Collection:: Khap's Positive Social Verdicts

It is an excellent step forwad and we should take this further to commence community to community interaction at the international level to propmote brotherhood and kinship.
 
BP865188-large.jpg
 
वरिष्ठ संवाददाता, रोहतक : अक्सर विवादों में रहने वाली खाप पंचायतों ने समाज सुधार के माध्यम से अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसकी पहल रविवार को रोहतक की छोटूराम धर्मशाला में आयोजित बैठक में कर दी है।बैठक में सर्वखाप, जाट संगठन, महिला एवं छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया। अध्यक्षता खाप चौरासी के प्रधान हरदीप सिंह अहलावत ने की। शादी में होने वाले खर्च पर अंकुश लगाने के लिए गहन विचार-मंथन हुआ। साथ ही दहेज प्रथा को खत्म करते हुए दहेज मांगने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है। जहां अभी तक खाप पंचायत लड़कियों से दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर शादी की उम्र घटाने पर अड़ी हुई थी, उस पर पैतरा बदलते हुए इस पर भी विचार-विमर्श करने के लिए सरकार से मांग की है।अहलावत ने कहा कि आज शादी-विवाह में खर्च करने के लिए लोगों में होड़ लगी हुई है। ऐसे में गरीब व्यक्ति के लिए इस होड़ में शामिल होना संभव नहीं है, जिसके कारण उनमें कुंठा की भावना पैदा होती है। इसलिए शादी-विवाह में खर्च कम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिन में शादी समारोह की बजाय रात को अधिक खर्चीला रहता है। लिहाजा रात में शादी समारोह पर अंकुश लगनी चाहिए। बरात में जाने वाले लोगों की संख्या कम से कम होनी चाहिए। अगर कोई शादी में दहेज की मांग करता है, तो उसका सामाजिक बहिष्कार भी होना चाहिए। इससे दहेज जैसी सामाजिक बुराई पर अंकुश लग सकता है। हिंदू मैरीज एक्ट में संशोधन कर एक गोत्र में शादी कानून का रद किया जाना चाहिए। एक गोत्र में लड़का-लड़की के बीच भाई-बहन का रिश्ता होता है, इसलिए भाई-बहन आपस में पति-प}ी का रिश्ते कैसे निभा सकते हैं।
पंचायत में स्पष्ट तौर पर एलान कर दिया कि समाज से बढ़कर कानून नहीं है। कानून समाज के लिए है न कि समाज कानून के लिए। ऐसे में कानून की आड़ में समाज को कमजोर नहीं किया जा सकता। बलजीत सिंह मलिक ने कहा कि महाराजा हर्षवर्धन के समय से चली आ रही खाप पंचायतों द्वारा ही सामाजिक परंपराओं के समर्थक ही नहीं रक्षक रहे हैं। इसलिए पूर्वजों के पद चिन्हों पर चलते हुए गौत्र विवाद को कानूनी दायरे में रहते हुए हल निकालना चाहिए।
खाप पंचायतों को तालिबानी का दर्जा दिया गया है, जो बिल्कुल गलत है। खाप पंचायतों ने लोगों को राह दिखाने का काम किया है न कि राह भटकाने का। इस मौके पर समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह दलाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामकरण हुड्डा, कै. सोहन लाल, राष्ट्रीय महासचिव डा. ओमप्रकाश धनखड़, रामकिशन गहलावत, कै. मान सिंह दलाल, प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडैंट हवासिंह सांगवान, कृष्ण घनघस शामड़, रोहतक जिलाध्यक्ष धर्मपाल हुड्डा, हिसार जिलाध्यक्ष दलजीत पंघाल, जींद जिलाध्यक्ष चन्द्र सिंह चहल, रिवाड़ी जिलाध्यक्ष सुबेदार रामचन्द्र टिकला, झज्जर जिलाध्यक्ष मा. ताराचन्द जाखड़, भिवानी जिलाध्यक्ष चौ. कपूर सिंह धनाना, सानीपत महासचिव ब्रव0161ासिंह दहिया, पलवल जिलाध्यक्ष मा. गिरीराज व सोनीपत जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे।
इनको भेजा मांग पत्र : सांझा संगठनों की बैठक में लिए गए निर्णयों का मांग पत्र महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, महामहिम राज्यपाल, राष्ट्रीय महिला आयोग, मुख्यमंत्री, सभी जिला उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक, सभी खाप पंचायतों व जातियों के संगठनों को भेजा गया है।
 
