अंधेरों ने किये पैदा ये नफरत के घराने हैं
दिलों में रोशनी भरदे मुझे वो दीप जलाने हैं
इन्हें मस्जिद मुबारक हो, उन्हें मंदिर मुबारक हो
मुझे तो इबादत में वतन के गीत गाने हैं
( famous lines of poet Sh Gajender Solanki)
जिंदगी के रंग
कभी हंसना कभी रोना
कभी जागना कभी सोना
कभी यादों के दरिया में
खुद को डुबोना
कभी जीने की चाहत में भागते ही रहना
कभी सब कुछ भुला, लंबी तान कर सोना
कभी टूट कर बिखरना, फिर सिमट खड़े होना
कभी आंसुओं से अपना ही तकिया भिगोना
कभी...