A Fistful Gaddar Jats

मैंने ऐसा क्या लिख दिया विक्की मोहन जी ! जो आपको ये बकवास लग रहा है? नाम से तो आप हिन्दू ही लग रहे हैं।क्या आप सनातनी/हिन्दू नहीं हैं?महान अचरज।
Rajpal ji,

Aapki posts se aisa pratit hota hai ki aap ka koi agenda hai JL par, jiske chalte aap majboor hain aisi post daalne ke liye JL par.
 
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hahaha, amusing. You gotta make your stats right, mate!

There's home work for ya. Just count the posts and threads posted by you in support of Khangress and do the same for my posts related to Modi, do the comparison afterwards, Simple!




Aap kahe to admiration hum kare to chamchagiri? You are the worst hypocrite I have ever seen.



Thank you for your admiration, you flood jatland equally if not more with your Modi sucking up posts but if only I could praise you further. Cheers, MAYTE !
 
Rajpal ji,

Aapki posts se aisa pratit hota hai ki aap ka koi agenda hai JL par, jiske chalte aap majboor hain aisi post daalne ke liye JL par.

बिलकुल सही पहचाना आपने। मेरा भी एजेंडा है जाटलैंड पर और वो है "नरेन्द्र मोदी को प्रधान मंत्री बनाना।" :victorious::victorious:
 
Kisi ne facebook pe dala hua tha , upernder ya rajpal ji( kyun aap to vaise bhi facebook se kafi copy paste karte ho ye wala na padha ho aapne) thoda jawab dena niche wali baat ka

केदारनाथ और उतराखंड मे जो हुआ उसका बहुत दुख हुआ लेकिन दिमाग़ मे एक सवाल दिमाग़ मे ही है, वो सारे लोग तो भगवान से मिलने गये थे तो तो उनकी जान भगवान ने क्यों ली कुछ सवाल हैं -
1 - एक कमजोर भगवान जो अपने आप को नही बचा पाया वो भग्तो को कैसे बचाता
2 - गंगा को अपने बालो मे रखने वाले शिव के खिलाफ क्या इसे बगावत माना जाए
3 - अब सब अंधे भ्गत सरकार को क्यों कोस रहे हैं, देवो के देव की ताक़त क्या उन्हे बचा नही पाई
4 - 33 क्रोर देवी देवता होने पर भी आप मदद क्यों माँग रहे है
5 - उन लोगो की मदद करने की बजाए अब भी कुछ अंधे लोग भगवान क सामने रो रहे हैं
6 - जो भगवान खुद को और खुद के घर को नही बचा पाया वो हम सब को क्या बचा पाएगा...
देखिए मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारे ये सब इंसान को लूटने का एक साधन है बस, और अगर कोई भगवान है तो वो इतना पापी, क्रूर और वहसी है जिसने अपने ही भ्ग्तो की जान ले ली...

तेरी माया अपरंपार, देख हम रोटी-पानी को तरसे
अमीर खुद की क्या कहे
वाह रे बम बम भोले तूने तो अपने ही ना बक्से
 

रविन्द्रजीत सिंह जी ! यदि आप हिन्दू धर्म से भिन्न जाट ही रहना चाहते हैं तो सर्वप्रथम ये हिन्दू नाम के स्थान पर कोई ऐसे नाम रखिये जो कभी सुना ही ना हो। अर्थात आपका नाम हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई एवं अन्य धर्मों से भिन्न होने चाहिए।विवाह भी हिन्दू रीति-रिवाजों से भिन्न होना चाहिए एवं अंतिम संस्कार भी भिन्न होना चाहिए।

ब्राह्मणों से मेरा कोई लेना देना नहीं है।

राजपाल जी, मेने किसी हिन्दू-विन्दु के संस्कार नहीं किये या नाम नहीं रखे हैं ,मे जट्टों की परम्परा का पालन करता हूँ ,ये भाम्ण जिनका आप अनुकरण कर रहे हो ,इन्होने उत्तरभारत में अधिकतर तीज त्यौहार जट्टों के ले कर उनको हिन्दू त्यौहार बना दिया । जट्टों के सभी त्यौहार प्रक्रति और मानव के आपसी सम्बन्धों पर आधारित हैं । किसी भगवान् या देवी देवता से इन् त्योहारों का कोई लेनादेना नहीं हे । यदि आप गौर करें तो पायेंगे की इन् भाम्णों ने , ये जहाँ भी गए वहीँ के स्थानीय वासिओं के मत के अनुसार देवी-देवता और त्यौहार खड़े कर दिए या, अपना लिए , ताकि वे आसानी से इनके कहे अनुसार चलें ,और इन् की बातों पर विशवास करने लग जाएँ ,ताकि इनकी भगवान् नामक सामान की दुकानदारी चलती रहे । जिसमे अभोतिक आस्था और विशवास ,डर की पुडिया में लपेट कर दिया जाता हे । यानी जनता के धन से मंदिर बनाओ ,उनसे ही चढ़ावा चढ़वावो ,उनको ही डर से अपना गुलाम बनाओ और नीचा दीखाओ । हींग लगे ना फिट्कड़ी ,रंग चोखा ।