Last edited:
http://epaper.jagran.com/story1.asp...528&ed_date=30-oct-2012&ed_code=156&ed_page=6
खापों की प्रशंसनीय पहल
अपने फरमानों के लिए कुख्यात हरियाणा की खाप पंचायतों ने ऐसी पहल की जो उसकी प्रकृति से तो कम मेल खाती है लेकिन वास्तव में प्रशंसनीय है। इससे इनकी छवि में निश्चित तौर पर सुधार होगा। सर्वखाप की बैठक में दहेज लेने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने के आह्वान को रचनात्मक फरमान मानने में कोई हर्ज नहीं क्योंकि इसमें समाजसेवा, सकारात्मकता और दूरदर्शिता का संदेश और संकल्प निहित है। फिजूलखर्ची रोकने के लिए रात के समय शादियों पर रोक लगाने का अपील भी अनेक परिवारों को कर्जदार बनने और हीनभावना का शिकार होने से बचाएगी। बारातियों की संख्या सीमित रखने व डीजे के साथ अन्य पहलुओं पर भी सर्वखाप का नजरिया उत्साहजनक और अनुकरणीय दिखाई दिया। हरियाणा में सामाजिक ताने-बाने पर राज्य की तीव्र आर्थिक प्रगति का कहीं भी असर दिखाई नहीं देता। तड़क-भड़क को आधुनिकता का पर्याय मानने में किसी को हिचक नहीं, भले ही आर्थिक हालत कैसी भी हो। परंपराओं का यह अर्थ नहीं कि उन्हें निभाने में आम आदमी इतना दब जाए कि भविष्य में परंपरा निभाने का सामथ्र्य ही खो बैठे। दहेज की परंपरा सदियों से चल रही है, केवल इसी तर्क के आधार पर इसे लगातार ढोना अप्रासंगिक, अतार्किक और विवेकहीन माना जाएगा। अन्य ऐसी सामाजिक बाध्यताएं भी हैं जिनको थोड़े से प्रगतिशील दृष्टिकोण से बदलकर सार्थक ,सहयोगी और सकारात्मक बनाया जा सकता है। साक्षरता दर बढ़ने, जीवन स्तर में सुधार के बावजूद सामाजिक संगठनों के इस दिशा में प्रयासों को कभी गति मिलती दिखाई नहीं दी । इसके लिए किसी ठोस उत्प्रेरक की जरूरत अर्से से महसूस की जा रही थी। लगता है अब खापों ने आगे बढ़ कर यह कमी पूरा करने की सार्थक कोशिश की है। दहेज लोभियों का सामाजिक बहिष्कार समाज में एक नई चेतना, जागरूकता का संचार करने में निश्चित तौर पर सफल होगा। सरकार अपने प्रयासों को नए तेवर देते हुए इस बारे में खापों से सक्रिय सहयोग ले तो लक्ष्य प्राप्ति आसान हो सकती है। खापें अपने स्तर पर भी मुहिम चला कर साबित कर दिखाएं कि उनकी अपील न किताबी है, न ही अखबारी। हर स्तर पर यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रगतिशील समाज में कुरीतियों व आडंबरों के लिए कोई स्थान न रहे क्योंकि इस काम में न तो कानून कुछ कर सकता, न ही प्रशासन। यह काम जागरूकता और सक्रियता से ही संभव है।
 
