S sivach New member Jan 19, 2013 #2,082 जिनकी आँखों का मुक़द्दर नहीं बनती नींदें, उनके सब ख्वाब अधूरे ही हुआ करते हैं।।
R rskankara Member Jan 19, 2013 #2,083 मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा
R rskankara Member Jan 19, 2013 #2,084 ऐ ज़ख्म दे के भूलने वाले ज़रा बता, मरहम की तूने फ़िक्र की मेरे लिए कभी।
S sandeepsirohi New member Jan 19, 2013 #2,085 तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो इश्क खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो इश्क खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो
S sandeepsirohi New member Jan 19, 2013 #2,086 यही है दर्द मेरा, लोग मुझको कब समझते हैं मैं शातिर हूँ नहीं इतना कि, जितना सब समझते हैं ज़माने को समझने में हमारी उम्र गुजरी है मियां, हम आपकी हर बात का मतलब समझते हैं जमूरा भूख् से जब पेट पकड़े छ्ट्पटाता है अजब हैं लोग उसको भी महज करतब समझते हैं तुम्हारी हर अदा जैसे कि मुझसे बात करती है तुम्हारी आँख की बोली को मेरे लब समझते है यकीं मानो न मानो तुमसे ही किस्मत हमारी है खुदा भी जानता है हम तुम्हें ही रब समझते हैं
यही है दर्द मेरा, लोग मुझको कब समझते हैं मैं शातिर हूँ नहीं इतना कि, जितना सब समझते हैं ज़माने को समझने में हमारी उम्र गुजरी है मियां, हम आपकी हर बात का मतलब समझते हैं जमूरा भूख् से जब पेट पकड़े छ्ट्पटाता है अजब हैं लोग उसको भी महज करतब समझते हैं तुम्हारी हर अदा जैसे कि मुझसे बात करती है तुम्हारी आँख की बोली को मेरे लब समझते है यकीं मानो न मानो तुमसे ही किस्मत हमारी है खुदा भी जानता है हम तुम्हें ही रब समझते हैं
R rskankara Member Jan 19, 2013 #2,087 इस बार मिलने आओ तो फूलों के साथ बोतल भी लेते आना मिलकर खोलेंगे, बैठकर बतियाएंगे पर दफ़्तर के किस्से मत सुनाना......... Last edited: Jan 19, 2013
इस बार मिलने आओ तो फूलों के साथ बोतल भी लेते आना मिलकर खोलेंगे, बैठकर बतियाएंगे पर दफ़्तर के किस्से मत सुनाना.........
R rskankara Member Jan 19, 2013 #2,088 बुरी अब हो गई दुनिया शिकायत सब को है लेकिन कोई कोशिश नहीं करता इसे बेहतर बनाने की
R rskankara Member Jan 19, 2013 #2,089 हर घर में कोई तहख़ाना होता है, तहख़ाने में इक अफ़साना होता है | किसी पुरानी अलमारी के ख़ाने में, यादों का अनमोल ख़ज़ाना होता है ||
हर घर में कोई तहख़ाना होता है, तहख़ाने में इक अफ़साना होता है | किसी पुरानी अलमारी के ख़ाने में, यादों का अनमोल ख़ज़ाना होता है ||
R rskankara Member Jan 20, 2013 #2,090 जो दिल से करीब हो उसे रुसवा नहीं कहते, यूं अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते, खामोश रहेंगे तो घुटन और बढ़ेगी, इसलिए अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते!
जो दिल से करीब हो उसे रुसवा नहीं कहते, यूं अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते, खामोश रहेंगे तो घुटन और बढ़ेगी, इसलिए अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते!
R rskankara Member Jan 20, 2013 #2,091 दुश्मनों ने तो ज़ख्म देने ही थे, ये उनकी फितरत थी! दोस्तों ने भी जब दगा की, ये हमारी किस्मत थी!!
S sivach New member Jan 21, 2013 #2,092 शायद ख़ुशी का दौर भी आ जाये एक दिन गम भी तो मिल गए थे तमन्ना किये बगैर .....!!
S sivach New member Jan 21, 2013 #2,093 देखी है बेरुखी की आज हमने इन्तेहा हम पर नज़र पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए
S sivach New member Jan 21, 2013 #2,094 वो बेवफा नहीं था यूँ ही बदनाम हो गया, हजारों चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करता ...!!
S sivach New member Jan 21, 2013 #2,095 जितनी शिद्दत से मुझे ज़ख़्म दिए है उसने इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी न था
S sivach New member Jan 21, 2013 #2,096 छोड़ तो दिया मुझे पर कभी ये भी सोचा तूने अब कभी झूट बोला तो कसम किसकी खाओगे
R ravinderjeet New member Jan 21, 2013 #2,097 jindagi me kuchh lamhe aesy bhi hote hein | jo ghnaton me badal kar ,jaar-jaar rote hein ||
S sandeepsirohi New member Jan 22, 2013 #2,098 रोज टांके उधेड़े जाते हैं, रोज जख्मे जिगर को सीता हु | जाने क्यों लोग पढ़ना चाहते हैं, न कुरान हु मैं, न गीता हु ||
रोज टांके उधेड़े जाते हैं, रोज जख्मे जिगर को सीता हु | जाने क्यों लोग पढ़ना चाहते हैं, न कुरान हु मैं, न गीता हु ||
S sandeepsirohi New member Jan 22, 2013 #2,099 तुझे चाह के भी नहीं चाह पाता हूँ | ये चाहत अजीब है या कैफियत मेरी |
R rskankara Member Jan 22, 2013 #2,100 बस खयालों में ही जिंदगी न गढ़ी जाए, बातें कुछ तजुर्बे से भी कही जाए ! औरों की खबर हुज़ूर होगी बाद में, पहले अपने ईमाँ से तो जंग लड़ी जाए !
बस खयालों में ही जिंदगी न गढ़ी जाए, बातें कुछ तजुर्बे से भी कही जाए ! औरों की खबर हुज़ूर होगी बाद में, पहले अपने ईमाँ से तो जंग लड़ी जाए !