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प्रवीण तोगडिय़ा भारतीय समाज......
प्रवीण तोगडिय़ा भारतीय समाज को गुमराह कर रहे है : सांगवान
राष्ट्रीय दलित-पिछड़ा एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित हवासिंह सांगवान ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण तोगडिय़ा अपने बयानों से भारतीय समाज को गुमराह कर रहे हैं जिसमें उन्होंने बार-बार बयान दिया है कि भारत में रहने वाले सभी मुस्लिम और ईसाईयों के पूर्वज हिंदू थे। इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है क्योंकि तोगडिय़ा जी ने अभी तक इतिहास का पूरा अध्ययन नहीं किया है। चीनी यात्री फाईयान हमारे देश में 15 वर्ष सन् 399 से 414 तक रहे और उन्होंने अपने संस्मरणों को चीनी भाषा में लिखा, जिनका बहुत पहले अंग्रेजी में अनुवाद हो चुका है और उससे बड़ा स्पष्ट है कि उस समय भारत में मुख्य धर्म बौद्ध धर्म ग्रामीण क्षेत्र में तथा जैन धर्म शहरी क्षेत्रों में व्यापक था। इसके अतिरिक्त हिंदू धर्म का उस समय तक कहीं कोई नामोनिशान नहीं था। इस बात की सच्चाई इससे भी सिद्ध होती है कि हमारे किसी भी हिंदू कहे जाने वाले ग्रंथों में हिंदू शब्द का कोई प्रयोग नहीं किया गया है। फाईयान ने लिखा है कि ब्राह्मण जाति के लोग छोटे-छोटे मंदिरों में मूर्ति पूजन करते थे। लेकिन इनका कहीं कोई धर्म नहीं लिखा है। इसलिए तोगडिय़ा का यह कहना बिल्कुल असत्य है कि सभी के पूर्वज हिंदू थे, बल्कि सभी के पूर्वज बौद्ध और जैन थे। हिदू शब्द का प्रचलन सातवीं सदी के बाद अस्तित्व में आया है, जिसके अनेकों प्रमाण उपलब्ध हैं।
आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत भी बार-बार बयान दे रहे हैं कि भारत में रहने वाले सभी हिंदू हैं। तो हमारा कहना है कि जब हमारे देश में सभी हिंदू हैं, चाहे वे कोई भी धर्म अपनाएं और बदलें तो फिर भारतवर्ष में धर्म का झगड़ा कहां रह गया क्योंकि चाहे कोई किसी भी धर्म को अपनाए, वह हिंदू ही कहलाएगा। फिर आखिर किसलिए सांप्रदायिक दंगे होते हैं और अनगिनत लोग मौत के घाट उतार दिए जाते हैं? इसलिए हमारा कहना है कि धार्मिक नेताओं को तथ्यों पर आधारित ही बयान देने चाहिएं ताकि देश में धार्मिक भाईचारा बना रहे।
प्रवीण तोगडिय़ा भारतीय समाज को गुमराह कर रहे है : सांगवान
राष्ट्रीय दलित-पिछड़ा एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित हवासिंह सांगवान ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण तोगडिय़ा अपने बयानों से भारतीय समाज को गुमराह कर रहे हैं जिसमें उन्होंने बार-बार बयान दिया है कि भारत में रहने वाले सभी मुस्लिम और ईसाईयों के पूर्वज हिंदू थे। इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है क्योंकि तोगडिय़ा जी ने अभी तक इतिहास का पूरा अध्ययन नहीं किया है। चीनी यात्री फाईयान हमारे देश में 15 वर्ष सन् 399 से 414 तक रहे और उन्होंने अपने संस्मरणों को चीनी भाषा में लिखा, जिनका बहुत पहले अंग्रेजी में अनुवाद हो चुका है और उससे बड़ा स्पष्ट है कि उस समय भारत में मुख्य धर्म बौद्ध धर्म ग्रामीण क्षेत्र में तथा जैन धर्म शहरी क्षेत्रों में व्यापक था। इसके अतिरिक्त हिंदू धर्म का उस समय तक कहीं कोई नामोनिशान नहीं था। इस बात की सच्चाई इससे भी सिद्ध होती है कि हमारे किसी भी हिंदू कहे जाने वाले ग्रंथों में हिंदू शब्द का कोई प्रयोग नहीं किया गया है। फाईयान ने लिखा है कि ब्राह्मण जाति के लोग छोटे-छोटे मंदिरों में मूर्ति पूजन करते थे। लेकिन इनका कहीं कोई धर्म नहीं लिखा है। इसलिए तोगडिय़ा का यह कहना बिल्कुल असत्य है कि सभी के पूर्वज हिंदू थे, बल्कि सभी के पूर्वज बौद्ध और जैन थे। हिदू शब्द का प्रचलन सातवीं सदी के बाद अस्तित्व में आया है, जिसके अनेकों प्रमाण उपलब्ध हैं।
आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत भी बार-बार बयान दे रहे हैं कि भारत में रहने वाले सभी हिंदू हैं। तो हमारा कहना है कि जब हमारे देश में सभी हिंदू हैं, चाहे वे कोई भी धर्म अपनाएं और बदलें तो फिर भारतवर्ष में धर्म का झगड़ा कहां रह गया क्योंकि चाहे कोई किसी भी धर्म को अपनाए, वह हिंदू ही कहलाएगा। फिर आखिर किसलिए सांप्रदायिक दंगे होते हैं और अनगिनत लोग मौत के घाट उतार दिए जाते हैं? इसलिए हमारा कहना है कि धार्मिक नेताओं को तथ्यों पर आधारित ही बयान देने चाहिएं ताकि देश में धार्मिक भाईचारा बना रहे।