में भी बीजेपी और मोदी का समर्थक हूँ ,पर हिन्दुत्व के मुद्दे पर नहीं । देशभक्ति ,विकास ,और मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर ।
 
पूजा-पाठ में मंत्र पढ़ने वाले ब्राह्मण ही क्यों होते हैं? जाटों को किसने रोका है ऐसे काम करने से?[/SIZE]

इसी ब्रहामंवाद और ब्राहमण वादी मानसिकता ने , सदीओ तक ब्राह्मणों ने सारी शिक्षा का ठेका अपने पास रखा और अन्य जातियो को नहीं पढने दिया, राजाओं को अपने चंगुल में रखा, फिर जब दिखा क्षत्रिय जाती ज़मीन में आगे बढ़ रही है तो अपने आप से त्यागी वर्ना अलग कर दी, फिर दिखा बनिए कारोबार पर हक़ जमा रहे है तो कायस्थ वर्ना अलग कर दिया


एक बार इतिहास के पन्ने उठा कर देखिये आप को सारे जवाब खुद बा खुद मिल जायेंगे
 
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में भी बीजेपी और मोदी का समर्थक हूँ ,पर हिन्दुत्व के मुद्दे पर नहीं । देशभक्ति ,विकास ,और मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर ।


क्या आप को लगता है भाजपा या कोई भी पार्टी सची मैं कोई तुष्टिकरण कर सकती है बिना पूर्ण बहुमत के जो आज के समय मैं सपने से भी परे है ? आपके लिए क्या मुद्दा ज्यादा जरुरी है, जाटो का आरक्षण या मुस्लिम तुष्टिकरण? आप जाटो के मुद्दों को ले कर सर्वोपरि और उच्च रायरखते है और मैं आप की इस बात का कायल हूँ पर भाजपा ने हरयाणा मैं जाटो के आरक्षण का विरोध किया, आप फिर भी समर्थन करते है उनका?
 
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bhai OMG dekh le kuch jawab tanne bhi mil jya ge... or kuch jawab aandh bhagti karan aalya ne bhi...

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केदारनाथ और उतराखंड मे जो हुआ उसका बहुत दुख हुआ लेकिन दिमाग़ मे एक सवाल दिमाग़ मे ही है, वो सारे लोग तो भगवान से मिलने गये थे तो तो उनकी जान भगवान ने क्यों ली कुछ सवाल हैं -
1 - एक कमजोर भगवान जो अपने आप को नही बचा पाया वो भग्तो को कैसे बचाता
2 - गंगा को अपने बालो मे रखने वाले शिव के खिलाफ क्या इसे बगावत माना जाए
3 - अब सब अंधे भ्गत सरकार को क्यों कोस रहे हैं, देवो के देव की ताक़त क्या उन्हे बचा नही पाई
4 - 33 क्रोर देवी देवता होने पर भी आप मदद क्यों माँग रहे है
5 - उन लोगो की मदद करने की बजाए अब भी कुछ अंधे लोग भगवान क सामने रो रहे हैं
6 - जो भगवान खुद को और खुद के घर को नही बचा पाया वो हम सब को क्या बचा पाएगा...
देखिए मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारे ये सब इंसान को लूटने का एक साधन है बस, और अगर कोई भगवान है तो वो इतना पापी, क्रूर और वहसी है जिसने अपने ही भ्ग्तो की जान ले ली...

