भाई, एक बै चार मौलड़ घणी दारू पी कै गाम में रात के बारह बजे पाच्छै बड़े आ-कै । सारे कत्ती धुत्त हो रहे थे । एक घर धोरै आ-कै रूका मारण लाग-गे - रणबीर, ओ रणबीर - रणबीर रै !!
रौळा सुण कै छात (छत) पर तैं एक लुगाई बोल पड़ी - "के ज्ञान हो रहया सै, हाड़ै कोन्या रणबीर - वो तै दूसरे गाम में जा रहया सै" ।
न्यूं सुण कै उन मौलड़ां म्हां तैं एक बोल्या - "तू कूण सै भिर" ? वा बोल्ली - "मैं रणबीर की बहू सूं, और कूण सूं ?"
इतना सुणना था, अर उन-म्हां तैं एक बोल्या - "ठीक सै, एक बै तळै आ-ज्या, अर आपणे नै पिछाण ले-ज्या - हम भी जा कै सोवां फिर" !!
रौळा सुण कै छात (छत) पर तैं एक लुगाई बोल पड़ी - "के ज्ञान हो रहया सै, हाड़ै कोन्या रणबीर - वो तै दूसरे गाम में जा रहया सै" ।
न्यूं सुण कै उन मौलड़ां म्हां तैं एक बोल्या - "तू कूण सै भिर" ? वा बोल्ली - "मैं रणबीर की बहू सूं, और कूण सूं ?"
इतना सुणना था, अर उन-म्हां तैं एक बोल्या - "ठीक सै, एक बै तळै आ-ज्या, अर आपणे नै पिछाण ले-ज्या - हम भी जा कै सोवां फिर" !!