शादी की उम्र घटाओ ?

Some examples of fake allegations ....... i still remember a jain prist who committed suicide in Rajasthan and mentioned that this is the only way for me to prove my innocence ..... , i think its law and order problem and strict and unbiased law enforcement agencies can solve this problem

http://archives.digitaltoday.in/indiatoday/20040510/law.html

हूडा, चोटाला, खाप या सोनिया ने गाल बकन तें कुछ ना होवे... मेरा सोचना ते कुछ ऐसा है...

सत्तर परसेंट केस में छोरे एर छोरी दोनुआ की मिली भगत
पूर्ण या आंशिक सहमति हो स.....कई कारण सें:

१. छोरा छोरी आपस में कुछ गड़बड़ करते पकडे गए ( जो की कई दिन तें चाल री थी) ... उन ने पकड़न आला भी शामिल हो गया कुकरम में.... छोरी ने फेर सोची की सब ने बेरा पाटेगा चक्कर का... तो रेप का इल्जाम रोप दिया सब पे.... ( एब सोचो इस में गलती तो लड़की की भी स... एर लड़के की भी)
२. लड़की का प्रेम प्रसंग हो एक लड़के गेल -- एर लड़का अपने यार दोस्ता की भेंट चढ़ा दे उस ने ... सिर्फ दोस्तां ने राजी कारन खातिर. ( लड़की ने भरोसा करा.... एर लड़के ने नहीं निभाया )
२. छोरी घणी इ बदनाम स एर सब ने बेरा स......... एर ग्रीन सिग्नल देख कै लंग्वाड़े बेकाबू हो गए.. एर कुकरम कर दिया (एब सोचो इस में गलती तो लड़की की भी स.)
३. बेक़सूर लड़की - गलत टाइम एर अकेली हो ( बेचारी के करे.....)
४. घर आले जागरूक ना हों... एर न्यू इ ना बेरा हो आक थारा बालक कित स... कित आवे स कित जावे स.... उसका आचरण तो नहीं बदल रह्या आजकाल....गुमसुम तो नहीं रह स......... माँ बाप ने ये चीज़ बहुत बारीकी तें सोचनी चाहियें !

एर गामा का माहौल बहुत खराब हो रा स.... ये रेप की खबर तो समुन्द्र में बूँद के बराबर सें..... हज़ारों केस तो दब्ब ज्यां सें.....

मैं तो न्यू कहूँगा की माँ बाप की पूरी जिम्मेवारी बनती है की :
(ये बातें लड़के और लड़की दोनों के लिए लागू हैं )
१ - अपने बालकां ने संस्कार बढ़िया दयो. "लीड by एग्जाम्पल "! माँ बाप पहले teacher हैं |
२. - उनको दोस्तों की तरह treat करो - खासकर जब उनकी उम्र १२-१३ साल से उपर हो जाए |
३. बच्चों के आने जाने - बर्ताव आदि पे नजर रखो. उनके दोस्तों के बारे में पता करो.. उनके साथ बैठ कर पूछो - उनको guide करो सेक्सुअल abuse के बारे में....... सावधान रहने को कहो......|
4.
एर अपनी छोरियां ने आत्मविश्वास दयो...... सोच के देखो .... गीता बलाली जीसी छोरी कानी कोए देख भी ले तो उस ने ठा के धूं नहीं पटक देगी..... इतना आत्म विश्वास भरो अपने बालकान में..... उन ने प्रेरित करो..... गलत काम वही करता है जिस के पास जिन्दगी में कोई aim नहीं होता...
 
Iske alawa aajkal ek aur rog pa raha hai ladki aur ghar walo ko, nakli dahej ke case karne ka.

Some examples of fake allegations ....... i still remember a jain prist who committed suicide in Rajasthan and mentioned that this is the only way for me to prove my innocence ..... , i think its law and order problem and strict and unbiased law enforcement agencies can solve this problem

http://archives.digitaltoday.in/indiatoday/20040510/law.html
 
Why the hell is media poking holes around Khaps and Opposition? What about insensitive statement of Sonia Gandhi? This is matter of law and order. Primary responsibility of citizens's security lies with Hooda and congress government. If congress feels some khap leaders and opposition leaders are responsible for present situation, then, file FIR against them. Nobody can be above law of the land.

If Hooda can't to that, he should quit; else must be shacked by central government. Haryana is going in wrong direction as mentioned by Dr. Karminder in one his posts. We need few leaders who can think beyond vote bank politics.


Because the so-called "Khaps" are giving a chance to Media to poke holes around it by issuing silly statements. Khap which, upto a certain stage of social evolution, used to represent a majority opinion have become a passe and the present Khaps have been reduced to just a bunch of semi-literate and self-styled leaders who cannot be accepted as the final authority to define the social mores and traditions. Suitable changes in value system and life-style are essential to keep pace with the changing world. Who elects these khaps, what is their constitution and what should be the area of their jurisdiction? We cannot afford to assume sanctimonious postures towards such defunct and ineffective group of people who are not the true representatives of the masses. Instead of prescribing a cure for the ailment, they are advising the people not to fall ill.

