पुलिस और अफसरशाही पर हम बहुत सी बातें नज़र अंदाज़ कर देते है ...
ये सिर्फ बीजेपी, कांग्रेस की ही नहीं सपा, बसपा, तृणमूल, DMK, AIDMK, AIADMK, और अन्य सभी पार्टियों की पहली निति होती है कि, सत्ता में आते ही पुलिस और प्रशासनिक अफसर बदल दिए जाते है.
राजस्थान में बीजेपी ने आते ही, कांग्रेस के सभी आईएस, पुलिस अधिकारियो का तबादला कर दिया, सपा ने UP में ऐसा ही किया, गहलोत ने पीछली बार राजस्थान में , मायावती ने UP में आते ही ऐसा किया.. जयललिता ने भी, ऐसा कोई भी राज्य नहीं जहा नयी या विरोधी party आते ही, अफसर बदल दिए जाते है. और ये प्रथम काम होता है.
क्या ये कोर्ट को, जनता को, और अपने आप को पढ़े लिखे कहने वालो को नज़र नहीं आता. जब किसी अफसर का तबादला किया जा रहा है तो क्या वो भ्रष्ट नहीं है, क्या वो पार्टीयों की सेवा करता है या जनता की. क्या ये चीज़ साफ़ नहीं हो जाती.
नयी party केवल तबादला क्यों करती है, जब उसे पता है की फला अफसर काम नहीं करेगा, तो निलंबित (suspend) क्यों नहीं करती. क्यूँ सचिवालय में भरोसेमंद अफसर लगाये जाते है, जो सिर्फ उसी पार्टी के लिए काम करते है.
ये सारी मिलीभगत से होता है | जो अफसर विरोध करते है, खेमका जैसे, उनका हर 6 माह में तबादला होता रहता है, और जो अफसर CM के पालतू होते है वो दिल्ली जैसे राज्य में 15 साल तक एक जगह टिक कर काम कर सकते है..... हम भले ही कितनी नयी पार्टिया जिता कर सरकार बना दे.. जब तक ये मिली भगत ख़तम नहीं होगी.. जनता का भला नहीं होगा...
UPSC की एक समिति पिछले 10 सालो से आईएस, आईपीएस आदि अफसरों की 3 साल तक एक जगह स्थायी होने की वकालत कर रही है, कुछ राज्यों ने इसी अपनी राज्य कानून किताब में लिख भी लिया है.. लेकिन बस किताब तक ही सीमित रखा है .... क्या वो राज्य (सरकार). राज्य का भला चाहता है ?
हम अगर party के नाम की बजाय सही सोच रखने वाले, समाज हित में काम करने वाले, और परहित करने वालो को वोट देंगे तो वो चाहे किसी भी party से हो, एक अच्छे फैसले लेने में पीछे नहीं हटेंगे...
आशा है, जनता जल्दी शिक्षित होगी और सही नेता की पहचान कर पायेगी..