तेरी माया अपरंपार, देख हम रोटी-पानी को तरसे
अमीर खुद की क्या कहे
वाह रे बम बम भोले तूने तो अपने ही ना बक्से
 
jaise tharri izzat ho rii hai sonia gandhi ke aage pooch hila hilaa ke maane isssi ni chahiye.....ibb to tere leader ne saf saaf likh diya hoga facebook pe ki sonia gandi ko vote do.....kuch din aur ruk ja haryane mai ibb jaat itne guusse mai aa jayenge ge tharre leader ne deekh ke ki wee kuch bhi kar sake hai....ibb thaaam saaree apne apne naaam ke aaage gandhi laa looo....:)

mhari ijjat ki chinta chhod kyunki tere bas ki baat koni va sambhalana apni bachaye rakh vo y bahut tere khatir. tera vo haal ho ra sai ki ghiayani billi khambha noche :) baski hai nhi kuch tere bakar maarta rehta hai.

khas baat ya bhi sai ki tu saari haan jaat ka thekdaar banane ki kosis kari ja sai ki ebb nyu howega ya ebb nyu howega lekin tere hisab tain aaj tai kuch na hoya aur na howe. Baki tera naam sandeepModi sai ki kimme aur :)
 
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केदारनाथ और उतराखंड मे जो हुआ उसका बहुत दुख हुआ लेकिन दिमाग़ मे एक सवाल दिमाग़ मे ही है, वो सारे लोग तो भगवान से मिलने गये थे तो तो उनकी जान भगवान ने क्यों ली कुछ सवाल हैं -
1 - एक कमजोर भगवान जो अपने आप को नही बचा पाया वो भग्तो को कैसे बचाता
2 - गंगा को अपने बालो मे रखने वाले शिव के खिलाफ क्या इसे बगावत माना जाए
3 - अब सब अंधे भ्गत सरकार को क्यों कोस रहे हैं, देवो के देव की ताक़त क्या उन्हे बचा नही पाई
4 - 33 क्रोर देवी देवता होने पर भी आप मदद क्यों माँग रहे है
5 - उन लोगो की मदद करने की बजाए अब भी कुछ अंधे लोग भगवान क सामने रो रहे हैं
6 - जो भगवान खुद को और खुद के घर को नही बचा पाया वो हम सब को क्या बचा पाएगा...
देखिए मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारे ये सब इंसान को लूटने का एक साधन है बस, और अगर कोई भगवान है तो वो इतना पापी, क्रूर और वहसी है जिसने अपने ही भ्ग्तो की जान ले ली...

तेरी माया अपरंपार, देख हम रोटी-पानी को तरसे
अमीर खुद की क्या कहे
वाह रे बम बम भोले तूने तो अपने ही ना बक्से


पता नहीं क्यों कुछ लोग धर्म का नाम आते ही उसे पूजा-पाठ, भगवान और धार्मिक स्थलों से जोड़ने लगते हैं। वैसे तो सब अपनी-अपनी सोच के हिसाब से अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन अगर ऐसे में मैं भी अपने विचार रख दूं तो क्या बुराई है।
शिव चाहते तो सबको बचा सकते थे बशर्ते कि यह वो समय होता, जबकि वे इस दुनिया में अपना जीवन जीने के लिए आए थे। अब तो जो शिव की मूर्ति है, वह उनके प्रशंसकों का प्रयास है उन्हें याद रखने का, उन्हें सम्मान देने का। यदि इस मूर्ति से प्रेरणा लेकर कोई लंबे समय तक तपस्या कर जाए तो वो बचेगा। दुनिया भर के बुरे काम करो और जाकर शिवजी की मूर्ति के आगे प्रसाद चढ़ा आओ, दुःख से बच जाओगे। हा हा हा ...काश यह इतना आसान होता। भगवान की मूर्ति से ऐसी उम्मीद करना ठीक वैसे ही है, जैसे कि हम महाराजा सूरजमल की तस्वीर अपने माथे पर चिपका लें और इस उम्मीद के साथ कोई युद्ध छेड़ दें कि वह तस्वीर हमें जिताएगी। वह तस्वीर हमें नहीं जिता सकती, केवल प्रेरणा दे सकती है। शिव की तस्वीर हमें नहीं बचा सकती, लेकिन इसका मतलब यह भी तो नहीं हम एक महापुरुष को भूल ही जाएं। शिव या अन्य किसी भगवान की मूर्ति से प्रेरणा लेकर हमने कितनी मेहनत की, कितने अच्छे काम किए, बस उस पर बचना निर्भर करेगा।
इस सारे संसार को एक अदृश्य शक्ति चलाती है। वह अदृश्य शक्ति भी क्या है। दरअसल कुछ नियम हैं। जब किसी भी पृथ्वी का निर्माण होता है उसी के साथ एक सिस्टम की शुरुआत हो जाती है। यदि इस दुनिया में कोई कुछ ऐसा कर दे, जैसा न तो आज तक कभी किसी ने किया हो और न ही भविष्य में कभी कोई कर सके तो वो अदृश्य शक्ति उसे अपना रूप दे देगी। वही असली भगवान होगा। हालांकि बिना मेहनत, तपस्या और अच्छे कर्मों के तो वो भी किसी को नहीं बचाएगा। यह पृथ्वी मेहनत करने और कुछ पराक्रम दिखाने के लिए है। कोई इसे आराम करने की जगह न समझ ले, इसके लिए सिस्टम के पास 10% क्रूरता दिखाने का प्रावधान है। इसके तहत पूरी दुनिया में प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। यदि भगवान को कोसकर इनसे बच जाओगे तो ये आफतें तो चीन और अमेरिका जैसे देशों में भी आती हैं, जो कि धार्मिक देश नहीं हैं। इस तरह की आफतें तो मुस्लिम देशों में भी आती हैं। ये आपदाएं लोगों को खाली हाथ कर देती हैं नए सिरे से मेहनत करने के लिए। इस धरती पर हम जितनी मेहनत करेंगे, त्याग-तपस्या करेंगे, स्वर्ग में उतना ही आनंद उठाएंगे। यदि यहां आराम का समय बिताएंगे तो स्वर्ग में पछताएंगे कि पता नहीं क्यों हमारे पास ज्यादा क्षमताएं नहीं हैं स्वर्ग का आनंद लेने के लिए। क्षमताएं कैसे होंगी जब धरती पर कुछ कष्ट झेला ही नहीं होगा। तो एक तरह से ऐसे कष्ट देकर सिस्टम लोगों का भला ही करता है।
धर्म से एक पहचान मिलती है। यदि किसी का कोई धर्म ही नहीं होगा तो उसे जीवन में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, इसीलिए इस दुनिया में अधिकतर लोगों का कोई न कोई धर्म है। जो लोग ये कहते हैं वे किसी धर्म में विश्वास नहीं करते तो वे अधिकतर बकवास करते हैं। धर्म के दायरे में केवल धार्मिक स्थल और पूजा-पाठ ही नहीं आते, बल्कि नाम, रीति-रिवाज, पहनावा, सोच, भाषा, संस्कार और इनके अलावा भी बहुत सी बातें आती हैं। यदि हम इन सब बातों का अपने जीवन में लाभ ले रहे हैं तो फिर हमें यह स्वीकार करना चाहिए।
 