In a democratic dispensation of things, media is free to report on any matter. However, people have every right to rebut the misrepresentation of facts and insinuations. But, the so-called Khaps are not taking that recourse. Simply denouncing media day in and day out is not going to refurbish our sullied image. Advise the khaps to refrain from antics which are bringing a bad name to the community. If you people have logical arguments, please come forward and issue rebuttals in press and social media.
 
Last edited:
rekha/smriti..

mera ek dost ka papa hai , retired judge...wo batave tha ki dahej ke itne jhuthe case aavey hain ki puchho mat...wo becharey sabuta ke hisab te fainsla deve hain...jabki kai jagah anumaan hotey hue ki ladki wale jhutha case kar rahe hain..this is worst part of dahej case...jine use karna hai , un ne bera na...baki jo use karey hain dahej case ka , unka koi matlab na hota dahej te...
Hmmmmm

Kinda agree-----whats the %ge of cases

u must have heard----gehun ke stah ghunn pi pista hai
 
शादी की उम्र घटाओ ??

हम्बे.. घटा दी...अर्र फेर???

घटाया पाछ्चे ... ये बीर बान्नी बालक तावले जामेंगे.....स्वाद स्वाद में ब्योंत ते फ़ालतू इ जामेंगे (पराने जमान्ने आले बुढया की ढाला :boxing:)... वे फेर तावले गाभरू होंगे... ज्यादा तादाद बढेगी छोरया की :victorious: ....( छोरी तो इन ने जामनी नहीं).... इन नए फालतू/बाध जम्मे होड़ छोरया खात्तर छोरिया का और टोटा होगा.:(.. फेर उन फ़ालतू होया ने किस के ब्याहोगे ?:stupid:

नतीजा: छेड़खानी और बढ़ेगी... रेप और बढ़ेंगे....:mad:

कोए खाप अल सुनता हो तो समझियो ... :boxing:
 
सरासर गलत फैसला उल्टा बाल विवाह की तरफ कदम ....ये अपने बुडले भी धूमें के नशे म कुछे हो कह दे ह उधारण भी मुगला के देंन लाग लिये ये ... असल म त छोरी न होंन ना देते ...हो जा गलती त ..तो बेचारी न तावली त तावली विदाई देंन के चकर म रह स.... अपने घर त डीगाओ आगला आप संभाले गा !!! सतिंदर भाई आली बात स कोई खाप आला ताऊ सुनता होते एक सही फैसला दे दो ...ताकि हम भी आपके समर्थन म खडे हो सके .... !!!
 
खाप आले खा पी के सो बी लिए ,थम हाड रतजगा कर रे सो...

ये ते इब सुधे तडके उठंगे, अर्र फेर होके की घूंट मारते मारते किम्मे नया छपवावंगे...इनके तमाखू में मिर्च मारनी पड़ेंगी.
..
 
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इस फैसले मे सभी खापे शामिल नहीं थी इसमे खापों की तरफ से सिर्फ महम चौबीसी के चौधरी रणधीर सिंह थे बाकी के सब स्वयंभू खाप प्रधान थे व सभी एक ही राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं , और आज चौधरी रणधीर सिंह ने भी इस फैसले से किनारा कर लिया | जहा तक़ मेरी सोच हैं तो असल मे इस फैसले के पीछे सोच कुछ और थी जो की पूरी नहीं हो पाई , इस फैसले मे कांग्रेस राज की तुलना मुग़ल काल से करने की थी पर मीडिया ने इनके कम उम्र वाले फैसले को पकड़ लिया | इसी कारण आज चौटाला को भी अपना ब्यान वापिस लेना पड़ा |
 
राका भाई सुन ने में तो आया है कुछ ऐसा ही जैसा आप बोल रहे हैं..किसी एक खाप ने ये गड़बड़ करी से..
चलो बढ़िया ए बात से अक सारे एक जिसे कोन्या, नाते नाश उठ ज्या..
 
Because the so-called "Khaps" are giving a chance to Media to poke holes around it by issuing silly statements. Khap which, upto a certain stage of social evolution, used to represent a majority opinion have become a passe and the present Khaps have been reduced to just a bunch of semi-literate and self-styled leaders who cannot be accepted as the final authority to define the social mores and traditions. Suitable changes in value system and life-style are essential to keep pace with the changing world. Who elects these khaps, what is their constitution and what should be the area of their jurisdiction? We cannot afford to assume sanctimonious postures towards such defunct and ineffective group of people who are not the true representatives of the masses. Instead of prescribing a cure for the ailment, they are advising the people not to fall ill.

