पाकिस्तान के सात अक्षर !!!!!!

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पाकिस्तान के सात अक्षर !!!!!!

इकबाल के द्वारा भारत यानि हिंदुस्तान के लिए कहे गए शब्द "नापाक" का उल्टा या Opposit शब्द पाक होता है .इसी को लेकर पाकिस्तान शब्द बनाया गया. जिसका अर्थ पवित्र देश होता. वैसे यह दो शब्दों"पाक +स्तान"से बना हुआ लगता है .परन्तु उर्दू के इसके सात अक्षर हैं. जिनके हरेक अक्षर से पाकिस्तान के उन हिस्सों या प्रान्तों का पता चलता है, जो जिन्ना पाकिस्तान में शामिल करना चाहता था लेकिन कई हिस्से शामिल नहीं हो सके. यह सात अक्षर इस प्रकार हैं:-

1 .पे -پ -प -= ( पंजाब )
2 .आलिफ-ا - अ =असम ( पूर्वोत्तर प्रांत )
3 .काफ़ - ک - क =कश्मीर
4 .सीन - س -स =सिन्ध
5 .ते - ت-त =तराई (गंगा यमुना का सिंचित क्षेत्र )
6 .अलिफ - ا -अ = अवध ( पूरा यूपी )
7 .नून - ن -न = निजाम ( हैदराबाद ).

इस तरह इन उर्दू के सात अक्षरों से मिलकर"पाकिस्तान - پاکستان"शब्द बना है .जो उसके क्षेत्र को भी प्रदर्शित करता है .मगर
इन में से चार हिस्से असम , कश्मीर , अवध ,तराई और निजाम पकिस्तान को नहीं मिले .जिन्ना ने कराची में जब 14 अगस्त 1947 को पहली बार पाकिस्तान का झंडा फहराया ,तो कहा था कि इन हिन्दुओं ने हमारे साथ धोखा किया ,और आधा अधूरा ,टूटा फूटा पाकिस्तान दे दिया है यह सुन कर सुहरावर्दी ने जिन्ना से कहा था ,आप कुछ समय सब्र करिए ,देखना एक दिन यही हिन्दू पूरा हिंदुस्तान चांदी की तश्तरी पर रख कर आपको पेश कर देंगे .

पुराने लोगों को याद होगा उन दिनों मुसलमान यह नारा लगाते थे, "हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान."

इसी लिए पाकिस्तान किसी बहाने भारत से तब तक लड़ता रहेगा, जब तक या तो पाकिस्तान मिट जाये या भारत इस्लामी देश बन जाये. लोग कुछ भी करें या कहते रहें पाकिस्तान से दोस्ती कभी नहीं होगी.
 
http://www.jagran.com/editorial/apnibaat-shocking-memories-10646273.html

15 अगस्त, 1947 - दिल दहलाने वाली यादें

15 अगस्त, 1947 को एक तरफ भारत आजाद होने की खुशी में झूम रहा था तो दूसरी तरफ विभाजन की भयंकर मार-काट के कारण गम में भी डूबा हुआ था। भारत का 30 प्रतिशत भाग कटकर पाकिस्तान नाम से एक अलग देश बन गया। 'पाकिस्तान मेरी लाश पर बनेगा' की घोषणा करने वाले महात्मा गांधी असहाय से देखते रहे और जल्द से जल्द सत्ता सुख भोगने की लालसा में कांग्रेस के नेताओं ने देश का विभाजन स्वीकार कर लिया। 15 अगस्त, 1947 को दिल्ली दुल्हन की तरह सजी थी। स्वतंत्र होने पर दिल्ली में जश्न मनाया जाना स्वाभाविक था। 15 अगस्त को लाल किले पर तिरंगा फहराकर नेहरूजी ने प्रथम स्वाधीनता दिवस की घोषणा की। 14 अगस्त की रात 12 बजे संसद के सेंट्रल हाल में नेहरू के प्रसिद्ध भाषण के साथ अंग्रेज साम्राज्य का यूनियन जैक उतारकर भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा लहरा दिया गया, परंतु उसी 15 अगस्त, 1947 को लाहौर में और पूरे पश्चिम पंजाब व सीमा प्रांत में हिंदू-सिख इलाके धू-धू कर जल रहे थे। हजारों लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा था। जगह-जगह लूटपाट, अपहरण व हत्याएं हो रही थीं। रेलगाड़ियों में तिल रखने की जगह नहीं थी।

