डॉक्टर राजपाल जी, गुरु सिर्फ कोई महान कार्यों से नहीं बनता जब तक कि उसका समुदाय-जाति उसके कार्यों को लिखती नहीं, गाती नहीं, संजो के रखती नहीं। सिखों ने यह परम्परा उनके पहले गुरु से कायम रखी जबकि जाट इस विचारधारा पर चलवा दिए गए या खुद चलते गए कि, "लिखने, गाने और सुनाने की क्या जरूरत, कर्म खुद बोलते हैं"…अगर सिखों ने उनके गुरुवों के बलिदानों, योगदानों को संजोया और गया नहीं होता तो वो कभी गुरु नहीं कहलाते, हमारे वालों को तरह भूले-बिसरे हो चुके होते या इतिहास के पन्नों में दफना दिए गए होते।
कोई गुरु, आदर्श तभी बनता है जब उसकी चीजों की तुलनात्मक विवेचना हो जैसे मैंने मेरी पोस्ट उन्नीस में एक उदहारण दे के प्रस्तुत करनी चाही|और वो कर्म कितने बोलते हैं वो आज हम सबके सामने है, कोई भी जाट विद्वान् या इतिहासकार पुस्तकें लिखता है तो उनको वो मान्यता नहीं मिल पाती जो कि दूसरों की लिखी हुइयों को मिल जाती है, क्यों क्योंकि जो परम्परागत लेखन की जातियां रही हैं, उन्होंने उन दो-चार पीढ़ियों बाद (जी हाँ बिना लिखे इतिहास दो-चार पीढ़ियों तक ही प्रमाणित रह जाते हैं, आगे की पीढियां तो फिर यही कहती हैं कि बुजुर्गों से सुना है, प्रचलित था) और फिर इन्हीं संशयों का फैयदा उठा विरोधी लेखक चीजों को तोड़-मरोड़ के अपने अनुरूप लिख देते हैं। आप तो खुद इतने बड़े लेखक हैं तो इस पीड़ा से भली-भांति परिचित होंगे|
सो ऐसा कुछ नहीं है कि हमारे यहाँ गुरु नहीं हुए हैं, सब कुछ हुआ है, जो नहीं हुआ है तो वो यह कि हमने अपने ही महापुरुषों को उन ऊँचाइयों तक बिठाना नहीं सीखा, जिन तक दुसरे हमारे वालों के आधे महान होते हुए भी ऊँचे ओहदों पे बैठा के गाते हैं।
फिलहाल जो करना है वो यही है कि पहले एक बार जितनी हो सके उतनी हस्तियों की उनके कर्मों, बलिदानों और योगदानों के आधार पर सूची बनाई जाए। और फिर उस सूची में से जो शीर्ष दस होंगे, उनके इर्द-गिर्द बड़े-बड़े लेख लिख उनको ग्रन्थों का रूप दिया जाए, उनके कार्यों, कार्य करने की शैली, सोच, तौर-तरीकों की तुलना विश्व के महानतम लोगों से करी जाए। ताकि हमारा समाज तुलना करना सीखा और देखे कि जिन चीजों के लिए हम बाहर भटकते हैं वो हमारे समाज में परिपूर्ण हैं|
और फिर इस सर्वेक्षण और शोध से तैयार हुए
ग्रन्थ का नाम "जाटग्रन्थ" या "खापग्रन्थ" रख दिया जाए और जाट के लिए सबसे पवित्र पुस्तक घोषित किया जाए और प्रचार किया जाए कि ये है "Jatism" जिसको जाट को जानना है वो इसको पढ़े और पूजे|
सपना दूरगामी है, असम्भव सा भी है, पर सपने नहीं देखेंगे तो पूरे कैसे होंगे? पूरे नहीं भी कर पाए पर नींव भी डाल गए तो आगे आने वाली पीढ़ी उसको बिना बाधा आगे बढ़ाना चाहेगी तो आधार तो तैयार मिलेगा उनको|
मैं आह्वान करता हूँ आपसे कि हमारा मार्गदर्शन करें, कोई ऐसी चीज नहीं जो दुनिया में कभी नहीं हुई हो। वो कभी नहीं हुई ऐसा हो सकता है लेकिन वो कभी ना हो ऐसा नहीं हो सकता|
Friends,
There has never been Guru-shishya tradition among the Hindu Jats, so there is no question of selecting or electing one when there existed none !
So it is futile discussion to elect ten gurus out of nowhere!!!!!!.
Thanks