In a democratic dispensation of things, media is free to report on any matter. However, people have every right to rebut the misrepresentation of facts and insinuations. But, the so-called Khaps are not taking that recourse. Simply denouncing media day in and day out is not going to refurbish our sullied image. Advise the khaps to refrain from antics which are bringing a bad name to the community. If you people have logical arguments, please come forward and issue rebuttals in press and social media.

I second your views on Khaps. My point was pro-congress media is trying to divert attention from Hooda and congress by highlighting khaps and/or opposition statements only whereas primary responsibility to deal the situation lies with government. Government can go after some khaps leaders if they did something illegal. Nowhere in the post I intended to defend Khap leader's stupid idea.
 
खाप का मतलब ही है collective decision ---- और जब लोग सामूहिक तौर पे विचार कर के फैसला करते हैं तो उस फैसले के गलत होने के chances बहुत कम होते हैं.....



कई बूढ्ले - या टीवी चैनल आल्याँ की तूतरी देख कै, आपा खो दें सें.....बाकी खाप की मंशा कभी गलत नहीं होती...

जैसा की किसी ने सही कहा है.... मीडिया को संभालने के लिए हर खाप के पास समझदार व्यक्ति होने चाहिए .... ये बूढ्ले कई बै गोसे से पाथ दें सें... एर बदनाम फेर जाट एर उनकी खाप ...

इस भांड मीडिया और कुलदीप बिश्नोई जैसों की साजिश को समझो जो की इस सामाजिक ताने बाने को तोडना चाहते हैं.... एर एक बात और बता दयूं, जिस दिन ये खाप एर पंचायत की शर्म चली गयी, उस दिन पाछे ये बालक गाम में इ ब्याह करेंगे.... एर गाम के इ भाती होया करेंगे.... ज्युकर ये रफूजी करें सें.....एर प्रवीण ने बताया... ये TV aale कांग्रेस को बचा रहे हैं खाप खाप खाप खाप कर कै .... समझ जाओ थम बात नै .....
 
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I second your views on Khaps. My point was pro-congress media is trying to divert attention from Hooda and congress by highlighting khaps and/or opposition statements only whereas primary responsibility to deal the situation lies with government. Government can go after some khaps leaders if they did something illegal. Nowhere in the post I intended to defend Khap leader's stupid idea.

I agree with you that primary responsibility to maintain law and order and decorum in the society lies with the Government and this failure should be attributed to the present establishment in Haryana. This may also be true to some extent that a section of media is pro-establishment due to obvious reasons. One of the primary reasons could be the political orientation of the Editors and Senior Journalists and the second reason could be money power. But you would agree that media is indispensable. Media has a positive side too. Therefore, we have to have an effective and positive media at our disposal which might help in handling such matters with finesse. Random statements by people who lack conversational and communications skills is bound to portray a grossly wrong image of our community and the social congregations. There is no denying the fact that unity manifested through a solid forum is a must to counter the onslaughts on our cultural heritage and value system, but the representation should be true, democratic and competent.
 
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खाप का मतलब ही है collective decision ---- और जब लोग सामूहिक तौर पे विचार कर के फैसला करते हैं तो उस फैसले के गलत होने के chances बहुत कम होते हैं.....



कई बूढ्ले - या टीवी चैनल आल्याँ की तूतरी देख कै, आपा खो दें सें.....बाकी खाप की मंशा कभी गलत नहीं होती...

जैसा की किसी ने सही कहा है.... मीडिया को संभालने के लिए हर खाप के पास समझदार व्यक्ति होने चाहिए .... ये बूढ्ले कई बै गोसे से पाथ दें सें... एर बदनाम फेर जाट एर उनकी खाप ...

इस भांड मीडिया और कुलदीप बिश्नोई जैसों की साजिश को समझो जो की इस सामाजिक ताने बाने को तोडना चाहते हैं.... एर एक बात और बता दयूं, जिस दिन ये खाप एर पंचायत की शर्म चली गयी, उस दिन पाछे ये बालक गाम में इ ब्याह करेंगे.... एर गाम के इ भाती होया करेंगे.... ज्युकर ये रफूजी करें सें.....एर प्रवीण ने बताया... ये TV aale कांग्रेस को बचा रहे हैं खाप खाप खाप खाप कर कै .... समझ जाओ थम बात नै .....


Haryaane me kuch bhi galat ho jao, ye media aale tap den si usne Jat vs Dalit ki chunni oodha deve se... In rape ke maamlo me kya sare jat hi shamil the? NAHI.. fir kyu un sab ka theekra hmare sir par fodne par tule hue hai?? karo koe bharo koe..
Upar se hmare bujurg non-sense type ke statement de daalte hai jis-se inko aur jyada mauka mil jata hai hume badnaam karne ka.. Ye Hooda ki tactics bhi ho sakti hai asli mudde se dhyaan bhatkaane ki... Fir bhi badnaami to hmaari hi hai.

