकारी ? यदि सरकारी तो मकसद क्या था ?
२-यदि सरकारी थी तो कुल कितना खर्च आया ?
३-उस खर्च का ब्रेकअप क्या है ?
जबाब
१- ये यात्रा सरकारी थी ..वो पुरे लोकसभा की तरफ से ख्वाजा को चादर चढ़ाने गयी थी |
२-कुल ढाई लाख का खर्च आया
३- चादर -२०३५, यात्रा खर्च [स्टाफ सहित] १२३२२० , लोकसभा टीवी क्र्यू का खर्च -[चूँकि ये सरकारी यात्रा थी इसलिए नियमानुसार लोकसभा टीवी के स्टाफ अपने पुरे साजोसामान के साथ शूटिंग करने गये थे]-१२४७४५
 
नीतीश कुमार : कहां गया राजधर्म
बुद्ध के बोधिसत्व का बिहार
महावीर की प्रज्ञा का बिहार

नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों का बिहार
चाणक्य, चंद्रगुप्त, अशोक और वैशाली के गणतंत्र का बिहार।
कभी बिहार की संस्कृति और सभ्यता चरमोत्कर्ष पर थी।

सर्वधर्म समभाव, सर्वपंथ समभाव या धर्मनिरपेक्षता का बस इतना ही अर्थ था कि भारत में हर व्यक्ति की धर्म के प्रति आस्था थी। कहीं भी कोई द्वन्द्व या संघर्ष नहीं था, लेकिन राजनीतिज्ञों ने मनुष्यों को भी धर्मनिरपेक्ष बना दिया। राजनीति में यह फैशन एक संक्रामक रोग की तरह फैला।
 
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