[TABLE="width: 768"]
<tbody>[TR]
[TD][TABLE="width: 100%"]
<tbody>[TR]
[TD]
बेवजह खाप पंचायतों को बदनाम करने की कोशिश​
[/TD]
[/TR]
[TR]
[TD][/TD]
[/TR]
[TR]
[TD]आ ध्ो अधूरे ज्ञान के आधार पर टीवी चैनलों के स्टूडियो में बैठकर खापों, पंचायतों और ऑनर किलिंग की बढ़-चढ़कर बातें करने, घटनाओं को सनसनीखेज तरीके से पेश करके टीआरपी अजिर्त करने और वास्तविक तथ्यों पर परदा डालने के काम में लगे कुछ चैनल एक बार फिर वही गलती दोहराते हुए नजर आ रहे हैं, जो वे अतीत में बार-बार कर चुके हैं। बाईस नवंबर को उत्तर प्रदेश जिले के उड़ौली गांव में अब्दुल हकीम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दो साल पहले उसने लड़की के घर वालों की इच्छा के खिलाफ जाकर मेहविश से शादी की थी। तब से ही ये दोनों दिल्ली में किसी अज्ञात स्थान पर रह रहे थे। तीन महीने पहले वे अपने गांव लौटे थे। अब उनके साथ उनकी बच्ची भी थी। मेहविश ने खुद यह बात कही है कि उसके पति की हत्या उसके मायके वालों ने की है और वे उसे और उसकी बच्ची को भी मार सकते हैं। सवाल यही है कि जब पीड़ित मेहविश खुद कह रही है कि हकीम की हत्या उसके मायके वालों ने की है तब खाप पंचायत को मीडिया क्यों और कैसे घसीट रहा है? कहीं भी प्रेम प्रसंग से जुड़ी इस तरह की आपराधिक वारदात होती है तो खासकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया सीधे तौर पर पंचायतों और खाप पंचायतों को बदनाम करने की मुहिम में जुट जाता है। इस मामले में पुलिस मोहम्मद सरवर और आसिफ को गिरफ्तार कर चुकी है और सलमान व गुल्लू की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है। और दिलचस्प तथ्य यह है कि ये सब मेहविश के करीब और दूर के रिश्तेदार हैं। इनकी किसी पंचायत या खाप पंचायत से कोई वास्ता नहीं है। ग्राम स्तर की पंचायत की इस पूरे मामले में केवल इतनी सी भूमिका बताई जा रही है कि जब हकीम ने मेहविश से शादी की थी, तब गांव में पंचायत हुई थी और एतराज किया गया था। उसके बाद पंचायत ने किसी तरह का कोई फरमान जारी नहीं किया, जैसा कि मीडिया में लगातार प्रचारित किया जा रहा है। इस मामले को इस कारण भी तूल दिया जा रहा है क्योंकि हकीम और मेहविश आमिर खान के चर्चित टीवी शो सत्यमेव जयते की पांचवीं कड़ी में शरीक हुए थे। हालांकि उस समय भी उन्होंने यह आशंका जाहिर की थी कि उनकी हत्या की जा सकती है परन्तु तब भी उन्होंने डर अपने परिवारजनों से बताया था, जबकि अब मीडिया इसे गलत रंग देने में लगा हुआ है। हकीम और मेहविश अकेले नहीं हैं, जो इस तरह के खौफ में जी रहे हैं। दिल्ली, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और दूसरे उच्च न्यायालयों में हर रोज इस तरह के प्रेमी युगल अपनी सुरक्षा की गुहार लेकर अजिर्यां दाखिल करते हैं। उन्हें सुरक्षा दी भी जाती है। इसके बावजूद ऐसे मामले प्रकाश में आते रहते हैं, जब उनकी हत्या कर दी जाती है। और अधिकांश मामलों में पंचायतों और खाप पंचायतों का नहीं, उनके निकट संबंधियों का ही हाथ हत्या और हमले में निकलता है। इसके बावजूद जिस तरह इलेक्ट्रोनिक मीडिया इस तरह के हर मामले को पंचायतों और खाप पंचायतों से जोड़कर खबरों को बेचने की घातक प्रवृत्ति अपना रहा है, निश्चय ही वह बेहद चिंता का विषय है। इस पर रोक लगाए जाने की जरूरत है।[/TD]
[/TR]
</tbody>[/TABLE]
[/TD]
[/TR]
[TR]
[TD][/TD]
[/TR]
</tbody>[/TABLE]
 
Gathwala [Malik] Khap headed by Dada Baljit Singh met at Ahulana village on Sunday and decided to support stringent punishment for rape accused and create social awareness against female foeticide and dowry menace. It also decided not to take into account the gotra of grandmothers in marriage norms.

For photograph and fuller report log in www.tribuneindia.com Chandigarh edition dated June18, 2012 page 7.
 
An interesting editorial has appeared on the role of the Khap Panchayats entitled : Social Change- At last, khaps begin to respond. The Tribune, chandigarh ed.Vol. 133 No. 170, Haryana edition, dated july 21, 2013, p. 8.