Apni soch ko badlte hue samay ke privesh me dhaalna jaruri hai, nahi to hume yu hi badnam kar-kar ke ek din tod diya jayega. Hooda, Chautala ko sirf apni vote se matlab hai..jyaa te mhaare samhi to mhari haan me haan ar punjabi/baniye ken jaake unki haan me haan...

Sambhalna aur badlna hmaare hath me hai.. Samay hai abhi bhi.. baad me pachtaane ke sivay kuch nahi milega..
 
I found the article intriguing as to how much hi-tech SPG is and why does it protect PM, children, family of ex PMs and I believe that is what reporter wanted to convey too.

SPG expenses balloon in last decade, Rs 1,800 crore spent on 5 protectees since 2004

http://articles.economictimes.india...63419_1_protectees-spg-security-home-ministry

Gandhi family's special protection costing nation a fortune !!

Rs 1800 crore spent on 5 protectees since 2004. Out of these five, three are from Gandhi family(Sonia, Rahul and Priyanka).

All the hard earned tax payers money get wasted by providing security to this family.
 
http://www.ndtv.com/video/player/prime-time/video-story/250341?hp&livevideo-featured

Waise to main Ravish ko acha reporter samajta hu par is discussion main mujhe nirasha hui. Ravish ne na sirf ek buzurg ko na bolne ka mouka dia par Ranjana Kumari ko unke upar unchi awaaz kar ke haavi hone ka mauka dia. Ab agar aise meina age se khap se koi aana band kar de to aur baat banayenge.

Kam se kam koi show pe aata hai to use baat puri rakhne ka mauka dena chaiye.

खाप का मतलब ही है collective decision ---- और जब लोग सामूहिक तौर पे विचार कर के फैसला करते हैं तो उस फैसले के गलत होने के chances बहुत कम होते हैं.....



कई बूढ्ले - या टीवी चैनल आल्याँ की तूतरी देख कै, आपा खो दें सें.....बाकी खाप की मंशा कभी गलत नहीं होती...

जैसा की किसी ने सही कहा है.... मीडिया को संभालने के लिए हर खाप के पास समझदार व्यक्ति होने चाहिए .... ये बूढ्ले कई बै गोसे से पाथ दें सें... एर बदनाम फेर जाट एर उनकी खाप ...

इस भांड मीडिया और कुलदीप बिश्नोई जैसों की साजिश को समझो जो की इस सामाजिक ताने बाने को तोडना चाहते हैं.... एर एक बात और बता दयूं, जिस दिन ये खाप एर पंचायत की शर्म चली गयी, उस दिन पाछे ये बालक गाम में इ ब्याह करेंगे.... एर गाम के इ भाती होया करेंगे.... ज्युकर ये रफूजी करें सें.....एर प्रवीण ने बताया... ये TV aale कांग्रेस को बचा रहे हैं खाप खाप खाप खाप कर कै .... समझ जाओ थम बात नै .....
 
रविश ... वो बिहारी टोन आला के ? तेरे भी "टेस्ट" क के हो गया विकास.... निरा पोलिटिक्स खेला करे वो..

http://www.ndtv.com/video/player/prime-time/video-story/250341?hp&livevideo-featured

Waise to main Ravish ko acha reporter samajta hu par is discussion main mujhe nirasha hui. Ravish ne na sirf ek buzurg ko na bolne ka mouka dia par Ranjana Kumari ko unke upar unchi awaaz kar ke haavi hone ka mauka dia. Ab agar aise meina age se khap se koi aana band kar de to aur baat banayenge.

Kam se kam koi show pe aata hai to use baat puri rakhne ka mauka dena chaiye.
 
बलात्कार अर ख्यन्डदा समाज - Part 1

इस मुद्दे की तळी म्ह जाण तें पहल्यां एक बात कह द्यूं अक बलात्कारी, व्यभिचारी अर दुराचारी की कोए ज्यात-धर्म निः होंदा| ना तो उस अयंदर द्योता नैं कोए ठीक ठहरान्दा जिसनें गौतम की अहिल्या गैल्यां धोखे तें व्यभिचार करया अर फेर सजा भी मली तो अहिल्याँ नैं, ओ अयंदर तो आज भी द्योता ए बणा कें पूज्या जा सै| उसकी पूजा का आज भी कोई धर्म का ठेकेदार बरोध न करदा अर धर्म जिह्से मामलां म ज्यब अयंदर बर्गे आज़ाद घूम सकें सें अर ऊपर तें आपणी पूज्जा भी करवा रे सें तो आज के कलजुग म आम आदमी की के पूछ? लखणिये नैं तो ग्रन्था म्ह ब्रह्मा जी पै भी आंगळी ठा दी थी अक उसकी भी आपणी बेटी पै नीत खराब होगी थी, तो कहण की बात या सै अक हरियाणे म जो ताज्जे बलात्कार के मामले उभरे सें उन्ने जातिगत रंग दें कें, कै तो कोए आपणी राजनीती की रोटी सेंकणा चाहवै सै अर के फेर कोए ब्योपारी म्हारे समाजिक ढाँचे ने उजाड़ कें आड़े आपणा ब्योपार फलाणा चाहवै सै|

