Shayri (Continued)

कोठी बना ली आपने किरदार बेचकर,
कैसे मैं घर बनाऊँगा अख़बार बेचकर
मजबूरियां तो देखिए, मज़दूर बाप की,
लाया है वो खिलौना भी औज़ार बेचकर!!
 
मेरी आँखों के समंदर में जलन कैसी है |
आज फिर दिल को तडपने की लगन कैसी है ||

अब इस राह पे चिरागों की कतारे भी नहीं |
अब तेरे शहर की गलियों में घुटान कैसी है ||
 
तो आखिर आपने अपना उपनाम सुनिश्चित कर ही लिया : मासूम :victorious:

हां भाई संदीप, मैंने सुना था एक तखल्लुस अपनाना जरूरी होता है i मेरी सादगी और भोलेपन के साथ ये 'मासूम' मेल खाता दिखाई दिया i
 
पेशे नज़र है तलत की गाई हुई एक नज़्म :

ना तो होश से तआरुफ़, ना गम से आशनाई
ये कहाँ आ गए हम तेरी बज़्म से निकल कर
कभी शेरो नग्मा बनकर कभी आंसूओं में ढलकर
तुम मिले तो हमको लेकिन सूरतें बदल कर
 
पेशे नज़र है तलत की गाई हुई एक नज़्म :

ना तो होश से तआरुफ़, ना गम से आशनाई
ये कहाँ आ गए हम तेरी बज़्म से निकल कर
कभी शेरो नग्मा बनकर कभी आंसूओं में ढलकर
तुम मिले तो हमको लेकिन सूरतें बदल कर

simply beautiful....

RK^2
 
एक जनाजा और एक बारात टकरा गए,
उनको देखने वाले भी चकरा गए,
ऊपर से आवाज आई-”ये कैसी विदाई है?
महबूब की डोली देखने साजन कि अर्थी भी आई है.
 
एक जनाजा और एक बारात टकरा गए,
उनको देखने वाले भी चकरा गए,
ऊपर से आवाज आई-”ये कैसी विदाई है?
महबूब की डोली देखने साजन कि अर्थी भी आई है.

Jab nikla mera zanaza, tere dar ke saamne se
dekha udhar thaa humne, kafan ughad kar

RK^2
 
Tu Iss Kadar Insaan Ko Bebas Na Bana Ae Mere
Khuda........

Ki Tera Banda Tujh Se Pahele Kisi Aur Ke Aage Jhuk
Jaaye..
 
Tumhare marne ki khabar failee sahar me dhuan ban kar
har kisi ki aankh laal thee, aur pani bah raha thaa

RK^2
 
"इधर किया करम किसी पे और इधर जता दिया
नमाज़ पढ़के आए और शराब माँगने लगे
सुख़नवरों ने ख़ुद बना दिया सुख़न को एक मज़ाक
ज़रा-सी दाद क्या मिली ख़िताब माँगने लगे"
 
और क्या इस से ज़्यादा कोई नर्मी बरतूँ
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तेरे गालों की तरह
 
आज टाइम मिला है तो सोचता हूँ कि इस Platform से इतनी लंबी गैर-हाजिरी का सुकून पाते आप सज्जनों को कुछ Extra बोर करूँ। एक नज़्म है:

"हुस्न बाज़ार हुआ, क्या कि हुनर ख़त्म हुआ
आया पलको पे, तो आँसू का सफ़र ख़त्म हुआ

उम्र भर तुझसे बिछड़ने की कसक ही न गयी ,
कौन कहता है कि मुहब्बत का असर ख़त्म हुआ

नयी कालोनी में बच्चों की ज़िदे ले तो गईं ,
बाप दादा का बनाया हुआ घर ख़त्म हुआ

जा, हमेशा को मुझे छोड़ के जाने वाले ,
तुझ से हर लम्हा बिछड़ने का तो डर ख़त्म हुआ"
 
.

अजीब सी हालत हुई है तेरे जाने के बाद .. अब भूख ही नहीं लगती खाना खाने के बाद

मियां, आपको जो रोग लगा है, वह बड़ा जालिम है
सुबह उठने से पहले, रात को सोने के बाद, ये खुराक लाजिम है
 
Zaruri nahi har baat shabdo se byan ki jaye,
Chup reh kar bhi bahut kuch keh jana ,ye bhi ek ada hoti hai.

"जुबां खामोश है, लेकिन मेरी आँखों में लिखा है
कि हाल-ए-दिल पढ़ा जाता है, बतलाया नहीं जाता"
 
उसे भूल जाने के सिवा कोई रास्ता भी नही ....
पर कैसे भूल जाऊ वो कोई हादसा तो नही........

हसीन उसके जैसे हजारो होंगे जमाने में ....
मगर मेरी निगाहों में उसके सिवा कोई भी नही ..........

मै तो सजाये रहता हूँ खामोश होठो पर भी नाम उसका ..
पर उसके होठो पर मेरा नाम भूल से आता भी नही ...

वो है की मेरे ख्यालो की दहलीज़ पर से वो कभी जाता ही नही ....
एक वो ही है की कभी प्यार से मुझे एक बार देखता भी नही ......

जला लिए हाथ ये सोचकर की वो मेरी लकीरों में नही ....
मगर कैसे हासिल करूं उसे -उसकी लकीरों में तो मेरा जिक्र भी नही ...

मै कहने भर के लिए रह गया हूँ दोस्तों ...
यूँ तो मेरे पास बुझे चिराग जितनी रोशनी भी नही .
 
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