जनजातियों का अपना अलग पहनावा, रहन सहन, वास्तुकला आदि होती है जबकि जातियों में ये कारक मौजूद होना जरूरी नहीं, जाटों के पास ये भी था, अलग पहनावा, अलग वास्तु कला, अलग खान पान, भवन निर्माण, सामाजिक संरचना, सामाजिक क़ानून आदि सबकुछ था। हाँ आज इनको ढूंढ़ना मुश्किल हो सकता है। पहनावे का उदाहरण दे तो आज...