माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

[h=5]"यारो सिरसा का लाणा , भिवानी का बाणा अर्र दुनिया मं मशहुर स हिसार का दाना,,
जींद का सम्ध्याना , नारनोल का न्याना , अर्र दुनिया म मशहुर स महेंद्रगढ़ का खाना,,
रोहतक की चतुराई , सोनीपत की अंगडाई , अर्र दुनिया म मशहुर स पानीपत की लड़ाई,,
करनाल का साथ , पंचकुला का पाठ अर्र दुनिया म मशहुर स चंडीगढ़ का हाथ,,
अम्बाला की चाट , कैथल की खाट , अर्र दुनिया म मशहुर स हरयाने का जाट.
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"यारो सिरसा का लाणा , भिवानी का बाणा अर्र दुनिया मं मशहुर स हिसार का दाना,,
जींद का सम्ध्याना , नारनोल का न्याना , अर्र दुनिया म मशहुर स महेंद्रगढ़ का खाना,,
रोहतक की चतुराई , सोनीपत की अंगडाई , अर्र दुनिया म मशहुर स पानीपत की लड़ाई,,
करनाल का साथ , पंचकुला का पाठ अर्र दुनिया म मशहुर स चंडीगढ़ का हाथ,,
अम्बाला की चाट , कैथल की खाट , अर्र दुनिया म मशहुर स हरयाने का जाट.

सोनीपत की चतुराई , रोहतक की अंगडाई !!!
 
"चाल ताऊ रेल्ली में"

ताऊ राम राम
राम राम भाई राम राम
ताऊ के हाल चाल सै
मैं तो ठीक सु तू सुना तेरा के ख्याल सै
चाल ताऊ तन्ने दिल्ली घुमा ल्याऊ
दिल्ल में के सै मैं तो ना जाऊ
ताऊ आज दिल्ली में रेल्ली सै
ना भाई घरा तेरी ताई अकेली सै
चाल्ले ने ताऊ ताई के किते भाज के जावेगी
भाज गी तो दिल्ली में के नयी मिल जावेगी
चाल ताऊ तन्ने सब्जी पूरी खुवाऊंगा
ना भाई तेरी ताई धोरे चूरमा बनवाऊंगा
चाल्ले ने ताऊ बैठ के जाना बैठ के आना सै
मैं ठाल्ली कोन्या मन्ने खेत बुवाना सै
ताऊ हुडे बड़े बड़े नेता आवेंगे
फेर म्हारे के टिक्का करके जावेंगे
ताऊ साँझ ने दारु का भी प्रोग्राम है
ना भाई ये रेल्ली वेल्ली ठाल्ली आदमिया के काम सै
और किस बात की रेल्ली से तू इतना जोर ला रहा से
नु तो बेरा ना ताऊ वो मंत्री जी का फोन आ रहा सै
बस भेजू सु गाम महा ते भर ल्याइए
और दो गाड्डी अपनी भी कर ल्याइए
ताऊ बोल्या क्यों इस जनता का बेवकूफ बनाओ सो
भेड़ बकरिया की तरिया भर भर ले जाओ सो
नु हे तो या सरकार काम ना करवाती
और बेरोजगारा ते रोजगार न दिवाती
अक सरे लोग काम पे लाग जावेंगे
तो इनकी रेल्लिया में कोण जावेंगे
हम ने के इनकी इसी तीसी करी सै जो रेल्ली में जावांगे
हम तो अपने खेता में हे कमावंगे
चल्ला जा ना ते तू भी जूती खावेगा
किते ना रेल्ली में जावेगा


 
जमींदार
*बड़े चाव त जिब बाबु हल बहाना सिखावे स
बड़ा राज़ी हो क लोन प 'बड़ा ट्रेक्टर ' ल्याव स
सारे गाम म खुश हो क ऐ परसाद बँटवावे स
सोच्या जी तोड़ मेहनत करूँगा अर घणा ऐ 'कर्जा 'ठावे स
अपणा पेट काट क पाल पेट देश का,या ख़ासीयत इस 'कार 'की
ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,

*जिब आव् भीजी ओड़ सी खुशबु रेता म
उठ धर्राट रात दिन चाले ट्रेक्टर खेता म
सारी धरती उथल दे कस्सी राखे हाथ में
कोय गिणती नहीं कितणी चोट आ रही स गात म
बीज गेर क जिब वो बाट देखे चुमास्याँ म फुहार की
ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,



*छोड़ सारे तीज त्यौहार खेता म ए जोत लावे स
'होली'अर 'दिवाली' बी खेता म ए मनावे स
सिलोमण प बी 'बहाण 'सारी उड़े ए पोह्ची बांध क आवे स
छुट ज्य़ा सारे 'यार दोस्त' माटी त ए 'यारी'हो जावे स
'सुसराड़' त आई 'कोथली बी खेता म ए खावे स, जिब होव कटाई जुवार की
ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,



*जाडयां म जिब रातू लोग सोवें बड़ बड़ क न सोड म
आड़ा पड़ा पानी रोक रहा वो 'रजबाहें' के जोड़ म
हो तयार जिब फसल खेता में लहलाववे स
उसके मुह प भी ख़ुशी अर लाली छावे स
कटी फसल बिगड गे भा,बिगड़या 'राम' कहानी वाहे ओल्यां आली मार गी

ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,


*सोचे बैठ्या मन्डी म वो जग का अन्नदाता किसान
तीन दिन पड़ा मन्डी म नहीं बिक्या गेहूं अर न बिका धान
टकटकी ला क देखे ऊपर दिखा कित दिखे स भगवान
एक आधी ब निभ ज्या क्यूकर निभे या कहानी बारंबार की

ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,



*बैठ गया था पुराना टयुबल उस के नए पाइप बी ल्याने थे
बालका की कापी किताब ,घराली के नए सूट सिमाणे थे
'माँ ' की नई जुती अर उसकी आंख बी बनवानी थी
अर टपके जो ओबरे आली छात बी समरवानी थी
आंख मिलावे क्यूकर किस तरियां राखे जुबान व्यव्हार की
ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,



*चाला होवे जब कोय बुड्ढा गुजरे स ,सब काज के लाडू खाना चाहव स
सौ बीघे का जमींदार इज्ज़त खातर फेर किते त कर्जा ठावे स
इब तियां उतर्य बी नहीं था कर्जा जो लिया था ब्य्हा अर भात की खातर
अगली फसल वो क्यूकर बनावेगा बस ज़ाने स उसका भीतर
सहज सहज गहने धरी ज्य़ा घर की धरती हो ज्या बाहर की

ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,



*बैंक आले काटे चक्कर अगली ब बानिये का ब्याज हो ज्या दुगना
के ओढा के पहरा भीतर ए भीतर खाव,यो दुख हो ज्य चुगना
कर्म ए मान ली पूजा पाठ,क्यूकर पढ़े गीता रामयण नहीं मिल्या कदे उसाण
अर गह्टे का बुल्हद हो ज्या स तकदीर का मारया ओड किसाण
इतणे म बी न सधे जिब बिगड़ जय़ा झोटी साठ हज़ार की
ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,



*जमींदार कह्वावे देश की शान चीर दिया जमींदार ने अपना सारा गात
मर मर क न जीवे सारि उम्र,कद कून देव उस गरीब का साथ
जब ये साहूकार कई कई सब्जी धर थाली म रोटियां गेल खावे स
क्यूकर चाले गुज़ारा उस अन्नदाता का कदे भूल क न विचार लावे स
चस चस बोले सारी नस आधी उम्र म ए हो ज्य स देह बेकार की

ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,



*लोट खाट म रोज़ साँझ क सोचे स नहीं बाड़ू छोरयाँ न जमिदारे म
क काढ़ेगे इन खुडा म मने ए नहीं मिल्या कदे सुख साँस अपने जीवन सारे म
छोडन लाग् गे जिब न्यू खेती अर मरता रहा किसान
वो दिन दूर नहीं स भाइयों जिब भूखा मरेगा यो सारा जहान
बचा ल्यो इन 'जमीदारा' न नहीं त या मरण मौत संसार की
ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की,

 
"जमींदार"
कढ़ लिया, तू पढ़ लिया,
सबकै हत्थै चढ़ लिया।

फेर भी क्यू मिटे जा सै,
मन-ए मन क्यूँ घुटे जा सै।

तन पै तेरे कमीज़ नहीं,
बोवण नै असली बीज़ नहीं।

बाबै का-सा डेरा लागै,
घर मैं तेरे कोय चीज़ नहीं।

तन भीज्या पसीने तैं तेरा,
खेत मैं टैम-सर पाणी नहीं।

बरसां तैं तू लूटता आया,
जड़ बिघन की जाणी नहीं।

सर्दी गर्मी सामण भादुआ,
सुबह-शाम तेरे साथ नहीं।

फुटकर में तेरी मेहनत का,
सही दाम तेरे हाथ नहीं।

जो तेरा इतिहास बता दे,
ऐसी कोय किताब नहीं

इकाणवें बाणवैं त्रिणावैं चुराणवैं
इनका तन्नै हिसाब नहीं।

देही का खून चूस बगाया,
ब्याज घणा अर मूल सै थोड़ा।

देस की ताकत बसै किसान मैं,
उस के होर्या गात का झोड़ा।

कित की मरोड़ रहै खिंडकै मैं,
रंगारी चास देण तै नाटैगा।

बिना पीसां के तेरे छोरे की डाकटर,
लास देण तैं नाटैगा।

खूब कमा अर ब्याज चढ़ा,
औरां नै छिका, खूद ना खा।

आज तेरे साके बेसुरे अर,
आल्हा तेरा उदास सै।

सांग पाट रह्या आज तेरा,
ना कोय तख्त कै पास सै।

दूर खेतां मैं बैठ कोय सूल्फी,
रागनी ज़हरी गावै सै।

बिष पीग्या, पर बणया ना ष्षंकर,
तेरी कोण बमलहरी गावै सै।

गूगा-नोमी बिन ढ़ोल अर तासयां की,
दीवाल़ी तेरी बिन खील पतासयां की।

होल़ी गॅाल़ के चैड़े मैं रल़गी,
तीज भी बैरण खाली टल़गी।

इब भी संभल़ ज्या, मेरी मान ज्या,
खोल आँख, भले-बुरे नै जाण ज्या।

कोय भी तेरे कॅानी ना,
तेरे तैं किमे छानी ना।

बेबसी की आग मैं और पकै ना,
इब किसे का सहारा तकै ना।

तेरा सब तैं साढ़ा सढ़ लिया,
पढ़ लिया, तू कढ़ लिया।
सबकै हत्थै चढ़ लिया।।
 
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