Shayri (Part 1)

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लोग नाहक किसी मजबूर को कहते है बुरा
आदमी अच्छे हैं पर वक़्त बुरा होता है !!!!
 
[h=5]तिनका -2 जोड़ के एक शक्ल पहनी है
झांकता चलता हूँ अजनबी चेहरों में

कोई आइना नहीं बना शायद, कुछ शक्लों के लिए
[/h]
 
अपने चाहने वालों की बहुत भीड़ देखि तुमने
एक मै ही था जो भीड़ में न देखा गया तुमसे

 
सो जाओ, कोई सूखा हुआ पत्ता होगा,
मेरे आँगन में कहां उनके क़दम आते है
......
 
मेरा तो हलक सूख रहा है,पानी की चंद बूंदों के लिए
जाने वो कौन लोग है जो, दरिया में नहाकर आये है
 
उनका ना रहना भी कहाँ है, गम की वजह
जिंदगी यूं ही कुछ चुप, कुछ गुमसुम सी रहती है
 
दौर वह आया है, कातिल की सज़ा कोई नहीं |
हर सज़ा उसके लिए है, जिसकी खता कोई नहीं ||
 
तेरा इसरार सर आँखों पर तुझको भूल जाने की
मैं कोशिश कर के देखूंगा मगर वादा नहीं करता
 
ईश्वर ऐसे अहसास का नाम है.
रहे सामने और दिखायी ना दे !!!
 
खतरनाक होते हैं सियासत के क़दम,
तू न समझेगा सियासत, तू अभी नादान है..
कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है..
 
कट ही गयी जुदाई भी, कब ये हुआ कि मर गए
तेरे भी दिन गुज़र गए, मेरे दिन भी गुज़र गए !!

 
जब मेरी मेहनत मेरे जज्बे में रहती है
नाकामी फिर क्यों मेरे हिस्से में रहती है

मेरे खुश होने पे बढा देती है गम मेरे
मैं हंस न पाऊं जिंदगी इस मौके में रहती है

मेरे गम मुझे अब ख़ुशी देने लगे है
न जाने जिंदगी किस धोखे में रहती है

बड़े होते ही न जाने खो जाती है कहाँ
मासूमियत जो एक बच्चे में रहती है

मैं अब भी उसको भीड़ में पहचान लेता हूँ
ये और बात है क़ि वो बुरखे में रहती है
 
दौर वह आया है, कातिल की सज़ा कोई नहीं |
हर सज़ा उसके लिए है, जिसकी खता कोई नहीं ||

तेरी खता कोई नहीं ,की खता जमाने ने ।
कातिल को कौन दे सजा ?
जब हर कोई कातिल हे इस कत्लखाने में ।----रवि "अतृप्त "
 
इन्ही पत्थरों पर चल के आ सको तो आओ,
मेरे घर के रास्ते में कोई कहकशां नहीं है !!!
 
सोचने बैठे जब भी उसको, अपनी ही तस्वीर बना दी


ढूँढ़ के तुझ में, तुझको हमने, दुनिया तेरी शान बढ़ा दी
 
सागर को उठाया था कि गम दूर करेंगे,
इसमें भी तस्वीर नज़र आ गई उसकी !!
 
अकेले बैठोगे तो मसले जकड लेंगे |
थोडा सा ही सही वक़्त दोस्तों के नाम तो करो ||
 
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