वक़्त है झोंका हवा का और हम पीले पत्ते,
कौन जाने अगले लम्हे तुम कहाँ और हम कहाँ ...!!
हमने भी सदके लुटाये थे जी जान से उन पर ..
क्या मालूम था ऐ दोस्त, गमे तन्हाई का यही आगाज़ होता है...
मत कर ख़ाक के पुतले पे ग़रूर-ओ-बेन्याजी इतनी …
खुद को खुदी में झाँक कर देख तुझ में रखा क्या है !
जो...