For full details log in : www.tribuneindia.com
 
Here is another news item from The Tribune, Chandigarh, dated 21st September, 2013

Changes in marriage Act needed: Khap
Jhajjar khaps to discuss steps to curb honour killings
Ravinder Saini
​
​
​
Jhajjar, September 20
Taking a serious note of the honour killing incident at Garnavathi village in Rohtak district three days ago, khap panchayats active in the Jhajjar region have decided to resume their campaign to put pressure on the state government for amendments in the Hindu Marriage Act, 1955, in order to prevent such incidents in the state.
A meeting of various khap panchayats will be held at Chhotu Ram Dharamshala here tomorrow to decide the further course of action in this regard.
Om Prakash Dhankhar, chief of the Dhankhar Sabha, said besides representatives of different social outfits, office-bearers of 12 khaps would attend the meeting to give their suggestions over the issue.
“Though a case regarding amendments in the Hindu Marriage Act is pending before the Supreme Court, the state government has authority to amend the Act at the state-level as per its existing social custom. Many changes have already been done in the Act in the states of Karnataka, Pondicherry, Tamil Nadu, Uttar Pradesh and Punjab,” said Dhankhar.
He said amendments in the Act were instantly required to curb such barbaric incidents in Haryana.

http://www.jatland.com/forums/showt...-Positive-Social-Verdicts&p=347925#post347925
 
Khaps plead not guilty and say they do not incite such crimes [as honour killing]

Read full text on page 3, The Tribune Chandigarh, Friday, September 20, 2013 or

link : www.tribuneindia.com

Below is given the full text published in the Tribune :

Khaps plead not guilty
Say they do not incite such crimes
Tribune News Service
​
​
​
Rohtak, September 19
The Haryana khap panchayats today condemned the barbaric honour killing incident in Garnawathi village of the district. They have stated that the families must find some other ways to sort out such problems.
Talking to The Tribune here today, Mehar Singh, head of the biggest khap of the region-Meham Chaubisi Khap Panchayat, said the khaps had no role in any kind of crime, particularly in honour killing.
“We have been trying to convince the higher authorities and the courts that khaps have no role in such ghastly acts. It is unfortunate that the people get provoked and resort to violence against their children. It must stop. The khaps are meant to resolve the disputes and never intend to create any kind of problems for individuals,” he added.
Baljit Singh Malik, head of Gathwala Khap, which is considered the most progressive khap, also echoed similar views. “If there are some issues with the youngsters, the families must maintain poise and find a way out in a peaceful manner, by persuasion and talks, instead of getting violent”.
Both khap leaders maintained that the Garnawathi honour killing, in which the father of the girl had confessed to his crime, was a condemnable act.
The Supreme Court had earlier sought the view of the khaps in a PIL filed by an NGO, urging the courts to issue guidelines to the government to rein in khap panchayats dictating violence against youngsters.
The khap leaders had denied their role in such incidents before the apex court also. The All India Democratic Women’s Association (AIDWA) also expressed a deep shock and anguish over the honour killing in Garnawathi.
Terming it a shame for the civil society, its state secretary Savita said the level of cruelty displayed in the crime had stirred the conscience of all right-thinking individuals. “Such barbaric crimes continue unabated and remind people of the medieval period. Haryana alone has recorded dozens of honour killings but nothing has been done to curb such crimes”.
She said the state government and mainstream politics, ironically, continued to be silent spectators, due to which no strong signal was sent to the perpetrators of such crimes.
 
Mar 12, 2013, 12.18AM IST
ROHTAK: A khap panchayat in Haryana's Jind district has resolved to enforce a ban on the use of drugs in its area of influence.
This comes in the backdrop of youth icon and Olympian Vijender Singh being dragged into a controversy over his alleged heroin use.
In a meeting on Sunday, the Barah Tapa khap leaders resolved to ban the use of contraband drugs in 17 villages of the district and also decided to set up village-level committees to monitor and enforce the ban.
The village sarpanch Ajmer Singh presented the resolution and it was unanimously adopted. The leaders also announced to start a special drive against drugs.
Khap leader Kuldeep Singh Dhanda presided over the meeting and said that these committees would also identify drug addicts and help them in quit the habit.
The khap leaders said that the processed narcotics like smack are being smuggled into rural Haryana and a growing number of youth are getting addicted.
"The problem of drugs among youth in Haryana is not as bad as Punjab but its growing and we should be on the guard," Dhanda said adding that the Khap would punish people caught using drugs.
"We don't know if Vijender Singh used drugs or not but the entire controversy speaks volumes about the possible extend and reach of drugs. The youth in Haryana need to be made aware about this lurking danger," added Dhanda.
Layak Ram Dabas, additional director general and director of State Crime Record Bureau (SCRB), said that use of processed drug seemed more in the NCR region like Gurgaon, Faridabad and Sonipat than in the interior.
Link
 
