गम कि गहराई में,डूब के देखो यारो
गम में रो तो लेते हो कभी हंस के भी देखो यारो
हर गम कि एक वजह है इसकी अलग ही फिज़ा है
इस फिज़ा में एक मजा है तो क्या गम एक सजा है
जाम जब भर जाता है छलकने को हो जाता है
गम में जो रम जाता है एक अलग ही दुनिया में बस जाता है
गमगीन माहौल में जब गम निकाल के आता है
एक अलग ही नशा छाता है जाने क्यू मजा आता है
सूख कम है दुनिया में गम ही गम है दुनिया में
फिर भी दुनिया जीती है गम में भी यारो पीती है
हार को जिसने ना देखा हो जीत कि वो क्यू बात करे
गम को जिसने झेला ना वह् क्या सूख का एहसास करे
गम में रो तो लेते हो कभी हंस के भी देखो यारो
हर गम कि एक वजह है इसकी अलग ही फिज़ा है
इस फिज़ा में एक मजा है तो क्या गम एक सजा है
जाम जब भर जाता है छलकने को हो जाता है
गम में जो रम जाता है एक अलग ही दुनिया में बस जाता है
गमगीन माहौल में जब गम निकाल के आता है
एक अलग ही नशा छाता है जाने क्यू मजा आता है
सूख कम है दुनिया में गम ही गम है दुनिया में
फिर भी दुनिया जीती है गम में भी यारो पीती है
हार को जिसने ना देखा हो जीत कि वो क्यू बात करे
गम को जिसने झेला ना वह् क्या सूख का एहसास करे