52-Buddhi Bania, 53-Buddhi Jat !

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dndeswal

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52-बुद्धि बाणियां, 53-बुद्धि जाट

ऐसी कहावत है कि बनियां के पास एक नहीं, 52 दिमाग होते हैं ।

पुरानी बात है । एक जाट एक दूसरे गांव के बनिया से कभी-कभी ब्याज पर पैसे लेता था और बनियां की सूदखोरी से परेशान था । एक बार जाट की 14-15 साल की लड़की का बीमारी से देहान्त हो गया और जाट को सेठजी से कुछ और कर्ज लेना पड़ा ।

फिर हुआ यूं कि कुछ दिन बाद बनियां की लड़की, जिसका नाम “परमेसरी” था और जो लगभग उसी उम्र (14-15 साल) की थी, वो भी महामारी के कारण चल बसी । उसकी 13वीं के दिन जाट शोक प्रकट करने के लिए उस सेठ के घर चला गया ।

उस समय बनियां घर में नहीं था । सेठानी भोली-भाली थी - जाट ने उसको एक तरफ ले जा कर कहा : "सेठानी जी, मैं तो अपनी लड़की से कल स्वर्ग में मिलने गया था, वो तो अब मौज में है पर परमेसरी बेचारी परेशान है । वो कह रही थी कि वो अपने जेवर तो धरती पर ही छोड़ आई और उसकी दूसरी सहेलियां सजी-संवरी घूमती हैं - और मेरे को यह कहने लगी, कि मेरी मां से कह देना कि मेरे जेवर भिजवा दे । अगर आप उसके जेवर मुझे दे दें तो मैं अगली बार वहां उसके पास पहुंचा दूंगा" ।

बेचारी सेठानी ने जाट को जेवर दे दिये और जाट उसको राम राम कहकर अपने गांव की तरफ पैदल चलता बना ।

थोड़ी देर के बाद जब बनिया घर आया तो सेठानी ने सारा किस्सा बता दिया । बनियां समझ गया कि चौधरी तो सेठानी का उल्लू बना गया और अपनी घोड़ी पर सवार होकर उसी तरफ भागा । बनियां को घोड़ी पर आता देखकर जाट खेतों की तरफ भाग गया और एक पेड़ पर चढ़ गया । बनियां ने घोड़ी पेड़ के नीचे रोक ली और जाट से जेवर मांगे । जाट ने जवाब दिया : “सेठ जी, मैने कोई चोरी तो की नहीं है, सेठानी ने अपने आप ये जेवर मुझे दिये हैं । अगर आप इस पेड़ पर चढ़ सकते हो तो ऊपर आकर अपने जेवर ले जाओ” ।

बनियां बेचारा जोर लगाकर पेड़ पर तो चढ़ गया पर बुरी तरह थक गया । मौका देखकर जाट ने नीचे खड़ी हुई उसकी घोड़ी पर छलांग लाई और घोड़ी को लेकर भागने लगा ।

बनियां ने देख लिया कि अब तो घोड़ी भी हाथ से गई - फिर सोचा कि जाट के हाथों अपना अपमान करवाने की बजाय क्यों ना कुछ पुण्य ही कमा लिया जाये !

बनियां ने जोर से आवाज दी : "अड़ चौधड़ी - या घोड़ी परमेसरी ताहीं दे दिये और उस-तैं बता दिये कि तेरी मां नै तै जेवर भेजे सैं और बाप नै घोड़ी ।"

बाद में बनिया दूसरों को बताने लगा : बावन-बुद्धि बाणियां, तिरेपन-बुद्धि जाट !!
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ND Soudda ghadd diya uncle Ji,......Bahoot Majedaar Kisaa....

बता दिये कि तेरी मां नै तै जेवर भेजे सैं और बाप नै घोड़ी ।"

.... Baaniye ka accha ilaaj kara... :D :D :D
 
Deswal Ji...iss nai Hindi mai padh kai aur ghana maja aaya....arraaniye nai sochi akk Ghoddi tai gayi...beti aage bhala bann jaun
 
बनियां ने जोर से आवाज दी : "अड़ चौधड़ी - या घोड़ी परमेसरी ताहीं दे दिये और उस-तैं बता दिये कि तेरी मां नै तै जेवर भेजे सैं और बाप नै घोड़ी ।"

बाद में बनिया दूसरों को बताने लगा : बावन-बुद्धि बाणियां, तिरेपन-बुद्धि जाट !!

हा हा हा हा.....यू कर दिया असली तोङ ......:p किमे कह लयो अँकल आप का कोई तोङ कोनया......:D जी सा आ गया आपका यू किसा पढके

JATS ARE BEST.....BEAUTY WITH BRAINS.......;)
 
अड़ चौधड़ी
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mast kissa hai pura in the favour of baniya as well as jaat,
par aajkaal issa jamana na aha deswaal uncle ji, bina baniye ke na to banni garan aan de er aa bhi gaye to jevar ki baat to door pani bhi installment main puch gi............

baki kissa mast tha mera dada bataya karta isse kisse........
 
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Humor Forum के गाहको, मैं सच्ची बात लिख रहा हूँ - मेरे इस पोस्ट को लिखने का मकसद यही है कि अपने इस अच्छे से धागे को ताला लगने से बचा लूं । आजकल दो महीने बाद धागे पर अपने आप ही ताला लगना शुरू हो गया है । जो नहीं पढ़ सके, वे भी पढ़ लें - पिछले पेज कौन खोल कर देखता है ? :p
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Humor Forum के गाहको, मैं सच्ची बात लिख रहा हूँ - मेरे इस पोस्ट को लिखने का मकसद यही है कि अपने इस अच्छे से धागे को ताला लगने से बचा लूं । आजकल दो महीने बाद धागे पर अपने आप ही ताला लगना शुरू हो गया है । जो नहीं पढ़ सके, वे भी पढ़ लें - पिछले पेज कौन खोल कर देखता है ? :p
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Rightly said DND sir :)
 
ha ha ha Deshwal ji us jat ke kisse baeman baman-buman ne seekh lae hogi na itna chakta kaam kit soche tha jat .... ha ha par usne bhi sahi jugad bandhya baniye ka ...
 
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यह मेरा एक पुराना धागा है । सीताराम जाखड़ जी की कृपा से इस धागे का ताला खुल गया है ।

जिन्होंने नहीं पढ़ा, वे भी पढ़ लें ।

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