फ़क़त बयानबाजी से कोई समाधान नहीं होता
दो हाथ, दो पैर से कोई इन्सान नहीं होता
लहू उबलना चाहिए रगों में सैलाब की तरह
बाल पकने से कोई बूढ़ा,कोई जवान नहीं होता
नुक्कड़ों पे होती है ,खूब इल्म की बातें
सियासत से मज़हब तलक,क्या बयान नहीं होता
दिलों में रहमत हो, बस इतना ही काफी है
फ़ाके रखने से ख़ुदा मेहरबान नहीं होता
समंदर समेट ले मौजों को अपने ही आगोश में
न पूछ ,किस जिगर में यहाँ तूफ़ान नहीं होता