जीवन में आ रही अब देरी जल्दी,
क्या खोना क्या ही कुछ पाना है,
आँखों से तेरी है जग सुन्दर सा,
अब है जाना और पहचाना भी,
विकल हो रही लहर मिल जाने को,
नहीं अकेली वो इस सागर में,
है वह जी रही सागर के संग,
पवन संग है प्रीत वो रखती,
सरसराती आती पवन,
गीत प्रेम के गाती पवन,
कैसे रहती चुप लहर भी,
आने लगी...