Shayri (Part 1)

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ये संगदिलों की दुनिया है, यहाँ सुनता नहीं फ़रियाद कोई
यहाँ हँसते हैं लोग, जब भी होता है बरबाद कोई
 
बे खबर दिल से वो भी नहीं ,में भी नहीं ।
मगर बात दिल की मानता वो भी नहीं ,में भी नहीं ।।
 
बात हौसले की करते हो तो मेरी भी सुनो,

जंग लाजिम हो तो लश्कर{फ़ौज} नहीं देखा करते...
 
रुके तो चाँद...चले तो हवाओं जैसा है

वो शख्स धूप में भी देखो तो छांव जैसा है !!
 
जिक्र क्या करू में अपने बारे में |
मुझे खुद नहीं पाता मेरी औकात क्या है ||

चाहू तो एक पल में झुका दू आसमा |
जिद पै आ जाऊ तो फिर बात ही क्या है ||
 
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साथ रह के भी अजीब सी दूरी रहती है अब |
कभी दूर रह के तरसते थे साथ के लिए ||

बाते करने को भी कोई बात ना रही अब|
कभी वक्त कम रहता था इक बात के लिए ||
 
[h=5]सालों से एक रिश्ता साँसों में अटका हुआ था
दबा-२ सा रह-२ कर चुभता था रूह में
कल तुम्हारे 'अजनबी' कहते ही फूंट पड़ा आँखों से
[/h]
 
[h=5]एक पत्ता पड़ा है ओंधे मुंह रेत में
लगता गहरे समंदर से आ गिरा है
नादान है अब दौड़ेगा नंगे पैर बर्फ में
[/h]
 
जिंदगी हर लम्हा अजीब है
हर पल चाहू बात करू उससे,
फिर भी बीच खडी एक दीवार है
यूँ तो साँसे चल रही है, तेरे बिन
जिंदगी, एक मुर्दा कहानी सी है
 
[h=5]एक सांस बन के उलझी हो तुम

खुदकुशी में कुछ नज़्म लिख आया हूँ , फिर

मरते मरते , मरेगा ये कमबख्त ' शायर '
[/h]
 
चेहरे पै ओढ़ रक्खी है नकाब लोगो ने |
दिल का हाल किसी को बताया ना करो ||

अपनापन इक दिखावा रह गया है महज |
हमदर्द किसी को ऐसे ही बनाया ना करो ||
 
आज तफ्सील नहीं बस इतना सुनो
बहुत आज याद आ रहे हो तुम
!!
 
लोगों की निगाहों को पढ़ लेने की आदत है
हालात की तहरीरें चेहरे से बचा रखना

 
पानी में अक्श देख कर खुश हो रहे थे हम
पत्थर किसी ने मार कर मंज़र बदल दिया
 
होते है कैसे, लोग खुदा-ई से बेखबर
हमसे तो एक शख्स भुलाया ना जा सका
 
मेरे चुप रहने से नाराज ना हुया करो |
गहरा समंदर हमेशा खामोश रहता है ||
 
साफ़ कह दो अगर गिला है कोई,
फैसला
फांसले से बेहतर है !!
 
ये बर्फ का शहर है हम फिर भी जल रहे हैं |
अपना सा जिनको माना अब वो ही छल रहे हैं ||
सबकी नहीं है क़िस्मत फूलों से खेलने की |
बस सोच के यही हम काँटों पे चल रहे हैं ||
 
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