श्री गोपाल दास व्यास जी द्वारा लिखी गई कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है
वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें जीवन, न रवानी है!
जो परवश होकर बहता है,
वह खून नहीं, पानी है!
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