phoolkumar
New member
एक किसान कौनसे-कौनसे टैक्स भरता है और कौनस
एक किसान कौनसे-कौनसे टैक्स भरता है और कौनसे नहीं?:
साधारणत: कहा जाता है कि देश का किसान ही एकमात्र ऐसे है जो कोई टैक्स नहीं भरता, जबकि इसके विपरीत वो निम्नलिखित प्रकार के सेल टैक्स भरता है| इससे पहले यह कहते चलें कि एक दुकानदार दो तरीके से चीजें बेचता है, या तो रशीद के बिना पर अन्यथा रशीद पर| रशीद के बिना दिया तो किसान को कोई टैक्स नहीं, लेकिन अगर रशीद पर दिया तो उसमें उस सेल का टैक्स जोड़ के मूल्य वसूला जाता है| यानि दुकानदार या व्यापारी टैक्स के नाम सेल पर फूटी कोड़ी न...हीं भरता, वह किसान से ही वसूली जाती है और फिर कहते हुए भी नहीं कतराते कि किसान तो कोई टैक्स ही नहीं भरता| किसान हर रोजमर्रा की चीज पे टैक्स भरता है, जैसे कि
१) खाद-बीज खरीदते वक़्त
२) जेवर-कपड़ा-लत्ता खरीदते वक़्त
३) कृषि उपकरण खरीदते वक़्त
४) करियाना का सामान खरीदते वक़्त
५) पेट्रोल-डीजल खरीदते वक़्त
६) बच्चों की स्कूल-कालेजों की फीस भरते वक्त (खासकर प्राइवेट संस्थानों में)
और ऐसे ही अन्य तमाम तरह की आजीविका की चीजें खरीदते और खर्चे करते वक़्त|
जब किसान इतने सारे टैक्स पहले से भर रहा है तो फिर उसके बारे यह क्यों कहा जाता है कि उसको टैक्स नहीं भरना होता?
और जहां तक मेरी समझ जाती है यह सेल टैक्स दुकानदार या व्यापारी को खुद भरना होता है, जबकि उसके लिए भरता किसान है| इस बिंदु पर अगर मैं गलत हों तो ठीक करने के लिए आभार|
अब सीधी सी बात आती है कि जब इतने सारे टैक्स वो पहले से भर रहा है तो उसको भी अपने उत्पाद पे टैक्स लगा के बेचने का अधिकार क्यों नहीं| टैक्स लगा के बेचना तो क्या उसके पास तो अपने उत्पाद के मूल्य-निर्धारण का ही अधिकार नहीं| वाह जी वाह क्या अर्थशास्त्र है ये! - Phool Kumar Malik
एक किसान कौनसे-कौनसे टैक्स भरता है और कौनसे नहीं?:
साधारणत: कहा जाता है कि देश का किसान ही एकमात्र ऐसे है जो कोई टैक्स नहीं भरता, जबकि इसके विपरीत वो निम्नलिखित प्रकार के सेल टैक्स भरता है| इससे पहले यह कहते चलें कि एक दुकानदार दो तरीके से चीजें बेचता है, या तो रशीद के बिना पर अन्यथा रशीद पर| रशीद के बिना दिया तो किसान को कोई टैक्स नहीं, लेकिन अगर रशीद पर दिया तो उसमें उस सेल का टैक्स जोड़ के मूल्य वसूला जाता है| यानि दुकानदार या व्यापारी टैक्स के नाम सेल पर फूटी कोड़ी न...हीं भरता, वह किसान से ही वसूली जाती है और फिर कहते हुए भी नहीं कतराते कि किसान तो कोई टैक्स ही नहीं भरता| किसान हर रोजमर्रा की चीज पे टैक्स भरता है, जैसे कि
१) खाद-बीज खरीदते वक़्त
२) जेवर-कपड़ा-लत्ता खरीदते वक़्त
३) कृषि उपकरण खरीदते वक़्त
४) करियाना का सामान खरीदते वक़्त
५) पेट्रोल-डीजल खरीदते वक़्त
६) बच्चों की स्कूल-कालेजों की फीस भरते वक्त (खासकर प्राइवेट संस्थानों में)
और ऐसे ही अन्य तमाम तरह की आजीविका की चीजें खरीदते और खर्चे करते वक़्त|
जब किसान इतने सारे टैक्स पहले से भर रहा है तो फिर उसके बारे यह क्यों कहा जाता है कि उसको टैक्स नहीं भरना होता?
और जहां तक मेरी समझ जाती है यह सेल टैक्स दुकानदार या व्यापारी को खुद भरना होता है, जबकि उसके लिए भरता किसान है| इस बिंदु पर अगर मैं गलत हों तो ठीक करने के लिए आभार|
अब सीधी सी बात आती है कि जब इतने सारे टैक्स वो पहले से भर रहा है तो उसको भी अपने उत्पाद पे टैक्स लगा के बेचने का अधिकार क्यों नहीं| टैक्स लगा के बेचना तो क्या उसके पास तो अपने उत्पाद के मूल्य-निर्धारण का ही अधिकार नहीं| वाह जी वाह क्या अर्थशास्त्र है ये! - Phool Kumar Malik