anish
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हम सब जानते है कि आज जाट समाज एक समृद्ध समाज है, एक गौरवशाली इतिहास के साथ साथ तत्काल समय में भी जाट समाज अपने वर्चस्व को स्थापित किए हुए है। आज हम पहले से कई ज्यादा समझदार है, शिक्षा के क्षेत्र में भी जाट समाज के युवा नए आयाम हासिल कर रहे है। व्यापार में भी हमारे लोग अपना वर्चस्व स्थापित कर रहे है, फिर चाहे वो रियल एस्टेट हो या ट्रांसपोर्ट बिजनेस हो, कई युवा टेक्नोलॉजी और उससे जुड़े स्टार्टअप्स में भी अपना हाथ आजमा रहे है, वे भी बिल्कुल सफल होंगे जैसा कि गत वर्षों में देखने को मिल रहा है। राजनीति में भी हमारे पास कई अच्छे उम्मीदवार है, आज iit, iim, upsc मे भी बहुत अच्छे युवा है। हमें हमारे इतिहास ही नहीं वर्तमान पर भी काफी गर्व है और होना भी चाहिए लेकिन भविष्य का क्या?
आज इतनी उपलब्धियां होने के बावजूद युवा ओर नई पीढ़ी को मार्गदर्शन या म यूं कहूं कि सहयोग करने वाले बहुत कम लोग है। आज कुछ ही लोग जो किसी jat organisations से जुड़े हुए है, समाज ओर उसके भविष्य की परवाह करते है, बाकी अधिकतर अपने निजी जीवन में व्यस्त है। कई उदाहरण तो ऐसे भी जिसमें अनुभवी जाट नॉन जाटों का बहुत सहयोग करते है लेकिन अपने समाज से उन्हें कोई मतलब नहीं है, अपने लोगों को सपोर्ट करना उन्हें इस नए युग में अटपटा लगता है।
जिन लोगों को जाट समाज अपना गौरव मानता है उन्हें अपने आप को जाट कहने में भी शर्म आती है। लोग अपने आप को उच्च विचारों वाला दिखने के चकर में इस दुनिया में अपनी पहचान खो रहे है। मेरी नजर में तो किसी बड़े पद पर बैठे जाट से ज्यादा उस जाट का ज्यादा मूल्य है, जो अपने स्तर पर समाज के लिए जो कुछ उससे हो सके कर रहा हो।
जाट समाज को ऊपर उठाने के लिए किसी बड़े पद पर होने से ज्यादा जरूरी समाज हित में कुछ करने की इच्छाशक्ति का होना है। जिन लोगों के पास अच्छी डिग्री है जो लिख सकते है उन्हे जाटो के इतिहास, वर्तमान ओर भविष्य पर लिखकर बाकियों को जागरूक करना चाहिए, ये काम एक विद्यार्थी भी कर सकता है इसके लिए शिक्षक होने की आवश्यकता नहीं है। जिसके पास धन है वो समाज के लिए दान कर सकता है उसे शिक्षा ग्रहण करने की आवश्यकता नहीं है, जो कुछ नहीं कर सकता वो कम से कम जो आगे बढ़कर कर रहे है उन्हें प्रोत्साहित तो कर ही सकता है।
धन्यवाद
अनिश झाझड़िया
राजस्थान टेक्निकल युनिवर्सिटी, कोटा
आज इतनी उपलब्धियां होने के बावजूद युवा ओर नई पीढ़ी को मार्गदर्शन या म यूं कहूं कि सहयोग करने वाले बहुत कम लोग है। आज कुछ ही लोग जो किसी jat organisations से जुड़े हुए है, समाज ओर उसके भविष्य की परवाह करते है, बाकी अधिकतर अपने निजी जीवन में व्यस्त है। कई उदाहरण तो ऐसे भी जिसमें अनुभवी जाट नॉन जाटों का बहुत सहयोग करते है लेकिन अपने समाज से उन्हें कोई मतलब नहीं है, अपने लोगों को सपोर्ट करना उन्हें इस नए युग में अटपटा लगता है।
जिन लोगों को जाट समाज अपना गौरव मानता है उन्हें अपने आप को जाट कहने में भी शर्म आती है। लोग अपने आप को उच्च विचारों वाला दिखने के चकर में इस दुनिया में अपनी पहचान खो रहे है। मेरी नजर में तो किसी बड़े पद पर बैठे जाट से ज्यादा उस जाट का ज्यादा मूल्य है, जो अपने स्तर पर समाज के लिए जो कुछ उससे हो सके कर रहा हो।
जाट समाज को ऊपर उठाने के लिए किसी बड़े पद पर होने से ज्यादा जरूरी समाज हित में कुछ करने की इच्छाशक्ति का होना है। जिन लोगों के पास अच्छी डिग्री है जो लिख सकते है उन्हे जाटो के इतिहास, वर्तमान ओर भविष्य पर लिखकर बाकियों को जागरूक करना चाहिए, ये काम एक विद्यार्थी भी कर सकता है इसके लिए शिक्षक होने की आवश्यकता नहीं है। जिसके पास धन है वो समाज के लिए दान कर सकता है उसे शिक्षा ग्रहण करने की आवश्यकता नहीं है, जो कुछ नहीं कर सकता वो कम से कम जो आगे बढ़कर कर रहे है उन्हें प्रोत्साहित तो कर ही सकता है।
धन्यवाद
अनिश झाझड़िया
राजस्थान टेक्निकल युनिवर्सिटी, कोटा
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