अर ऊपर तें खाप्पाँ गेल जुल्म यो अक "घुन्नयाँ नैं खो दिए गाम अर उत्ताँ के नाम बदनाम"| मैं खाप्पाँ नैं असवेंधानिक (जो की सर्फ खाप-ए-नी ब्लय्क हर मंदर-म्सज्यद-ग्रुद्वारा-चर्च-डेरे-मठ असवेंधानिक सें) करार दे, बैन करण की वकालत करणियां नैं, न्यूं पूछना चाहूँ सुं अक क्यूँ निः आज लग किसे मंदर चै धर्माधिकारी नें, इस चीज का फरमान सुणाया अक अयंदर (इंद्र) द्योता तो वहसी-दरिंदा लयकडा, जो दूसरयाँ की बीर-बानियाँ नें च्योड़े म खराब करदा हांडया करदा| ज्यांते उसकी कोए पूज्जा निः करैगा अर हामें आज तें उसका द्योता आळआ पद भी उस्तें छीन ल्यां सां| अर ना हे उन गौतम ऋषि नें अपनी अक्ल द्य्खाई, अक तरी लुगाई का इसमें के दोष, इसनें क्यूँ पाथर बणन की सजा दे, असली दोषी का क्यूँ निः किमें करया? के आड़े निः गौतम ऋषि की मानसिकता म्ह मर्द नें बचाण की झलक दिखी? हो सके सै इसे बात पै ओ अय्न्द्र खुल्ला सांड छोड़ दिया | उस अय्न्द्र का क्यूँ नहीं फरमान सुनवाया अक ले भाई आज तें तेरा स्वर्ग का अधिकारी होण का किरदार सदा खात्तर ख़त्म अर तू इसे पल पाथर हो ज्या| अरे जिस समाज म्ह इह्से-इह्से पापियाँ नैं पाप करण बाद भी द्योता बने रहण का सरंक्षण म्यल्दा आया हो तो उसके आम आदमी तैं नारी नें बरोबर मानण की के उम्मीद?के कदे किसी नें सोच्या सै अक ताहम जिस स्वर्ग म्ह जाण बाबत सारी उम्र बाट जोहें जाओ सो उस स्वर्ग का सबतें बड्डा करता-धर्ता यो अयंदर-ए सै जिसकी ऊपर काहणी सुणाई| भाई जै किमें बदलणा सै तो पहल्यां धर्म के मानदंड बदलो, महिमामंडित कूण हो अर कूण नहीं उसपै सोचो, पूजनीय कूण हो अर कूण नहीं उसपै सोचो, जयब जा कें बीर के प्रति समाज की मानसिकता बदलैगी|

