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    Gazals "The Finest Ever"

    Sh'er of the Day............. मेरे इक गोश-ए-फिकर में मेरी जिंदगी से अजीज तर, मेरा एक ऐसा भी दोस्त है जो कभी मिला ना जुदा हुआ...
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    Gazals "The Finest Ever"

    Nazm..... ये गए दिनों का मलाल है, मेरे दुश्मना से कहे कोई किसी गहरी चाल के एहतराम को सिलसिला ही फिजूल है मुझे शिकस्त यूं भी कुबूल है के कभी होंसले जो मिसाल थे वो नहीं रहे... मेरे दुश्मना से कहो कोई वो कभी जो एहद-ए-निशात में मुझे खुद पे इतना गुरूर था...वो खो गया वो जो फातिहाना खुमार में मेरे...
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    Gazals "The Finest Ever"

    Sh'er of the Day फिर पलट कर निगाह नहीं आयी, तुझ पे कुर्बान हो गयी होगी...
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    Gazals "The Finest Ever"

    Do Sh'er....... औरों से कहा तुमने औरों से सुना तुमने, कभी हमसे कहा होता कभी हमसे सुना होता. जिसको तुम भूल गए याद करे कौन उसे जिसे तुम याद हो वो याद किसको करे.
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    Gazals "The Finest Ever"

    उर्दू ........ उर्दू है जिसका नाम हम ही जानते है 'दाग़' हिन्दोस्तां में धूम हमारी जुबां की है.
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    Gazals "The Finest Ever"

    ................ या रब हुजूम-ए-गम को दे कुछ और वसुअतें दामन तो क्या अभी तक तो मेरी आँख नम नहीं...
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    Gazals "The Finest Ever"

    .................... दिल हो रहा है देर से खामोश झील सा, क्या दोस्तों के हाथ में पत्थर नहीं कोई ?...
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    Gazals "The Finest Ever"

    अश'आर ......... आखिरी बात: अल्लाह अगर तौफीक न दे इंसान के बस का काम नहीं, फैजान-ए-मुहब्बत आम सही इरफान-ए-मुहब्बत आम नहीं.
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    Gazals "The Finest Ever"

    गैर क्या जानिये क्यों मुझको बुरा कहते हैं..... गैर क्या जानिये क्यों मुझको बुरा कहते हैं आप कहते हैं जो ऐसा तो बज़ा कहते हैं वाकई तेरे इस अन्दाज को क्या कहते हैं ना वफ़ा कहते हैं जिस को ना ज़फ़ा कहते हैं हो जिन्हे शक, वो करें और खुदाओं की तलाश हम तो इन्सान को दुनिया का खुदा कहते हैं तेरी...
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    Gazals "The Finest Ever"

    गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले चले भी आओ कि गुलशन का करोबार चले क़फ़्फ़स उदास है यरो, सबा से कुछ तो कहो कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले कभी तो सुभ तेरे कुंज-ए-लब से हो आग़ाज़ कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्कबार चले बड़ा है दर्द् का रिश्ता, ये दिल ग़रीब सही तुम्हारे नाम पे आयेंगे...
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    Gazals "The Finest Ever"

    हुस्न-ए-जानां की तारीफ मुमकिन नहीं............ A very beautiful Urdu Nazm, without it, the thread cann't be said an accomplished one. हुस्न-ए-जानां की तारीफ मुमकिन नहीं आफरीं आफरीं आफरीं आफरीं तू भी देखे अगर तो कहे हमनशीं आफरीं आफरीं आफरीं आफरीं ऐसा देखा नहीं खूबसूरत कोई जिस्म जैसे अजंता...
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    Gazals "The Finest Ever"

    Thanks.... दिल लेके आ गये है सरे बाज़ार-ए-हुस्न हम, सिक्का अगर खरा है तो चल जाना चाहिए... You are most welcome... & Thanks tooo....... और मयखाना सलामत है तो हम सुर्खी-ए-मय से ताजीं-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम करते रहेंगें...
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    Gazals "The Finest Ever"

