upendersingh
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गामां मैं एक कहावत सै अक काला बाहमण, भूरा चमार अर कहरा (बिल्ली बरगी आंख्यां आला) जाट कमक्खत अर बदमाश होया करै। सै तो या एक भ्रांति, पर गाम के लोगां नै कूण समझावै? होया नु अक एक गाम मैं एक बिल्ली बरगी आंख्यां आला जाट था...ऊं कती गच, पर कहरा। गाम आलयां तै 'कहरा जाट, बिलाऊ' सुन-सुनकै नै वो इतना दुखी आ लिया अक गाम छोड़ण का फैसला कर लिया। उम्र भी घाट ए थी। एक दिन तड़के-तड़क 5 बजे आली पकड़ कै नै शहर कैन्ही हो लिया नु सोच कै नै अक ये गाम आले तो तन्नै नु ए चिढ़ावैंगे, शहर मैं कोई इसी बात ना करै। तो वो खरखोदा आ ग्या अर काम-धंधे की तलाश मैं लाग ग्या। नौकरी करण ताहीं एक सेठ धोरै पहुंच ग्या। सेठ की जीरी की आढ़त थी।
बोल्या-"सेठ नौकरी करूंगा।"
सेठ बोल्या-"बढ़िया बात सै। बता के करैगा? कंप्यूटर जाणै सै?"
जाट बोल्या 'ना'।
सेठ नै पुछ्या-"गाड़ी-घोड़ा चलाणा जाने सै?"
जाट बोल्या 'ना'।
सेठ-"फेर रोटी-राटी बणानी जाणै सै?"
जाट बोल्या 'ना'।
सारी बातां पै'ना, ना' करते देख सेठ कै उठ्या छो। उसकी आंख्यां कैन्ही देखदा होया बोल्या-"फेर के झकोई तन्नै गोदाम मैं मुस्से पकड़न ताहीं राखूं?"
बोल्या-"सेठ नौकरी करूंगा।"
सेठ बोल्या-"बढ़िया बात सै। बता के करैगा? कंप्यूटर जाणै सै?"
जाट बोल्या 'ना'।
सेठ नै पुछ्या-"गाड़ी-घोड़ा चलाणा जाने सै?"
जाट बोल्या 'ना'।
सेठ-"फेर रोटी-राटी बणानी जाणै सै?"
जाट बोल्या 'ना'।
सारी बातां पै'ना, ना' करते देख सेठ कै उठ्या छो। उसकी आंख्यां कैन्ही देखदा होया बोल्या-"फेर के झकोई तन्नै गोदाम मैं मुस्से पकड़न ताहीं राखूं?"