मेरे ह्य्साब तें बलात्कारी का माणस-बीर के भेद-भाव तें कोए लेणा-देणा कोनी, क्यूंकि इह्सा होता तो फेर सारा समाज डांगर होंदा अर कुन्ब्यां म्ह रय्स्ते नाम की कोए चीज ना होंदी| बलात्कारी एक दुष्ट कलंकित ज्न्योर तें फ़ालतू किमें निः हो सकदा अर द्योता तो क्युकरे भी निः| मेरे ह्य्साब तें तो आज के माहौल में जो गड़बड़ हो रीह सें इनके कुछ कारण न्यूं सें:
  1. आरक्षण नें लील लिया घंखरया का चैन: आरक्षण के कारण घणे लम्बर ल्याणिये कुंगर नै ज्यब नौकरी ना म्यल पांदी तो उसनें छोरी यानी बहु भी कित-तें होगी अर उसपै भी ज्यब छोरियां का पहल्यां तें ए तोड़ा हो तो काम और भी टेढ़ा| तो एक तो रोजगार ना मयलण का मलाल अर उप्पर तें फेर ब्याह ना होण की मजबूरी अर ना सरकार-समाज इह्से बाळकां की सुध लयंदा तो वें गहरे मानसिक तनाव म्ह घ्यर कें कुंठित मानसिकता के श्य्कार हो ज्यां सें| अर फेर वें अपराध की ओड़ हो लें सें फेर ओ अपराध समाज में चोरी करण का हो, डाका मारण का चाहे जारी म्ह पड़ण का|
  2. जातिगत कनूनां नैं खा लिया समाज का भाईचारा तो: एक यो दूसरी बोट की राजनीति की उपज| जातिगत कनून ज्युकर SC/ST एक्ट, पह्ल्ड़े जम्मान्ने में एक-दुसरे के दुःख-सुख म्ह जो एक आध दूसरी जाति आळआ गेल खड्या पाया करदा इब इसके कारण वें भी साथ खड़े ना दिख्दे| तो समाज तो दो फाड़ इन कानूनां नैं ए कर दिया| जुणसे मदद कर सकें थे वें इब न्यूं कह दे सें अक इनके तै स्पेशल कानून बण रे सें, ले ल्यो मदद उड़े तें| अर कै फेर इस SC/ST एक्ट का सहारा ले जो समाज म्ह उलटे काम करण लाग-गे सें, उन्तें गुस्से के कारण कोए साथ ना देणा चाहन्दा|
  3. सींग प्य्न रे सें इबी भी खापाँ पै: बताओ खाप कुणसी कुंडली खोलें बेठी सें किसे की खात्तर| बल्या "आपणी रहियां नैं कोय्न रोंदी, जेठ की गइयां नैं रोऊ सुं", रै मीडिया आळए मुर्खो, चैन लेण द्योगे इन्नें? अक इनका दोष यु हे सै अक ब्याह की खात्तर उम्र घटाण का मुद्दा खाप्पाँ नें ठा दिया? अर बस इब के सै चढ़ ज्याओ इनके सयर पै| ताह्मे सदा तें द्य्शाहीन थे अर द्य्शाहीन रहोगे| सर्फ वें बात ठा सको सो जो ताह्मने धंधा दे दे, समाज के सरोकार तें ताह्म्नें कोए लेणा-देणा निः| याहे बात किसी शहरी कै अंग्रेजी बाबू नैं ठा दी होंदी ना, तो ताह्मे उसनें सयर पै धर कें नाच्दे हाँडो अर| याहे तो सोच उस टेम थी जिस कारण देश नैं 1000 साल्लां की गुलाम्मी झेली अर याहे ताहरी इब सै, नहीं तो ताह्मने के बेरा कोनी अक फेशन तें ले, खाण-पीण तक, ओढ़ण तें पहरण लग, बोलण तें ले चालण ताहीं हर मोड़ पै जिनकी नकल करी जांदी हो, उन देशां म्ह जा कें लोग बसण नें मरदे फ्यरदे होँ, उनके ओह्ड़े भी तो 16 साल सै छोरे-छोरी के ब्याह की उम्र? तो इस्पै जै, खापाँ नें या सलाह धर दी तो के बिजळी पड़गी अक देश भाज के जाण नें हो रह्या सै? अर जो मैं झूठी फेंकता होँ तो ले यू लिंक पढ़ ल्यो, जै इस्पै अमरीका तें ले, इंग्लैंड, कनाडा तें ले यूरोप, जिननें के हम भारत आळए आपणी ज्य्न्दगी के हर ह्य्स्से म्ह नकल करण नें उतारू होए रह सें, सारयां म्ह ब्याह की उम्र जिसमें जै माँ-बाप राजी होँ तो 16 साल सै| इब कोए आमिर खान बरगा तो मेरे धोरे न्यूं बात ले कें आइयों न अक हम भारत म्ह रह सें अमरीका-इंग्लैंड म्ह नहीं| क्यूंकि कोए सा भी इह्सा नी पावेगा जो न्यूं कह दे अक मैं अति-शुद्ध भारतीय सुं अर खाना भी देशी खाऊं सू, ओह्धू-पहरू भी देशी सुं अर भाई तेरी ढाळ आपणी देशी म्ह बात करण नें आपणी श्यान भी मान्नू सू|
 
