Shayri (Part 1)

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जिनकी आँखों का मुक़द्दर नहीं बनती नींदें,
उनके सब ख्वाब अधूरे ही हुआ करते हैं।।
 
मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा
अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा

 
ऐ ज़ख्म दे के भूलने वाले ज़रा बता,
मरहम की तूने फ़िक्र की मेरे लिए कभी।
 
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो
 
यही है दर्द मेरा, लोग मुझको कब समझते हैं
मैं शातिर हूँ नहीं इतना कि, जितना सब समझते हैं

ज़माने को समझने में हमारी उम्र गुजरी है
मियां, हम आपकी हर बात का मतलब समझते हैं

जमूरा भूख् से जब पेट पकड़े छ्ट्पटाता है
अजब हैं लोग उसको भी महज करतब समझते हैं

तुम्हारी हर अदा जैसे कि मुझसे बात करती है
तुम्हारी आँख की बोली को मेरे लब समझते है

यकीं मानो न मानो तुमसे ही किस्मत हमारी है
खुदा भी जानता है हम तुम्हें ही रब समझते हैं
 
इस बार मिलने आओ तो
फूलों के साथ बोतल भी लेते आना
मिलकर खोलेंगे, बैठकर बतियाएंगे
पर दफ़्तर के किस्से मत सुनाना.........
 
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बुरी अब हो गई दुनिया शिकायत सब को है लेकिन
कोई कोशिश नहीं करता इसे बेहतर बनाने की
 
हर घर में कोई तहख़ाना होता है, तहख़ाने में इक अफ़साना होता है |
किसी पुरानी अलमारी के ख़ाने में, यादों का अनमोल ख़ज़ाना होता है ||
 
जो दिल से करीब हो उसे रुसवा नहीं कहते,
यूं अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते,
खामोश रहेंगे तो घुटन और बढ़ेगी,
इसलिए अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते!
 
दुश्मनों ने तो ज़ख्म देने ही थे,
ये उनकी फितरत थी!
दोस्तों ने भी जब दगा की,
ये हमारी किस्मत थी!!
 
शायद ख़ुशी का दौर भी आ जाये एक दिन
गम भी तो मिल गए थे तमन्ना किये बगैर .....!!
 
देखी है बेरुखी की आज हमने इन्तेहा
हम पर नज़र पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए
 
वो बेवफा नहीं था यूँ ही बदनाम हो गया,
हजारों चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करता ...!!
 
जितनी शिद्दत से मुझे ज़ख़्म दिए है उसने
इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी न था
 
छोड़ तो दिया मुझे पर कभी ये भी सोचा तूने
अब कभी झूट बोला तो कसम किसकी खाओगे
 
रोज टांके उधेड़े जाते हैं, रोज जख्मे जिगर को सीता हु |
जाने क्यों लोग पढ़ना चाहते हैं, न कुरान हु मैं, न गीता हु ||
 
तुझे चाह के भी नहीं चाह पाता हूँ |
ये चाहत अजीब है या कैफियत मेरी |
 
बस खयालों में ही जिंदगी न गढ़ी जाए,
बातें कुछ तजुर्बे से भी कही जाए !
औरों की खबर हुज़ूर होगी बाद में,
पहले अपने ईमाँ से तो जंग लड़ी जाए !
 
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