दीनबंधु चौधरी छोटू राम जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

चौ: छोटू राम उन असाधारण दुर्लभ आत्माओं में से एक हैं जो मजदूर, किसान को यातना और उत्पीड़न से बचाने के लिए धरती पर अवतरित होते हैं.

क्यों किसान मान रहा है कि चौ: छोटू राम ने अंग्रेजों से लड़कर उनके और मजदूरों के लिए जो कुछ भी किया था, आज के निति-निर्माताओं ने वह सब कुछ दांव पर लगा दिया है? लगभग सौ साल पहले गुलाम भारत के एक सपूत ने ब्रिटिश हुकूमत और सामंती व्यवस्था से लड़ते हुए गरीब किसानों और मजदूरों के हक में कानून पारित करवाये. वहीं दूसरी तरफ स्वतंत्र भारत में कृषि क्षेत्र में किसान व् किसानी को पंगु बनाने वाली भर्मित नीतियां और किसानों को कमजोर करने वाले कानून बनाये जा रहे हैं. दीनबंधु छोटूराम जी की विचारधारा के विरुद्ध आज की सरकारें अपना-अपना राजनीति स्वार्थ साधने के लिए किसानों के अस्तित्व के लिए खतरा बनी हुई हैं. "किसान एक ऐसा खिलौना है जिससे कभी प्रकृति खेलती है और कभी राजनीति. .!!"

उत्तर भारत में चौधरी छोटू राम के नाम की एक ऐसी शख्सियत हुई थी। जिसे समूचे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान उन्हें अपना 'राम' मानता है। उनके जीवन, कार्यों और उनकी विचारधारा पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। किसान मसीहा और दलितोद्धारक के अलंकरणों से सम्मानित होने के बावजूद स्वतंत्रता आंदोलन में चौधरी छोटू राम की भूमिका और भारतीय राजनीति में उनके योगदान को लेकर अलग-अलग धारणाएं व्याप्त हैं। पिछले एक दौर में उनके व्यक्तित्व को काफी सीमित करने की कोशिश भी की गई है। इसलिए वर्तमान में एक ऐसे शोध की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जो उनके चिंतन के समग्र पहलुओं और वर्तमान संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाल सके, उनके चिंतन का जमीनी स्तर पर उचित मूल्यांकन कर सके।

एक अकेले व्यक्ति के दिलों-दिमाग से निकले-

1) कृषि उत्पाद मंडी एक्ट - APMC Act (Agriculture Produce Market Act) - 05/05/1939
2) साहूकार पंजीकरण एक्ट Money Lenders Registration Act - 02/09/1938
3) गिरवी जमीन वापसी एक्ट - Free Return of Mortaged Land Act - 09/09/1938
4) व्यवसायिक श्रमिक एक्ट - Professional Labour Act - 11/06/1940
5) कर्जा माफ़ी एक्ट - Loan/Debt Exemption Act - 08/04/1935
6) पंजाब वेटर्स एन्ड मेयर एक्ट - Punjab Waiters and Mayers Act
7) पंजाब ग्राम पंचायत एक्ट - Punjab Gram Panchayat Act
8) पंजाब रेगुलेशन व् अकाउंट एक्ट - Punjab Regulation & Account Act
9) सम्पत्ति स्थानांतरण एक्ट - Property Transfer Act
10) भाखड़ा नंगल बाँध - Bhakhra Nangal Dam - November



देश में किसान नेता छोटूराम चौधरी जैसा नेतृत्वकर्ता की जरूरत है छोटूराम चौधरी साहब एक योग्य शिक्षाविद्, संविधान विशेषज्ञ, रहबर-ए-आज़म, किसान मुद्दों के जानकार व्यक्तित्व और समानता, न्याय के लिए औचित्यपूर्ण नेतृत्व की क्षमता को समझने और संवैधानिक संरक्षण, भागीदारी और लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिए जानें जाते थे। उनके नेतृत्व, उत्कृष्ट प्रदर्शन और उल्लेखनीय योगदान ने हमें हमेशा प्रेरित किया और आज भी प्रेरित करते हैं। रहबर-ए-आजम दीनबंधु सर छोटूराम ने मजदूर, किसान व कमेरे वर्ग को स्वाभिमान से जीना सिखाया। हर वर्ग को उचित मान-सम्मान मिले, बचपन से ही उनकी यह सोच थी। ऐसे महान सपूत छोटूराम थे, जिन्होंने गरीब, मजदूर व कमेरे वर्ग को साहूकारों की बेड़ियों से मुक्त करवाकर काले कानूनों को समाप्त करने का कार्य किया। वे ऐसे महापुरुष थे जो जानते थे कि उनका राजनीतिक और सामाजिक धर्म क्या है।