15 अगस्त को मैं लाहौर में था। मैंने लोमहर्षक कांड अपनी आंखों से देखे थे, जो 66 वर्ष बीत जाने पर आज भी मेरे दिलों-दिमाग को दहला देते हैं। पंजाब के स्वयंसेवकों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ओटीसी शिक्षक शिक्षण वर्ग कैंप फगवाड़ा में लगा था। यह शिविर 20 अगस्त को समाप्त होना था, परंतु पश्चिमी पंजाब व सीमा प्रांत में भीषण मार-काट, हत्या, लूट, अपहरण की घटनाओं और हिंदू-सिखों के पलायन के दिल दहलाने वाले समाचार आ रहे थे। इस कारण संघ अधिकारियों ने निर्णय किया कि शिविर को 10 अगस्त को ही समाप्त कर दिया जाए। हम लोग 10 अगस्त को ही पहली गाड़ी से लाहौर के लिए चल दिए। अटारी स्टेशन पार करते ही वातावरण बदला सा था। हिंसा का तांडव जोरों पर था।

मेरा परिवार लाहौर छोड़कर जा चुका था। मुझे यह भी पता न था कि मेरे परिवार के लोग कहां गए हैं। मोहल्ले में 10-12 घरों में कुछ लोग थे, शेष सब जा चुके थे। 10 अगस्त की रात को लाहौर में छत से जहां भी नजर जाती थी चारों ओर धू-धू जलते मकानों के हृदय विदारक दृश्य थे। अगले दिन बचे-खुचे लोगों ने मोहल्ला छोड़ दिया। हम वहां से निस्बत रोड स्थित संघ के कार्यालय में चले गए। 12-13 अगस्त को मैं निस्बत रोड पर चलाए जा रहे अस्थायी शिविर में था। रात को एक कार में एक महिला और उसके कुछ रिश्तेदार किसी व्यक्ति के शव को लेकर निस्बत रोड पर आए। उस महिला के पति की हत्या कर दी गई थी। इतनी भीषण मारकाट मची थी कि रावी के किनारे शमशान में शव रखने को जगह नहीं बची थी। महिला और उसके संबंधी चाहते थे कि उसके पति का संस्कार एक खाली प्लॉट पर कर दिया जाए, परंतु मोहल्ले के बचे लोग एकत्र हो गए और रिहायशी क्षेत्र में संस्कार को अशुभ मानकर संस्कार की अनुमति नहीं दी। फिर वह महिला अपने पति के शव को लेकर कहां गई, मालूम नहीं। मोहल्ले के लोगों को मालूम नहीं था कि अपने जिन मकानों को शव संस्कार के कारण अपवित्र होने की उन्होंने जो आशंका जाहिर की थी वह मोहल्ला, वह शहर हमेशा के लिए छूट जाएगा। डीएवी कॉलेज और उसके हॉस्टल में बड़ा शिविर लगा था। वहां से कुछ स्वयंसेवक डोगरा सैनिकों के साथ लाहौर की गलियों में जाकर फंसे हुए हिंदुओं को निकालने का काम करते थे। मुझे कुछ दिनों के लिए डीएवी कॉलेज में काम करने के लिए कहा गया।

