वर्षा
उज्जवल पल्लव तरुओं के हो जाते
जब आती है वर्षा
तो यह सकल सरोवर भर जाते
खग मृदुल कलरव करते
नभ मैं चंचलता भरते
नभ नील कमल सम खिल जाता
जीवन चिर उर पर गाता
पूर्व के निर्मल मुख पर
सूर्य रश्मियाँ बना rahi इन्दरधनुष
वह परीलोक के द्वार सा लगता
नया नया सा जग हो जाता
जाने किस अनजान देश से
यह समीर सुरभि लाता
जब जब आये यह वर्षा
निर्मल यह परिकर हो जाये जब आती है वर्षा
तो यह सकल सरोवर भर जाते
खग मृदुल कलरव करते
नभ मैं चंचलता भरते
नभ नील कमल सम खिल जाता
जीवन चिर उर पर गाता
पूर्व के निर्मल मुख पर
सूर्य रश्मियाँ बना rahi इन्दरधनुष
वह परीलोक के द्वार सा लगता
नया नया सा जग हो जाता
जाने किस अनजान देश से
यह समीर सुरभि लाता
जब जब आये यह वर्षा



