S sivach New member Jan 25, 2013 #2,121 ये संगदिलों की दुनिया है, यहाँ सुनता नहीं फ़रियाद कोई यहाँ हँसते हैं लोग, जब भी होता है बरबाद कोई
R ravinderjeet New member Jan 26, 2013 #2,122 बे खबर दिल से वो भी नहीं ,में भी नहीं । मगर बात दिल की मानता वो भी नहीं ,में भी नहीं ।।
V vijaykajla1 New member Jan 27, 2013 #2,123 बात हौसले की करते हो तो मेरी भी सुनो, जंग लाजिम हो तो लश्कर{फ़ौज} नहीं देखा करते...
V vijaykajla1 New member Jan 27, 2013 #2,124 रुके तो चाँद...चले तो हवाओं जैसा है वो शख्स धूप में भी देखो तो छांव जैसा है !!
N nainsunil007 New member Jan 28, 2013 #2,125 जो आता है खुशी की इंतहा पर बहुत रोए थे उस आँसू की खातिर
R ravinderjeet New member Jan 28, 2013 #2,126 nainsunil007 said: जो आता है खुशी की इंतहा पर बहुत रोए थे उस आँसू की खातिर Click to expand... तू आंशु की जात पे ना जा , हुआ क्या हे पहले ये तो बता ।
nainsunil007 said: जो आता है खुशी की इंतहा पर बहुत रोए थे उस आँसू की खातिर Click to expand... तू आंशु की जात पे ना जा , हुआ क्या हे पहले ये तो बता ।
S sandeepsirohi New member Jan 28, 2013 #2,127 जिक्र क्या करू में अपने बारे में | मुझे खुद नहीं पाता मेरी औकात क्या है || चाहू तो एक पल में झुका दू आसमा | जिद पै आ जाऊ तो फिर बात ही क्या है || Last edited: Jan 29, 2013
जिक्र क्या करू में अपने बारे में | मुझे खुद नहीं पाता मेरी औकात क्या है || चाहू तो एक पल में झुका दू आसमा | जिद पै आ जाऊ तो फिर बात ही क्या है ||
S sandeepsirohi New member Jan 31, 2013 #2,128 साथ रह के भी अजीब सी दूरी रहती है अब | कभी दूर रह के तरसते थे साथ के लिए || बाते करने को भी कोई बात ना रही अब| कभी वक्त कम रहता था इक बात के लिए ||
साथ रह के भी अजीब सी दूरी रहती है अब | कभी दूर रह के तरसते थे साथ के लिए || बाते करने को भी कोई बात ना रही अब| कभी वक्त कम रहता था इक बात के लिए ||
H htomar New member Feb 1, 2013 #2,129 [h=5]सालों से एक रिश्ता साँसों में अटका हुआ था दबा-२ सा रह-२ कर चुभता था रूह में कल तुम्हारे 'अजनबी' कहते ही फूंट पड़ा आँखों से[/h]
[h=5]सालों से एक रिश्ता साँसों में अटका हुआ था दबा-२ सा रह-२ कर चुभता था रूह में कल तुम्हारे 'अजनबी' कहते ही फूंट पड़ा आँखों से[/h]
H htomar New member Feb 1, 2013 #2,130 [h=5]एक पत्ता पड़ा है ओंधे मुंह रेत में लगता गहरे समंदर से आ गिरा है नादान है अब दौड़ेगा नंगे पैर बर्फ में[/h]
[h=5]एक पत्ता पड़ा है ओंधे मुंह रेत में लगता गहरे समंदर से आ गिरा है नादान है अब दौड़ेगा नंगे पैर बर्फ में[/h]
H htomar New member Feb 1, 2013 #2,131 जिंदगी हर लम्हा अजीब है हर पल चाहू बात करू उससे, फिर भी बीच खडी एक दीवार है यूँ तो साँसे चल रही है, तेरे बिन जिंदगी, एक मुर्दा कहानी सी है
जिंदगी हर लम्हा अजीब है हर पल चाहू बात करू उससे, फिर भी बीच खडी एक दीवार है यूँ तो साँसे चल रही है, तेरे बिन जिंदगी, एक मुर्दा कहानी सी है
H htomar New member Feb 1, 2013 #2,132 [h=5]एक सांस बन के उलझी हो तुम खुदकुशी में कुछ नज़्म लिख आया हूँ , फिर मरते मरते , मरेगा ये कमबख्त ' शायर '[/h]
[h=5]एक सांस बन के उलझी हो तुम खुदकुशी में कुछ नज़्म लिख आया हूँ , फिर मरते मरते , मरेगा ये कमबख्त ' शायर '[/h]
S sandeepsirohi New member Feb 1, 2013 #2,133 चेहरे पै ओढ़ रक्खी है नकाब लोगो ने | दिल का हाल किसी को बताया ना करो || अपनापन इक दिखावा रह गया है महज | हमदर्द किसी को ऐसे ही बनाया ना करो ||
चेहरे पै ओढ़ रक्खी है नकाब लोगो ने | दिल का हाल किसी को बताया ना करो || अपनापन इक दिखावा रह गया है महज | हमदर्द किसी को ऐसे ही बनाया ना करो ||
S sivach New member Feb 2, 2013 #2,135 लोगों की निगाहों को पढ़ लेने की आदत है हालात की तहरीरें चेहरे से बचा रखना
S sivach New member Feb 2, 2013 #2,136 पानी में अक्श देख कर खुश हो रहे थे हम पत्थर किसी ने मार कर मंज़र बदल दिया
S sivach New member Feb 4, 2013 #2,137 होते है कैसे, लोग खुदा-ई से बेखबर हमसे तो एक शख्स भुलाया ना जा सका
S sandeepsirohi New member Feb 4, 2013 #2,138 मेरे चुप रहने से नाराज ना हुया करो | गहरा समंदर हमेशा खामोश रहता है ||
S sandeepsirohi New member Feb 5, 2013 #2,140 ये बर्फ का शहर है हम फिर भी जल रहे हैं | अपना सा जिनको माना अब वो ही छल रहे हैं || सबकी नहीं है क़िस्मत फूलों से खेलने की | बस सोच के यही हम काँटों पे चल रहे हैं ||
ये बर्फ का शहर है हम फिर भी जल रहे हैं | अपना सा जिनको माना अब वो ही छल रहे हैं || सबकी नहीं है क़िस्मत फूलों से खेलने की | बस सोच के यही हम काँटों पे चल रहे हैं ||