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    Shayri (Continued)

    हर कोई दिल की हथेली पे है सेहरा रखे किस को सैराब करे वो, किसे प्यासा रखे
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    Hindi Kavita (Continued)

    मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर मैं सासों के दो तार लिए फिरता हूँ मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ जग पूछ रहा है उनको, जो जग की गाते मैं अपने मन का गान किया करता हूँ मैं निज...
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    System Vs Mansikta

    सिस्टम हम सब से ही बना है। वेसे कुछ सालो पहले "दोगला" शब्द एक गाली माना जाता था लेकिन आजकल इस शब्द का प्रयोग नहीं होता। शायद ये गाली ना लगता अब। ठीक वेसे ही जैसे किसी मोहल्ले मे ज्यादातर लोग काले हो जाये तो वहाँ कालू कहने का मतलब ख़तम हो जाता है।
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    ek najam

    साथ कुछ सूखे हुए पत्ते उड़ाकर ले गया, वो मेरे ख़्वाबों को पलकों से चुराकर ले गया. कुछ दिनों के वास्ते ले जा रहा है ये कहा, और सारी उम्र को मेरा मुक़द्दर ले गया. बदहवस लम्हों में उसकी तिश्नगी तो देखिये, एक क़तरा प्यास थी सारा समंदर ले गया. जीतना दिल की तसल्ली के सिवा कुछ भी नहीं...
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    Shayri (Continued)

    ख़याल कीजिये क्या काम आज मैं ने किया| जब उसने दी मुझे गाली सलाम मैं ने किया| कहा ये सब्र ने दिल से के लो ख़ुदाहाफ़ीज़, के हक़-ए-बंदगी अपना तमाम मैं ने किया|
  6. H

    Hindi Kavita (Continued)

    sahi kaha....
  7. H

    Hindi Kavita (Continued)

    मैं असभ्य हूँ क्योंकि औपचारिक गोष्ठियों में बैठ कर साहित्य, संस्कृति और कला पर बात नही करता मेरे चेहरे से आभिजात्य नही टपकता मै कहीं से भी बुद्धिजीवी नही लगता मैं असभ्य हूँ क्योंकि हिन्दी माध्यम में पढ़ा हुआ हूँ औपचारिक होने का नाटक नहीं करता सुसंस्कृत लोगो में बैठ कर बात-बात में...
  8. H

    Marriage Anthropology and Psychology in Indian Context

    kuchh observation share karna chahunga(related to our previos jaat generation) is generation ke log independence ke baad paida hue,jis time par wo jawan hue us time jaato ne bhi jameen ko kam importance dena start kar diya tha.aur job ki taraf jaane lage.opportunity thi so kaafi logo ko job...
  9. H

    Shayri (Part 1)

    सोचने बैठे जब भी उसको, अपनी ही तस्वीर बना दी ढूँढ़ के तुझ में, तुझको हमने, दुनिया तेरी शान बढ़ा दी
  10. H

    Gazals "The Finest Ever"

    तेरा हिज्र मेरा नसीब है तेरा ग़म ही मेरी हयात है मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों तू कहीं भी हो मेरे साथ है मेरे वास्ते तेरे नाम पर कोई हर्फ़ आये नहीं नहीं मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं मगर मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है तेरा वस्ल ऐ मेरी दिलरुबा नहीं मेरी किस्मत तो क्या हुआ मेरी महजबीं यही कम है...
  11. H

    Gazals "The Finest Ever"

    तन्हा तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे किन राहों से दूर है...
  12. H

    Gazals "The Finest Ever"

    वक़्त बंजारा-सिफ़त लम्हा ब लम्हा अपना किस को मालूम यहाँ कौन है कितना अपना.** जो भी चाहे वो बना ले उसे अपने जैसा किसी आईने का होता नहीं चेहरा अपना. ख़ुद से मिलने का चलन आम नहीं है वरना अपने अंदर ही छुपा होता है रस्ता अपना. यूँ भी होता है वो ख़ूबी जो है हम से मंसूब उस के होने में नहीं होता...
  13. H

    Gazals "The Finest Ever"

    हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ बरसों से हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा मुद्दतें बीत गईं ख़्वाब सुहाना देखे जागता रहता है हर नींद में...
  14. H

    Gazals "The Finest Ever"

    ये दिल कुटिया है संतों की यहाँ राजा भिकारी क्या वो हर दीदार में ज़रदार है गोटा किनारी क्या ये काटे से नहीं कटते ये बांटे से नहीं बंटते नदी के पानियों के सामने आरी कटारी क्या उसी के चलने-फिरने, हंसने-रोने की हैं तस्वीरें घटा क्या, चाँद क्या, संगीत क्या, बाद-ए-बहारी क्या किसी घर के किसी...
  15. H

    Gazals "The Finest Ever"

    जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है दो आँखों में एक से हँसना एक से रोना है जो जी चाहे वो मिल जाये कब ऐसा होता है हर जीवन जीवन जीने का समझौता है अब तक जो होता आया है वो ही होना है रात अँधेरी भोर सुहानी यही ज़माना है हर चादर में दुख का ताना सुख का बाना है आती साँस को पाना जाती साँस...
  16. H

    Gazals "The Finest Ever"

    दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं फिर रस्ता ही...
  17. H

    Shayri (Part 1)

    जब मेरी मेहनत मेरे जज्बे में रहती है नाकामी फिर क्यों मेरे हिस्से में रहती है मेरे खुश होने पे बढा देती है गम मेरे मैं हंस न पाऊं जिंदगी इस मौके में रहती है मेरे गम मुझे अब ख़ुशी देने लगे है न जाने जिंदगी किस धोखे में रहती है बड़े होते ही न जाने खो जाती है कहाँ मासूमियत जो एक बच्चे में...
  18. H

    ek najam

    तक़दीर ने छीना जो इंसान कहा देगा इंसान का बच्चा जो ईमान कहाँ देगा पानी का सहारा तो सागर ही तुझे देगा कश्ती को तेरी कान्धा तूफ़ान कहाँ देगा उम्मीद तेरी पूरी सज्जन के यहाँ होगी आशा को तेरी पानी अभिमान कहाँ देगा मंदिर की तो सीढ़ी पर घुंघरू भी चढ़ा होगा जुगनू को भी अँधियारा दिनमान कहाँ...
  19. H

    ek najam

    क़द अपना कभी नापिये इज्जत की नज़र से आईना कभी देखिये सीरत की नज़र से हक़ मारने की रस्म ख़त्म होगी दिन ब दिन ऐसों को अगर देखिये लानत की नज़र से आपही के रचे इश्तेहार हैं जो मुल्क़ के नाहक़ उन्हें न देखिये नफ़रत की नज़र से कुछ को बना के हाशिया क्यों दे दिये सिफ़र भरसक उन्हें भी देखिये...
  20. H

    Shayri (Part 1)

    उनका ना रहना भी कहाँ है, गम की वजह जिंदगी यूं ही कुछ चुप, कुछ गुमसुम सी रहती है
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