“किसान को लोग अन्नदाता तो कहते हैं, लेकिन यह कोई नहीं देखता कि वह अन्न खाता भी है या नहीं।जो कमाता है वही भूखा रहे यह दुनिया का सबसे बड़ा आश्च र्य है।” किसानों के रहबर, सर छोटू राम के इन चंद शब्दों ने इतिहास के पन्नों में किसानों को न केवल एक महत्वपूर्ण स्थान दिया बल्कि उनकी आवाज़ को बुलंदी भी दी। शायद उनकी इसी बुलंदी की वजह से आज भी सर छोटूराम को किसानों का मसीहा कहा जाता है। एक किसान का बेटा और देश के किसानों के हितों का रखवाला, जिसके लिए गरीब और जरुरतमन्द किसानों की भलाई हर एक राजनीति, धर्म और जात-पात से ऊपर थी; सर छोटू राम बस आम किसानों के थे।



चौ: छोटू राम ने भाखड़ा बांध के निर्माण की कल्पना की थी. भाखड़ा बांध स्कीम को अमल में लाने के लिए वे कितने इच्छुक थे और कितने पहले से प्रयत्नशील थे उसका आभास 11-2-1933 को गवर्नर महोदय को लिखे पत्र से होता है. दीनबंधु सर छोटूराम चौधरी ने अपना सारा जीवन किसानों और गरीबों के हित में समर्पित किया। वे किसान व मजदूर की सबसे बड़ी जरूरत पानी को लेकर गंभीरता दिखाई और भाखड़ा बांध बनवाने में अहम योगदान देकर हर खेत को पानी पहुंचाया। यह हमारा दुर्भाग्य है कि जानकारी के अभाव के कारण, एक प्रतिशत से भी कम भारतीयों को ज्ञान है कि यह छोटू राम थे, जिन्होंने भाखड़ा बांध के निर्माण की कल्पना की थी। उसने पंजाब सरकार के साथ बिलासपुर के राजा के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे,जिसका अधिकार सतलज नदी के पानी पर था। मरने से कुछ महीने पहले समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

सर छोटूराम की अंतिम यात्रा साल 1945 में 9 जनवरी को सर छोटूराम ने अपनी आखिरी सांस ली। वे स्वयं तो चले गये पर उनके लेख आज भी देश की अमूल्य विरासत है। किसानों के इस नेता ने जो लिखा वह आज भी देश और समाज की व्यवस्था पर लागू होता है। उन्होंने अपने एक लेख में लिखा था, “मैं राजा-नवाबों और हिन्दुस्तान की सभी प्रकार की सरकारों को कहता हूँ, कि वो किसान को इस कद्र तंग न करें कि वह उठ खड़ा हो…. दूसरे लोग जब सरकार से नाराज़ होते हैं तो कानून तोड़ते हैं, पर किसान जब नाराज़ होगा तो कानून ही नहीं तोड़ेगा, सरकार की पीठ भी तोड़ेगा।”

एक अकेले व्यक्ति के दिलों-दिमाग से निकले, ये सभी कार्य, चौधरी छोटू राम के जीवन का गौरवशाली प्रतिनिधित्व करते हैं। आज के परिपेक्ष्य में भी इनकी प्रासंगिकता है. तो क्या यह हमारा कर्तव्य नहीं है कि हम लोग चौधरी छोटू राम की भावना को अपने तमाम विचार तथा कार्यों के सिंहासन पर स्थापित करें ? छोटू राम स्मृति दिवसों को 'कोरी राजनीती' से बचाएं और इसे भोंडी राजनीतीक मंच कतई ना बनने दें, इन कार्यक्रमों में मजदूर, किसान ही केंद्रित रहे यह भी उनको सच्ची श्रद्धांजिली होगी.
 
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