कंजूसी

arveend

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एक बे एक आदमी बहुत कंजूस था ! वो इतना कंजूस था अक जो माखी भी चा में पड जावे ते उस्सने भी चूस ब्गाया करता !
उसके दो छोरे थे ! दोनु जवान होरे थे ! पड़ोसी बोले अक भाई इन ने खान पीन ने दिया कर कुछ ये जवान हो रहे हैं !
वो उन खातिर एक पीपी में दो किलो घी लियाया सहर में त !
जब भी रोटिया का टाइम होवे वो उन छोरया ने चूल्हे धोरे बिठावे अर रोटिया ने उस पीपी के रगड रगड के उन ने ख्वा देवे !
न्युए चलता रह्या प्रोग्राम कई भीने !
एक बे वो दो दिन खातिर किते गाम चल्या गया कोए काम ! जाती हाना उसने वा पीपी अलमारी में ध्रर दी, अर अलमारी के ताला मार के अपने छोरया ते बोल्या अक बेटा घी ने मतना छेडियो मेरे पाछे ते !
वे बोले - ठीक से बाबु !
दो दिन पाछे वो आया अर आंते की स्यात उसने अलमारी चेक करी अर देख्या अक घी ठीक ठयाक धरया से अक नहीं !
उसने अपने छोरे बुलाए अर बोल्या - आरे तमने रोटी नि खायी दो दिना ते ?
वे बोले - अक बाबु खायी थी ! दोनु टेम खायी थी !
वो बोल्या - फेर न्यू बताओ अक तुमने घी ते नहीं छेड़ा था ? अर न्यू बताओ अक तुमने रोटी क्या ते चोपड़ी थी ?
वे बोले - अक बाबु हम रोटिया ने इस अलमारी के रगड रगड के खा लिया करते !
वो छो में आगया अर डंडा लेके ने उनका सूड तारन लगया ! अर मारता मारता बोल्या - हरामजादों तुम नि बसन द्यो इस घर न ! थारे ते दो दिन भी लूखी रोटी नहीं खायी गयी ?
 
एक बे एक आदमी बहुत कंजूस था ! वो इतना कंजूस था अक जो माखी भी चा में पड जावे ते उस्सने भी चूस ब्गाया करता !
उसके दो छोरे थे ! दोनु जवान होरे थे ! पड़ोसी बोले अक भाई इन ने खान पीन ने दिया कर कुछ ये जवान हो रहे हैं !
वो उन खातिर एक पीपी में दो किलो घी लियाया सहर में त !
जब भी रोटिया का टाइम होवे वो उन छोरया ने चूल्हे धोरे बिठावे अर रोटिया ने उस पीपी के रगड रगड के उन ने ख्वा देवे !
न्युए चलता रह्या प्रोग्राम कई भीने !
एक बे वो दो दिन खातिर किते गाम चल्या गया कोए काम ! जाती हाना उसने वा पीपी अलमारी में ध्रर दी, अर अलमारी के ताला मार के अपने छोरया ते बोल्या अक बेटा घी ने मतना छेडियो मेरे पाछे ते !
वे बोले - ठीक से बाबु !
दो दिन पाछे वो आया अर आंते की स्यात उसने अलमारी चेक करी अर देख्या अक घी ठीक ठयाक धरया से अक नहीं !
उसने अपने छोरे बुलाए अर बोल्या - आरे तमने रोटी नि खायी दो दिना ते ?
वे बोले - अक बाबु खायी थी ! दोनु टेम खायी थी !
वो बोल्या - फेर न्यू बताओ अक तुमने घी ते नहीं छेड़ा था ? अर न्यू बताओ अक तुमने रोटी क्या ते चोपड़ी थी ?
वे बोले - अक बाबु हम रोटिया ने इस अलमारी के रगड रगड के खा लिया करते !
वो छो में आगया अर डंडा लेके ने उनका सूड तारन लगया ! अर मारता मारता बोल्या - हरामजादों तुम नि बसन द्यो इस घर न ! थारे ते दो दिन भी लूखी रोटी नहीं खायी गयी ?

hahhahahahaha mast chuttkala bhai.........

acha hoya chorra ne churma bana k na kahaya.................na te jee te e maar deta kasai
 
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