प्रतिदिन की तरह हम 5-5 स्वयंसेवक दो जीपों में बैठकर सेना की सुरक्षा में विभिन्न क्षेत्रों में फंसे हिंदू, सिखों को बचाने के लिए निकले। मैं जिस ग्रुप में था वह गवालमंडी, मेवामंडी, किला गुजर सिंह आदि क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने गया और दूसरा दल गया था गुरुदत्ता भवन, शहालमी, वच्छोवाली इत्यादि क्षेत्रों में। हम लोग सारा दिन घूम कर कुछ लोगों को बचाकर कर शिविर में लाए। भरे-पूरे घरों को छोड़कर केवल एक छोटा संदूक साथ लेकर परिवारों को निकलने की अनुमति थी, परंतु दूसरी जीप और उसके साथ गए कार्यकर्ता नहीं लौटे। उनके साथ गई डोगरा सैनिकों की जीप वापस आ गई थी। उस जीप को पुन: लेकर स्वयंसेवकों को ढूंढने के लिए कुछ कार्यकर्ता गए, परंतु उनका भी कुछ पता नहीं चला। रात 12 बजे उनमें से एक स्वयंसेवक देवेंद्र बदहवास, छिपता-छिपाता डीएवी कॉलेज पहुंचा। उसने उस लोमहर्षक घटना का विवरण सुनाया। उनकी जीप में सवार सभी लोगों को पुलिस ने एक पंक्ति में खड़ा करके गोलियों से उड़ा दिया। देवेंद्र गोली लगने से पूर्व ही गिर गया था। पुलिस सबको मरा समझकर लाशों को वहीं छोड़कर चली गई। काफी देर बाद देवेंद्र उठकर बचता-बचता डीएवी कॉलेज पहुंचा। सारे पंजाब से लुटे-पिटे, घर-बार, हवेली, खेत-खलिहान छोड़ हजारों की संख्या में लोग प्रतिदिन डीएवी कॉलेज और उसके हॉस्टल में पहुंच रहे थे। हरेक की अपनी-अपनी रोंगटे खड़े कर देने वाली आप बीती थी। परिवार के परिवार मौत के घाट उतार दिए गए। असंख्य महिलाओं का अपहरण कर लिया गया था। अनेक महिलाओं ने कुओं में छलांग लगाकर या आग में जलकर अपने सम्मान की रक्षा की थी। 15 अगस्त था या 16 अगस्त। नेहरूजी डीएवी कॉलेज कैंप में सायंकाल आए थे। जवाहर लाल नेहरू ने इन घटनाओं पर दुख प्रकट करते हुए आश्वासन दिया था कि पाकिस्तान सरकार से बातचीत हो गई है, तुरंत शांति बहाल हो जाएगी। भारतीय सैनिक टुकड़ियां लाहौर व पाकिस्तान के अन्य शहरों, कस्बों में तैनात कर दी गई हैं। अब किसी को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनके वापस जाते ही उस रात भी लाहौर धू-धू कर जलता रहा।

मुझे अभी भी याद है कि एक डोगरा सैनिक मूर्तियां लेकर मेरे पास आया था कि गुंडों के हाथों मंदिर को बचाना अब कठिन है इसलिए खंडित होने से पूर्व वह मूर्तियों को उठा लाया है। विभाजन रेखा की आधिकारिक घोषणा 15 अगस्त को भी नहीं हुई थी, परंतु कांग्रेस मंत्रियों और नेताओं द्वारा लाहौर छोड़कर चले जाने के कारण यह स्पष्ट था कि लाहौर पाकिस्तान में जा रहा है। नेहरूजी के आश्वासन के बावजूद नरसंहार जारी रहा अत: शेष हिंदुओं ने कुछ दिनों में ही लाहौर खाली कर दिया। इनमें से बहुत कम भारत लौट सके। ज्यादातर को रास्ते में कत्ल कर दिया गया।

[लेखक विजय कुमार मल्होत्रा]
 
जब तक जिन्ना ,नेहरु और गांधी को देशद्रोही घोषित कर के मरणोपरांत फांसी की सजा नहीं सूना दी जाती ,और इनकी मुर्तिओन को फांसी पर नहीं लटका दिया जाता ,तब तक मेरे दिल को शान्ति नहीं मिलेगी ।
 
ये देश की विडम्बना है धर्म के नाम पर देश का बंटवारा करने वाली कांग्रेस पार्टी ने धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़ रखा है और जनता गीदड की खाल में छिपे इस भेडिये को पहचान नहीं पा रही है |
 
एक शेर है जो इस गीदड़ झुण्ड का शिकार करेगा।... समझ तो थम गये होगे !!!

