रलदू सुसराल मैं
एक बार रलदू सुसराल मैं चला गया / ओड़े जाये पाछे उसकी सासु ने रोटियां गेल गंठा धर दिया उसकी थाली मैं आर यो देख के ने रलदू की आँख्यां मैं आंसू लगे आण ने ,
यो हाल देख के ने उसकी सासु बोली अक बेटा क्यूँ रोवे से , तन्ने घर की याद तो नहीं आवे से,
रलदू बोल्या के मैं नु रोऊँ सु के -...