बलात्कार अर ख्यन्डदा समाज - Part 2

  1. अर फेर खाप्पां नें तरली उम्र धरण की बात कही सै उपरली की नहीं| ना तै इसतें बाल-विवाह बढ़णे ना घटणे क्यूँ अक जिननें करणे सें वें तो आज भी करण लाग रेह सें, पर हां जै कोए न्यू कहवे अक कतिये प्रयांत म्ह बैठा कें सगा ल्याओ तो या तो कटी बेहुदी बात सै| मेरै तो उस आपणी दक्षिण भारतीय तारिका का ब्यान भी याद आवै सै जिसनें कही थी अक आज के जम्मान्ने म्ह कोए कुंवारी लड़की तें ब्याह होगा, इह्सी उम्मीद भी ना करियो, मिल ज्या किसे नैं तो उसके भाग| क्यूँ के आज हालात वें हो रहे सें अक 80% तें घणे बाळक तो पहला सेक्स अनुभव 16 तो के 14-15 साल के होंदे ले लें सें अर शहरां म्ह अगाऊ कही जाण आळी जातियां म्ह तो यु आंकड़ा सबतें घणा सै| तो जै इस ह्य्साब तें देख्या जा तो खाप नैं या सलाह दे भी दी तो के गलत कर दी| एक ह्य्साब तें मर्जी तें सेक्स करण आळए बाळकां नें तो आज़ादी ए मिलेगी| पर शायद लोगाँ नें या आजादी आखर ज्या क्यूँ अक या आज़ादी आई तो खाप की पहल तें आवेगी|
  2. खाप की मान्नै कूण सै?: ज्यब उस भाई ताहीं मैंने ऊपरले पहरे की बात बताई तो झुंझळआट म उसने और तो किमें उत्तर सूझ्या नी पड़दा-ए न्यू करे अक बल्या खाप की मान्नै कूण सै? तो भाई मैं न्यूं कहूँ सू ज्यब खाप की कोए मानदा ए ना तो उनकी कही बातां पै यू बवाल किस बात का? ब्लय्क जुणसे मान्नै सें वें तो किमें कहंदे भी निः, तो इन दुसरया के पेटा का पाणी क्यूँ गुड-गुड हो ज्या सै? पर कुछ भी था, उस भाई की बात म्ह सच्चाई जरूर थी, चाहे ओ अनजाणे म्ह ए कहगया हो अक खाप्पाँ की मान्नै कूण सै, ना तो कोए इनके हर साल पास होण आळए "दहेज़ न ल्यो न दयो" के प्रस्ताव नैं मानदा अर ना कोए "ब्याह शादी म्ह खर्चा कम करो" आळी बात का रुखाळी पांदा, के होग्या जै एक आधा छिद्दा-छिद्दा कोए दिख ज्यंदा हो इन्नें मानदा| पर इनकी लांगड़ खींचण नैं जिसनें देखो ओहे सयन्गर ले सै|

    राम भली करे अक इन मीडिया आळया नें थोड़ी अक्ल दे अर यें मीडिया आळए ब्योपार के चक्करा म ना पड़, सही म्ह समाज नें जोड़न का काम करें अर जिस जोश तें खाप्पाँ नैं तोड़ण में हांगा लावें सें जै उसे जोश तें खाप्पाँ के समाजिक ह्यत के प्र्स्तावां नें भी लागू करवाण म्ह प्रचार करव्वावें तो जरूर तें जरूर समाज तें बीर-मर्द की असमानता कम भी हो सके सै अर ख़त्म भी|
  3. एक नया मुद्दा पैतृक-सम्पत्ति के बंटवारे का: इस मुद्दे पै तो वा कहावत हो रही सै, "अक भगत सिंह सबनें चहिये पर उनके घर निः पड़ोसियां के घर"| इह्सी शायद ए कोए NGO/Woman Organization हो जिसनें यू मुद्दा निः ठाया हो अक गाम्मां म्ह बीर-मर्द नें पैतृक सम्पत्ति पै बरोबर का हक़ दयो| अर यें सारे शहरां म्ह बेठ कें बत्ते मारें सें| इनतें एक सवाल कर दयो अक गाम्मा की तो देखि जागी, इन शहरां म्ह कितने मर्द, भाई, प्यता, पति इह्से सें, जिन्नें आपणे ब्योपार, मकान-कोठी-बंगले-प्लाट-फ्लैट, दुकान-फेक्ट्री आपणी बेबे, बेटी, लुगाई ताहीं बरोबर का ह्य्स्सा दे राख्य सै? इस सवाल पै जै इन्नें कोए-से-नैं भी सांस भी आ ले तो? भाई बात इह्सी सै जो बदलाव समाज म्ह देखना चाह्वो सो उसकी शुरुआत घर तें करो तो जाणु| अर जो कोए उछळदा होया धोंस जमाण का मारया एक-दो उदहारण था भी ल्यावैगा तो इह्से एक-दो तो मैं मेरे गाम म्ह तें भी द्य्ख्या द्यूंगा| ताह्मे तो न्यूं चाह्वो सो अक पहलम वें बदलें फेर हाम्मे, पर हां उन्नें बदलण का मोड़ म्हारे सयर पै धरया ज्या| अर हाम्नें कोए आ कें न्यूं नी कहवे अक वें तो गाम्मा म्ह सें ताहरे तें कम पढ़े-ल्य्खे, कम कनून जाणणिये, सो वें तो ज्यब करेंगे ज्यब देखांगे पह्ल्य्म शहरां म्ह तें क्यूँ न शरुआत करी जा औरतां नें यू अधिकार देण की?आडै मैं या बात जरूर कह द्यूं अक या चीज लागू तो सारे होणी चहिये पर उन "थोथे थूक ब्य्लोनियाँ के हाथ निः" जो आपणे आसपास झान्क्दे निः अर यू समाज सुधार का ठीकरा फोडन नें अर बड्डी-बड्डी ग्रांट डकारण गाम जरूर दिख ज्यां सें| अर फेर वाहे काह्णी हो ज्या सै अक "हिरै-फिरै गादडी अर गाजरां म्ह को राह", इन साम्मण के आंध्यां नें खाप फेर भी ब्य्शराणी| बीबीपुर म्ह पंचात तो होई कन्या-भ्रूण हत्या के मुद्दे पै, पर बिश्राह्निये बोले अक सम्पत्ति के मुद्दे पै बात निः करी| अरे जुणसे मुद्दे पै पंचात हो रही सै उसनें तो पूरा हो लयण दयो| उनकी ऊपर न्यूं टूट कें पड़ण नैं हो रहे जाणू तो अक बस गाम ए बच रे सें जड़े यू कनून लाग्गू निः होया बाकी शहरां म्ह तो सारी सम्पत्ति बरोबर की बाँट रीह सै|
ध्यान देण की बात: पैतृक-सम्पत्ति मुद्दे पै ल्यखण का मेरा मकसद इनं NGO अर इन्हें की ढाळ के समाज के दुसरे ठेकेदारां के दोगले रव्वये अर चेहरे द्य्खाण का था, जिननें के समाज-सुधार के नाम पै सर्फ गाम दिखें फेर खुद बेशक आपणे घर म्ह भी इस बात नें लागू ना कर रे हों|