ये देश की विडम्बना है धर्म के नाम पर देश का बंटवारा करने वाली कांग्रेस पार्टी ने धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़ रखा है और जनता गीदड की खाल में छिपे इस भेडिये को पहचान नहीं पा रही है |
 
Sach baat to ye hai ki humne Pakistan ki aadat kharab kar rakhi hai.
Itni baar ladai hui, humne unke kuch areas per kabja b kiya........lekin baad me vo areas vapas kar diye.
Isliye pakistan sochta hai ki ladai hogi aur unke areas India le legi to vapas mil he jyege.
Jabhi hona aisa chahiye ki unke humle ka muh-tod jawab dena chahiye aur inke sabhi bunkers per kabza kar lena chaiye, jo baad me vapas b ni dena chahiye.


Dusri baat ye hai ki Humari Army k hath sarkaar band kar rakhti hai.
jab tak ye order nahi deti tab tak hum muh-tod jawab nahi de sakte.
jabki hona ye chahiye ki border per puri tarah se Army ka control hona chahiye, Army k alava kisi poltician k order ka wait na karna pade.


Teesri baat, border per jawan saheed ho rahi hain, lekin yaha sarkar aapas me he ladai kar rahi hai.....central government aisa kuch nahi kar rahi jo us se umeed ki ja rahi hai.
sarkaar sirf ye soch rahi hai ki agar Pakistan per humla kiya to India me unke liye mushalmano ka VOTE BANK khatam ho jyega.
Meri ye samajh ni aata ki ye apne VOTE bachane k checkar me jawano ko kyu saheed karva rahe hain??????????
Inke khud k bete border per hon aur unme se koi aise saheed ho to in politicians ko pata chale ki dard kya hai.
 
इकबाल के द्वारा भारत यानि हिंदुस्तान के लिए कहे गए शब्द "नापाक" का उल्टा या Opposit शब्द पाक होता है .इसी को लेकर पाकिस्तान शब्द बनाया गया. जिसका अर्थ पवित्र देश होता. वैसे यह दो शब्दों"पाक +स्तान"से बना हुआ लगता है .परन्तु उर्दू के इसके सात अक्षर हैं. जिनके हरेक अक्षर से पाकिस्तान के उन हिस्सों या प्रान्तों का पता चलता है, जो जिन्ना पाकिस्तान में शामिल करना चाहता था लेकिन कई हिस्से शामिल नहीं हो सके. यह सात अक्षर इस प्रकार हैं:-

1 .पे -پ -प -= ( पंजाब )
2 .आलिफ-ا - अ =असम ( पूर्वोत्तर प्रांत )
3 .काफ़ - ک - क =कश्मीर
4 .सीन - س -स =सिन्ध
5 .ते - ت-त =तराई (गंगा यमुना का सिंचित क्षेत्र )
6 .अलिफ - ا -अ = अवध ( पूरा यूपी )
7 .नून - ن -न = निजाम ( हैदराबाद ).

इस तरह इन उर्दू के सात अक्षरों से मिलकर"पाकिस्तान - پاکستان"शब्द बना है .जो उसके क्षेत्र को भी प्रदर्शित करता है .मगर
इन में से चार हिस्से असम , कश्मीर , अवध ,तराई और निजाम पकिस्तान को नहीं मिले .जिन्ना ने कराची में जब 14 अगस्त 1947 को पहली बार पाकिस्तान का झंडा फहराया ,तो कहा था कि इन हिन्दुओं ने हमारे साथ धोखा किया ,और आधा अधूरा ,टूटा फूटा पाकिस्तान दे दिया है यह सुन कर सुहरावर्दी ने जिन्ना से कहा था ,आप कुछ समय सब्र करिए ,देखना एक दिन यही हिन्दू पूरा हिंदुस्तान चांदी की तश्तरी पर रख कर आपको पेश कर देंगे .

