phoolkumar
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mere gaon mein "देख्या-ए-नी इह्सा धाय्ड मोड़णिया" ki kahawat kaise bani
सांझ का सीळआ, गाम-गमीणयाँ धमक चढ़ी जा हो,
दूर समांणयाँ धाड़ ठहर रही, कोडबै गाम ब्छोन्याँ हो|
डांगर-ढोर, धन-साधन जो ठया ज्या साह्मर ल्याणा हो,
खूनी जाळ बछ्या गाम पै, करड़ाई का साया हो|
बादळ गरजें-बिजळी कड्कें काळी घटा घुमराई हो,
गादड़-रोवें कुत्ते-कुवावें, किसकी चढ़ी करड़ाई हो|
फेर दुज्जे पहर रात की धाड़ नै तैयारी ठाई हो,
न्यडाणे नै उजाड़-ल्यावा या बैरी नै प्रणाई हो|
धाड़ चढ़ती आवे बेटा, सीन्घां माटी ठाई रे,
भावड-आळए गमे म लखा मौत नाचती आई रे|
खड्या खेत म्ह प्रहलाद सोच रह्या गाम चढ़ाई होगी हो,
घाग लूटण चढ़ आया सै-सूते गाम का के राह हो|
इन ब्य्चारा डूबे प्रहलाद कै माथे त्योड़ी छाई,
कै मरणा कै मारणा ना तै गाम-दुहाई|
सुनसान स्म्यान्याँ फेर प्रहलाद नैं चौगरदे नजर दुड़ाई,
ना दूर लग बीज माणस का, करड़ाई गहरान्दी आई|
ले नाम न्यडाणा नगरी का, प्रहलाद नै भाला ठाया,
जा बड्या-भोज्ड़ा म्ह को, गमे की राह पै नजर टकायां|
धाड़ चढ़ रही-धूळ उड़ रही, सरण दे सी भाला सरणाया,
काळ बना लिया अगड़ी-घोड़े को, धाड़ नै धक्का खाया|
डेठ टूट गया-होंसला छूट गया, काळ पै काळ चढ़ आया,
न्यडाणा सै थारी बाट म्ह-बैठा गमे की साथ म, धाड़ नै यू फ़रमाया|
बेरा कोन्या कितणे सें, या सोच धाड़ उलटे-पायां-भोड़ी,
न्यडाणे के सूरमा तैने-ऐकले नैं धाड़ मोड़ी|
घाघाँ की कड़ तोड़ी, गाम-माँ का संकट टाल्या,
धन-धन हो जामण आळी तन्नैं गाम-रुखाळआ जाया|
तेरे न्यडाणा फेर आइये हो दादा,
गा गाथा त्हारी फुल्ले-भगत की गद-गद होगी काया|
puraane jamaane mein 2 types ke gaon hua karte they ek jo ek jagah tik ke kheton mein mehnat karke khaya karte they aur ek wo jo doosre gaovon ko loota karte they.....lootne waale jab group bana ke nikalte they to usko deshi bhasha mein "Dhaad" bolte they aur ek dhaad mein 100 se 200-300 tak ghodon ki fouj hoti thi....aur aisi hi ek dhaad in dada (jinka ki is ooper ki kavita mein jikar kiya gaya hai) ne akele hi waapis moud di thi...tab se inka naam mere gaon ke itihaas mein inki veerta ke liye ye mashoor hue....aur jab bhi koi badi dheeng hankta hai to kaha jata hai ki "Dekhya e ni ihsa dhaad modniya"...
सांझ का सीळआ, गाम-गमीणयाँ धमक चढ़ी जा हो,
दूर समांणयाँ धाड़ ठहर रही, कोडबै गाम ब्छोन्याँ हो|
डांगर-ढोर, धन-साधन जो ठया ज्या साह्मर ल्याणा हो,
खूनी जाळ बछ्या गाम पै, करड़ाई का साया हो|
बादळ गरजें-बिजळी कड्कें काळी घटा घुमराई हो,
गादड़-रोवें कुत्ते-कुवावें, किसकी चढ़ी करड़ाई हो|
फेर दुज्जे पहर रात की धाड़ नै तैयारी ठाई हो,
न्यडाणे नै उजाड़-ल्यावा या बैरी नै प्रणाई हो|
धाड़ चढ़ती आवे बेटा, सीन्घां माटी ठाई रे,
भावड-आळए गमे म लखा मौत नाचती आई रे|
खड्या खेत म्ह प्रहलाद सोच रह्या गाम चढ़ाई होगी हो,
घाग लूटण चढ़ आया सै-सूते गाम का के राह हो|
इन ब्य्चारा डूबे प्रहलाद कै माथे त्योड़ी छाई,
कै मरणा कै मारणा ना तै गाम-दुहाई|
सुनसान स्म्यान्याँ फेर प्रहलाद नैं चौगरदे नजर दुड़ाई,
ना दूर लग बीज माणस का, करड़ाई गहरान्दी आई|
ले नाम न्यडाणा नगरी का, प्रहलाद नै भाला ठाया,
जा बड्या-भोज्ड़ा म्ह को, गमे की राह पै नजर टकायां|
धाड़ चढ़ रही-धूळ उड़ रही, सरण दे सी भाला सरणाया,
काळ बना लिया अगड़ी-घोड़े को, धाड़ नै धक्का खाया|
डेठ टूट गया-होंसला छूट गया, काळ पै काळ चढ़ आया,
न्यडाणा सै थारी बाट म्ह-बैठा गमे की साथ म, धाड़ नै यू फ़रमाया|
बेरा कोन्या कितणे सें, या सोच धाड़ उलटे-पायां-भोड़ी,
न्यडाणे के सूरमा तैने-ऐकले नैं धाड़ मोड़ी|
घाघाँ की कड़ तोड़ी, गाम-माँ का संकट टाल्या,
धन-धन हो जामण आळी तन्नैं गाम-रुखाळआ जाया|
तेरे न्यडाणा फेर आइये हो दादा,
गा गाथा त्हारी फुल्ले-भगत की गद-गद होगी काया|
puraane jamaane mein 2 types ke gaon hua karte they ek jo ek jagah tik ke kheton mein mehnat karke khaya karte they aur ek wo jo doosre gaovon ko loota karte they.....lootne waale jab group bana ke nikalte they to usko deshi bhasha mein "Dhaad" bolte they aur ek dhaad mein 100 se 200-300 tak ghodon ki fouj hoti thi....aur aisi hi ek dhaad in dada (jinka ki is ooper ki kavita mein jikar kiya gaya hai) ne akele hi waapis moud di thi...tab se inka naam mere gaon ke itihaas mein inki veerta ke liye ye mashoor hue....aur jab bhi koi badi dheeng hankta hai to kaha jata hai ki "Dekhya e ni ihsa dhaad modniya"...
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