    कुछ शे'र ..... कासिम पयाम-ए-शौक़ को इतना ना कर तवील, कहना फ़क़त ये उन से के, आँखे तरस गयी.... आखिरी दीदार कर लो खोल कर मेरा कफ़न, अब ना शरमाओ के चश्म-ए-मुन्तजिर बे'नूर है.... चले भी आओ के मैराज़-ए-इश्क हो जाए आज की रात अकेला हूँ मैं खुदा की तरह.... जब भी गुजरे लम्हात की याद आएगी होंठ सी...
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    Gazals "The Finest Ever"

    हमें जान देनी है एक दिन ......... मेरी जिंदगी तो फिराक है वो अज़ल से दिल में मकीं सही, वो निगाह-ए-शौक से दूर हैं; रग-ए-जां से लाख करीब सही. हमें जान देनी है एक दिन वो किसी तरह वो कहीं सही, हमें आप खेंचिये दर पे जो नहीं कोई, तो हमीं सही. सर'तोर हो सर हश्र हो हमें इंतज़ार कुबूल है वो कभी मिलें...
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    Gazals "The Finest Ever"

    तुझे देख कर समझ लूं.......... तुझे देख कर समझ लूं, वो नज़र कहा से लाऊं; तेरी आरजू में तड़पे, वो जिगर कहाँ से लाऊं. जिसे तू कुबूल कर ले, मेरे पास ऐसा क्या है; करूं चरणों में जो अर्पण, वो समर कहाँ से लाऊं. मेरे वास्ते जो करदे, तेरे दिल में दर्द पैदा; इस अश्क-ओ-आह में, वो असर कहाँ से लाऊं...
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    Gazals "The Finest Ever"

    उसे कह दो... Nazm.... उसे कह दो... हजारों पल तुम्हारे बिन ना पूछो कैसे काटे हैं कभी यादें सताती हैं... कभी मौसम रुलाते हैं... उसे कह दो... हम आये हैं... हमें मायूस ना करना हमारा मान रख लेना हमें वापिस नहीं जाना... हमें अपना बना लेना...हमें दिल में बसा लेना... बहुत टूटे हुए दिल से... कभी रूठा...
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    Gazals "The Finest Ever"

    Fard-e-jurm.............. फ़कीह-ए-शहर बोला बादशाह से बड़ा संगीन मुज़रीम है, ये आका! इसे मसलूब करना ही पड़ेगा के इसकी सोच हम सब से मुखतलिफ है... Maqbool Amir
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    Gazals "The Finest Ever"

    Nazm - तुम मेरे पास रहो..... तुम मेरे पास रहो मेरे क़ातिल, मेरे दिलदार, मेरे पास रहो जिस घड़ी रात चले आसमानों का लहू पी कर सियह रात चले मर्हम-ए-मुश्क लिये नश्तर-ए-अल्मास चले बैन करती हुई, हँसती हुई, गाती निकले दर्द की कासनी पाज़ेब बजाती निकले जिस घड़ी सीनों में डूबते हुये दिल आस्तीनोंमें निहाँ...
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    Gazals "The Finest Ever"

    सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा....... सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा, इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा. हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ़ भी चल पड़ेगे, रास्ता हो जाएगा. कितना सच्चाई से, मुझसे ज़िंदगी ने कह दिया, तू नहीं मेरा तो कोई, दूसरा हो जाएगा. मैं...
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    Gazals "The Finest Ever"

    नहीं निगाह में मंज़िल........ नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही नहीं विसाल मयस्सर तो आरजू ही सही. ना तन में खून फ़राहम ना अश्क आंखों में नमाज़-ए-शौक तो वाजिब बे-वजू ही सही. किसी तरह तो जमे बज़्म मैकदे वालों नहीं जो बादा-ओ-सागर तो हां-ओ-हु ही सही. ग़र इंतज़ार कठिन है तो जब तलक ए दिल...
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