पुराने लोगों को याद होगा उन दिनों मुसलमान यह नारा लगाते थे, "हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान."

इसी लिए पाकिस्तान किसी बहाने भारत से तब तक लड़ता रहेगा, जब तक या तो पाकिस्तान मिट जाये या भारत इस्लामी देश बन जाये. लोग कुछ भी करें या कहते रहें पाकिस्तान से दोस्ती कभी नहीं होगी.

Rahi baat inke ye 7 akshara ki to to ek baar dhang se Indian Army ko mauka milne do......fer ye saale apna naam b badal lenge....fer to ye apna naam ya to "KHOTEYA" ya "Kukkur" (Kutta) rakhenge.
 
जब तक जिन्ना ,नेहरु और गांधी को देशद्रोही घोषित कर के मरणोपरांत फांसी की सजा नहीं सूना दी जाती ,और इनकी मुर्तिओन को फांसी पर नहीं लटका दिया जाता ,तब तक मेरे दिल को शान्ति नहीं मिलेगी ।

Inko fassi per latka dete aur in sare mushamano ko usi time pakistan bhej dete to aaj ye sab dange na hote.

ajj to situation h usme India me hindu kam aur mushalmaan jyda hain.....kuch areas me to sirf yehi dikhte hain.
main Chennai me tha waha jyda se jyda mushalmaan the,,,,,,,,,,,,,,delhi me b 65-70% mushalmaan hain......UP me b kuch areas me mushalmaan jyda hain aur yaha tak ki Haryana me b bot mushlamaan hain (ek baar ed per Najafgarh me dekha tha 3-4 saale pehle, ab to aur badh gye honge).

aadha gand aur atankwad to india me inhone b faila rakha hai......pakistan bana tabhi inko bhaga dete to may b aaj India shanti se jee raha hota.
 
पाक के प्रधान मंत्री का कहना है भारत और पाक के बीच मुख्य समस्या कश्मीर है। ........
समस्या कश्मीर नहीं अपितु जिहाद है
 
नए खुलासे से गर्माया सरबजीत का मामला

पाकिस्तान शरीफ नहीं है। भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की हत्या के मामले में पाकिस्तान का झूठ एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। पाकिस्तान ने उस समय बेशक हत्या को महज 'कैदियों की भिड़ंत' बताकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना दामन बचा लिया, लेकिन अब भारत को हत्या का चश्मदीद गवाह मिल गया है। एक दिन पहले पाकिस्तान की जेल से रिहा हुए गुरदासपुर के गांव डंडवा निवासी सुनील मसीह ने पाकिस्तान के झूठ को बेपर्दा किया है।

सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है। सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने रविवार सुबह फोन पर कहा कि 'मैं दिल्ली में हूं, अभी दैनिक जागरण में छपी खबर पढ़ी कि सरबजीत की हत्या का चश्मदीद भारत को मिल गया है। मैं अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी सवाल पूछती हूं कि क्या वह पाकिस्तान को अब भी शरीफ मानते हैं? अगर नहीं तो मैं गुजारिश करती हूं कि ऐसे आतंकी, धोखेबाज व गद्दार पाकिस्तान से संबंध न रखा जाए। मैं इस मुद्दे कोअंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाऊंगी ताकि पाकिस्तान का झूठ दुनिया के सामने साबित हो।'

दलबीर कौर ने कहा कि वह पाकिस्तानी जेल से रिहा होकर आए गुरदासपुर जिले के सुनील मसीह व तरनतारन जिले के दिलबाग सिंह से मुलाकात कर सरबजीत की हत्या की जानकारी लेंगी। नवरात्र चल रहे हैं, माता रानी ने मेरे सरबजीत के कातिल को सजा दिलाने के लिए पाकिस्तान जेल से सुनील को रिहा करवाया है। वहीं, सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत कौर ने बताया कि गांव के लोगों ने उन्हें बताया कि सरबजीत की हत्या का चश्मदीद पाकिस्तान की जेल से छूटकर भारत आया है। मैं बेटी पूनम के साथ सुनील मसीह व दिलबाग सिंह से मिलकर सरबजीत के लिए इंसाफ मांगूगी। भिखीविंड से सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत कौर फोन पर ये बातें कहते हुए रो पड़ीं। सुखप्रीत ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के घर के आगे तब तक धरना देंगी जब तक पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
 
