abhisheklakda
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संस्कृति/कल्चर के इतनी ही बात हो रही है तो कुछ बात मैं भी कर दू, अपनी संस्कृति हरयाणवी है, पर सरकारी लकीरों ने इसको यूपी वाली बना दिया, लोग हरयाणवी होकर भी खुद को हरयाणवी नहीं बोल सकते। वैसे ये अन्याय अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति के दंड के तौर पर इस क्षेत्र के लोगो के साथ किया था, पर ये आज तक जारी है, नेहरू ने तो राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट तक नहीं मानी थी, जिसके हिसाब से मेरठ डिवीज़न , दिल्ली और रोहतक-अम्बाला डिवीज़न के क्षेत्र को हरयाणा चिन्हित किया गया था। बाहर के लोग हमें हरयाणवी ही बोलते है, फिर दबी जुबान में खुद बताना पड़ता है कि यूपी से है। देश में ऐसे सांस्कृतिक बटवारे का ये अकेला उदहारण है। जिसको राजनेताओ ने अपने फायदे के हिसाब से इस्तेमाल किया, हिसाब से लकीरें खींचते गए।
यूपी के साथ जुड़ने का दुःख नहीं बल्कि हरियाणा से टूटने का दुःख जरूर है। उम्मीद तो है कि कभी न कभी तो इस क्षेत्र को अपनी सांस्कृतिक पहचान जरूर मिलेगी। अलग राज्य की मांग करने वालो को भी इसका नाम पश्चिम प्रदेश के बजाय पूर्वी हरयाणा रखना चाहिए।
Lakra
यूपी के साथ जुड़ने का दुःख नहीं बल्कि हरियाणा से टूटने का दुःख जरूर है। उम्मीद तो है कि कभी न कभी तो इस क्षेत्र को अपनी सांस्कृतिक पहचान जरूर मिलेगी। अलग राज्य की मांग करने वालो को भी इसका नाम पश्चिम प्रदेश के बजाय पूर्वी हरयाणा रखना चाहिए।
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