जाट समाज और जातिवाद

anish

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अकसर जाटों के बारे में कहा जाता है कि जाट बहुत जातिवाद करते है। यह बात कुछ हद तक सही भी है, लेकिन लोगों ने हमेशा जातिवाद को गलत नजरिए से देखा है।
विभाजन मनुष्य का सामाजिक व्यवहार है, मनुष्य हमेशा अपने आप को बांटने का प्रयास करता है। धर्म, देश, राज्य, अमीर, गरीब, शिक्षित, अशिक्षित इत्यादि ये सब उसी व्यवहार के परिणाम है। मनुष्य जहां कही भी जाता है अपने जैसे लोगों को बाकियों से अलग देखता है, इसी क्रम में लोगों के अलग अलग समूह बन जाते है। जातिवाद भी इसी प्रकार से मनुष्य साथ जुड़ा हुआ है, यह गलत भी नहीं है क्योंकि इससे लोग अपनी संस्कृति से जुड़े हुए रहते है। अपनी जाति पर गर्व करना भी कोई गलत नहीं है, इससे ही तो हर व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है।

सबसे मूर्ख लोग तो वे है जो अपने आप को हिन्दू बताते है, अपने आप को अमीर भी कहते है गरीबों के घरों का वो पानी भी नहीं पीते लेकिन वो जातिवाद नहीं करते क्योंकि कई वर्षों से यह शब्द इतना बदनाम हो चुका है कि लोग इससे अपनेआप को जोड़ना नहीं चाहते।

धन्यवाद
अनिश झाझड़िया
राजस्थान टेक्निकल युनिवर्सिटी कोटा
 
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