ब्यशेष: हरियाणवी क्य्सान जमींदारा म्ह पराणे जम्मान्ने म्ह जमीन नें बाँटण के बड़े सिधाए होए क़ानून होया करदे, जो आज टूटगे अर माणस के लोभी मन नें तोड़ दिए| इन कनूनां म्ह बेटे-बेटी का बरोबार ख्याल राख्या गया था| मेरी इनपे रिसर्च चाल रही सै अर पूरी रिसर्च होंदे, इस साईट पै ताहरे स्यह्मी ल्याऊंगा| फ्य्लहाल तो मैं न्यूं देखणा चाहूँ सुं अक जिस समाज म्ह ब्याह के टेम औरत की डोली उठण का ब्य्धान धार्मिक ग्रन्था लग म्ह लख्या हो उस कानून म्ह तडके जै बीर-मर्द की शत-प्रतिशत बरोबरी ल्याणी हो तो फेर एकली सम्पत्ति के बंटवारे तें आ ज्यागी अक उस्तें आग्गे भी किम्मे और करना पड़ेगा, ज्युकर:

१) डोली बीर की ए क्यूँ उठै?
२) बीर ए मर्द के घरां जा कें क्यूँ बसे?
३) बीर नें मर्द का गोत क्यूँ धारण करणा पडे?
४) जै छोरे माम्याँ कै जा कें बसण लाग्गे तो उनके भात, उसके माम्मे उसके बाब्बू के गाम म्ह भरण आवेंगे अक माँ के ए गाम म्ह? अर जै माँ के गाम म्ह ए जावेंगे तो फेर एक बीर आपणे-ए-पीहर म्ह आपणे भाईयाँ नैं पाटडे पै क्यूकर म्यन सके सै? इह्से और भी भतेरे सवाल उठेंगे जिनपै हो सकै सै अक सर्फ समाजिक-ए-नी धार्मिक लोग भी मजबूर होवेंगे आपणे धर्म की व्याख्या बदलण पै| तै मेरे ख्याल तें तो इस मुद्दे पै भोत बड्डी बहस चहिये|

अर बड्डी बहस चहिये धर्म पै, जिसनें रामायण रही हो चाहे महाभारत, औरत सर्फ भोग की वस्तु तें फ़ालतू किमें नी द्य्खाई| राम का राज होया तो अग्निपरीक्षा लुगाई (सीता) देवेगी, रावण का राज होया तो वाहे लुगाई (सीता) अपहरण कर ल़ी जावेगी| पांडुवां का राज होया तो लुगाई (द्रोपदी) जुए म्ह हरा दी जागी, कौरवां का राज होया तो उसे लुगाई (द्रोपदी) का चीरहरण कर लिया जागा| समाज म्ह पुरुषप्रधानता-पुरुषप्रधानता पै छात्ती पीटनियां नें कदे सोची सै अक या पुरुष-प्रधानता तो ताहरी संस्कृति म्ह सै| किसे एक समाजिक-संगठन चै क्षेत्र म्ह निः ब्लय्क पूरे देश म्ह धर्म म्ह अर उस धर्म तें म्हारे खून म्ह धंसी पड़ी सै| अर जै किसी शेर के बच्चे म्ह सही द्य्षा दे समाज नैं एक करण की सीख हो तो सर्फ आपणी उद-जुलूल क़ाबलियत द्य्खान के चक्क्रां म्ह एक समूह का न्य्शाना बनाणा छोड़ दे|

क्यूंकि वें इह्से समूह सें जिन्नें देश म्ह नारी-शक्ष्या खात्तर हर दस-कोस पै गुरुकुल खोल्ले, सबतें पहल्यां ब्ध्यवा ब्याह का चलण उस जम्मान्ने तें चलाया ज्यब राज्जे-रजवाड़े भी लुगाई नें मर्द गेल सती कर दिया करदे|
 
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