The so-called rascals in India who call themselves budhijeevis (intellectuals) made a hue and cry when Switzerland banned the construction of Islamic Minarets there. But they will be deafeningly silent if a temple is demolished in Pakistan or Bangladesh.

I only wish the govt. refurnishes and refurbishes Kala pani in Andaman & Nicobar Islands and packs of these traitors of the nation there for the rest of their days.

रावलपिंडी में 79yrs पुराना मंदिर तोड़ेगा पाकिस्तान. इस्लाम इस के सख्त खिलाफ है.

#SaveRawalpindiTemple#Iprotestpic.twitter.com/8GhGw4XtAN
 
The so-called rascals in India who call themselves budhijeevis (intellectuals) made a hue and cry when Switzerland banned the construction of Islamic Minarets there. But they will be deafeningly silent if a temple is demolished in Pakistan or Bangladesh.

I only wish the govt. refurnishes and refurbishes Kala pani in Andaman & Nicobar Islands and packs of these traitors of the nation there for the rest of their days.

My friend, India being a secular country shall not fall into trap of wrong things here there. Also two wrongs do not make right. India's strength lies into secularism. Islam is being practiced in India for a very long time. India is home to 170 millions of Muslims which is more than Switzeland's population. Also Kindly read :

[h=1]Federal Council opposes building ban on minarets; Opinion on the popular initiative against the construction of minarets[/h]
https://www.news.admin.ch/dokumentation/00002/00015/index.html?lang=en&msg-id=20878

Therefore I request my fellow friends to not fall into trap of conspiratorial religious theories.
 
My friend, India being a secular country shall not fall into trap of wrong things here there. Also two wrongs do not make right. India's strength lies into secularism. Islam is being practiced in India for a very long time. India is home to 170 millions of Muslims which is more than Switzeland's population. Also Kindly read :

Federal Council opposes building ban on minarets; Opinion on the popular initiative against the construction of minarets


https://www.news.admin.ch/dokumentation/00002/00015/index.html?lang=en&msg-id=20878

Therefore I request my fellow friends to not fall into trap of conspiratorial religious theories.

Then why opposition/complete ban on building Hindu temples, Synagouges, Churches, Buddhist Monastery in Saudi Arabia and adjacent gulf countries. Do you want authentic source for that ?

I know there is no point in feeding you endlessly but for Rawalpindi temple I give you news from Pakistan's most read English daily , The Dawn

http://www.dawn.com/news/1128257/historic-temples-days-may-be-numbered

Read some more,

http://www.dawn.com/news/1125214/minorities-being-forced-to-relocate-on-independence-day

http://www.dawn.com/news/1122982/for-the-sikhs-in-kp-rawalpindi-is-their-new-home

http://www.dawn.com/news/1122802/devi-ka-mandir-a-faded-reminder-of-pindis-past

http://www.dawn.com/news/1120424/a-trip-to-pindis-jain-quarter

http://www.dawn.com/news/1120424/a-trip-to-pindis-jain-quarter

See the treatment meted out to minorities Hindu, Sikhs & Jains in Pakistan on daily basis since 14th August 1947.
 
Last edited:
पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई हमारे देश में अरबों रूपये के जाली नोट भेज चुका है एवँ अभी भी भेज रहा है।
रॉ [Research and Analysis Wing] कर क्या रही है?
TIT FOR TAT.
रॉ को भी पाकिस्तान की जाली करेंसी छाप कर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए अन्तिम कील ठोक देनी चाहिए।
हर हर महादेव ! वन्दे मातरम !
 
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