(Dated : 20.05.2014) नरेन्द्र मोदी जी आज भावुक हो गए । इस विषय पर बहुत चर्चा हुई । परन्तु उनकी भावनाओं को पिछले 12 वर्ष से उन्होंने अपने वश में रखा।
राजनैतिक क्षेत्र से , संचार माध्यमों से, शिक्षाविदों से , विदेश से उन पर अनेक आरोप लगाये गए । उनकी बुरे से बुरे शब्दों में निन्दा की गई। यहाँ तक कि साधु सन्तों ने भी उनसे घृणा की।
परन्तु धन्य है इस कर्मयोगी को कि नरेन्द्र मोदी ने धैर्य नहीं खोया ( धैर्य तो धर्म का पहला लक्षण है ) और बस अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।
न कभी निराश हुए न हताश हुए ।
ऐसे महामना को सादर वन्दन है।
इतने दिनों बाद जब माँ भारती के स्वप्न को साकार करने के उद्देश्य के साथ राष्ट्रनायक के पद पर पदासीन होने का सुअवसर प्राप्त हुआ हो तो कौन भावुक नहीं होगा।
केवल मोदी जी ही नहीं पूरा देश भावुक हो उठा है। बहुत वर्षों बाद इन रगों में देशभक्ति का संचार हुआ है।
अविचल अटल दृढ़ निश्चय लेकर कर्मक्षेत्र में आया हूँ।
घनघोर तिमिर की काली घटा को दूर भगाने आया हूँ ।
(A. Acharya)