Dayanand bhai jatland ki maryada ko dhayan me rakhte hue aapne chutkle me jo pher badal kiya bahut hi achchha laga.Maza aagaya.
एक और सुनो - हरयाणवी-हिन्दी की ’मिक्स चटनी’ ।
सास-बहू की तकरार
दोपहर का टाइम । सास अपने साल-भर के पोते को गोद में खिला रही थी । छोरा रोवण लाग्या, बंद ना हुया । बहू (छोरे की मां) ऊपर बैठी चौबारे में - अपने मीयां के साथ ।
सास ने आवाज लगाई, बहू नीचे उतर कर आई । सास बोल्ली - "कितनी हाण होगी, तन्नै सुणता कोनी छोरा रो-रो कै बावळा हो रहया ? तेरै धोरै एक-ए तै छोरा सै, यो भी ना पाळा जाता ?"
बहू बोल्ली - "मेरे तैं तै एक-ए पळैगा - चाहे आपणे नै पळवा ले, चाहे मेरे नै !!"
.