जींद. आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर हरियाणा की खापों के सामाजिक कार्यों से खुश नजर आए। उन्होंने स्वीकारा भी, ‘मैंने तो अभी तक खापों के बारे में नकारात्मक प्रचार ही सुना था। बड़ा अचंभा लगता था, जब सुनता था कि खापें तालिबानी फैसले सुनाती हैं। सोचता था, भारत में तालिबान नहीं हो सकता क्योंकि हिंदू संस्कृति में ऐसा कोई नहीं कर सकता। खापें तो अच्छा काम कर रही हैं।’ श्रीश्री ने इच्छा जताई कि ऐसी संस्था को देशभर में फैलाना है।

जींद के एक होटल में आध्यात्मिक शक्ति एवं खाप पंचायतों के ऐतिहासिक मिलन समारोह में श्रीश्री रविशंकर ने तीन मिनट का भाषण दिया, अलबत्ता खाप प्रतिनिधियों की देर तक सुनी। खापों की बातों का समर्थन किया। बोले-अकेली सरकार से देश नहीं चलता। सरकार सिर्फ कानून बनाती है, उसे लागू तो अन्य लोगों को करना होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में अपने भाषण में कहा कि सरकार अकेले नहीं जनता के सहयोग से देश को आगे ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि खापें जैविक खेती अपनाने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, नशे व शराब से दूर रखने के लिए काम करें। खाप पंचायतों से आह्वान किया कि वे आदर्श गांव बनाने के लिए आगे आएं। गांव सुधरेगा तो देश सुधरेगा।

‘हमारी पैरवी करो गुरुजी’
खापों के प्रतिनिधियों ने आध्यात्मिक गुरु से कहा-‘सरकार में हमारी पैरवी करो। सरकार के समक्ष हमारी इमेज सुधारने के लिए हमारे हित की बात रखो।’ गुरुजी ने भी माना कि खापें समाज हित का कार्य करती हैं। अकेले सरकार सारे कार्य नहीं कर सकती। ऐसे में खापों से समाज व राष्ट्र को आगे बढ़ाने में सहयोग लिया जा सकता है।

ये प्रस्ताव हुए पारित
- समगोत्र विवाह निषेध किया जाए।
- हिंदू विवाह अधिनियम 1955 में संशोधन होना चाहिए।
- कन्या भ्रूण हत्या पर मृत्युदंड का प्रावधान हो।
- नशीले पदार्थों की बिक्री सख्ती से बंद की जाए।
- दहेज प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध हो।
- योग व आध्यात्मिक शिक्षा को पाठयक्रम में शामिल किया जाए।
- ऑनर किलिंग का खाप पंचायतों पर आरोप निराधार है।
- गौ आधारित खेती तथा गौ संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए।
- अंतरजातीय विवाह का समर्थन किया जाए।
- आर्ट आफ लिविंग के कार्यक्रमों को गांव गांव तक पहुंचाने में खाप पंचायतें सहयोग करेंगी।

पाखंडी संत को मिले दोगुनी सजा
संत गलती करता है तो उसे आम आदमी से दोगुनी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि वे किसी पाखंडी की हिमायत नहीं करते। पूर्व में दिए बयान के संबंध में पूछे जाने पर रविशंकर बोले- रामपाल के गुनाह लोगों के सामने आ चुके हैं। दोषी तो वह है ही। अब अदालत ही सजा देगी।

क्या बोले खाप प्रतिनिधि
सरकार समगौत्र शादियों पर प्रतिबंध लाने वाले बिल को सदन में लाए। खाप पंचायतों का समगौत्र में विवाह के खिलाफ आवाज उठाना सही है।
-ले. जनरल (रि.) डॉ. डीपी वत्स, समन्वयक, सर्व जातीय सर्वखाप पंचायत

गुरुजी के साथ मिलकर खापें कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ मुहिम चलाने को तैयार हैं। यह समय की मांग है।
-डॉ. संतोष दहिया, अध्यक्ष दहिया खाप

खाप पंचायतें सकारात्मक भूमिका निभाती हैं। अंतरजातीय विवाह के बाद पैदा हुए झगड़ों को भी खाप पंचायतें सुलझाती हैं।
-प्रतिनिधि मेहर सिंह दहिया


http://www.bhaskar.com/news/HAR-PAN-spiritual-guru-sri-sri-ravi-shankar-in-haryana-4819601-NOR.html
 
Less girls more boys, inter-cast marriage to be avoided best policy forward and save more girl child.

Less girls more boys has a direct influence on the structure of the community, which basically means breaking of community, families, etc. Direction of Indian society is already very bad from political class to religious class and then the concept of education, which in Indian terms does not hold any value.The results can be seen from everyday life.
 
Back
Top