असल में टॉपिक ये होना चाहिए " वो क्या है जिसकी वजह से जाटलैंड एक उबाऊ, जोशहीन और बेगरत सि साईट बनती जा रही है"
कितने सारे एक्टिव मेम्बर आजकल दिखाई ही नहीं देते, असल में जो ताजगी, जिन्दादिली, जोशीलापन जाटलैंड की पहचान था , उसका दम घोट दिया गया है.
मेरा अपना अनुभव हिया की ये साईट अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है
जिसने जाटलैंड को सुरुवाती दस सालो २००२ से २०१२ तक जिया है वो इसका आजका हाल देख कर दुखी है , झाकने का भी मन नहीं करता,
नहीं तो एक जमाना था की प्राइवेट सेक्टर के कुछ मेम्बर बताया करते थे की उनके ऑफिस में जाटलैंड बैन कर दी गयी है.
पिछले ४/५ सालो में जुड़े मेम्बर उस पीरियड के धागों को खोल कर देख सकते है
शायद पोस्ट की संख्या मेंटेन करने के लिए वैवाहिक विज्ञापन तक फोरम में खोलने पड़ रहे है
पहले भी इन सब के लिए जगह थी और अछे से काम आ रहे थे, क्योंकि जिसको जो तलाश है वो उसे ढून्ढ लेता है ओपन फोरम में इसकी नुमाइश की जरुरत क्या है
खैर जाने दिज्ये ,
तुम्हे गैरों से कब फुर्सत, हम अपने गम से कब खाली
चलो बस हो चूका मिलना, न तुम खाली ना हम खाली