इसी ब्रहामंवाद और ब्राहमण वादी मानसिकता ने , सदीओ तक ब्राह्मणों ने सारी शिक्षा का ठेका अपने पास रखा और अन्य जातियो को नहीं पढने दिया, राजाओं को अपने चंगुल में रखा, फिर जब दिखा क्षत्रिय जाती ज़मीन में आगे बढ़ रही है तो अपने आप से त्यागी वर्ना अलग कर दी, फिर दिखा बनिए कारोबार पर हक़ जमा रहे है तो कायस्थ वर्ना अलग कर दिया


एक बार इतिहास के पन्ने उठा कर देखिये आप को सारे जवाब खुद बा खुद मिल जायेंगे

भाई जी, अपनी इन मनगढ़ंत बातों को साबित करने के लिए कोई सबूत, कोई लिंक दे सकते हो? आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि कायस्थ कोई व्यापारी वर्ग नहीं है, बल्कि लेखा-जोखा रखने वाला वर्ग है, जो कारोबार पर बनियों के हक़ को ख़त्म करने की दिशा में कुछ नहीं कर सकता था।
हा हा हा…क्षत्रिय जाति जमीन में आगे बढ़ रही है, यह देखकर ब्राह्मणों ने त्यागी अपने आप से अलग कर दिए। क्या मतलब? क्या त्यागियों ने क्षत्रियों की जमीन छीनना शुरू कर दिया था? इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि ब्राह्मण क्षत्रियों को पढ़ाना सबसे ज्यादा पसंद करते थे। वर्तमान में उन सब बातों का कोई महत्त्व ही नहीं रह गया। महान हिंदू धर्म के अधिकांश महानायक गैर ब्राह्मण हैं। शिव, श्री राम, श्री कृष्ण, बुद्ध, महावीर…इनमें से कोई भी ब्राह्मण नहीं है। राम ने जिस आतताई रावण का वध किया, वह जरूर ब्राह्मण था। यदि हिंदू धर्म ब्राह्मणवादी होता तो वे सभी नायकों को गैर ब्राह्मण और खलनायक को रावण क्यों बनाते?
 
राजपाल जी, मेने किसी हिन्दू-विन्दु के संस्कार नहीं किये या नाम नहीं रखे हैं ,मे जट्टों की परम्परा का पालन करता हूँ ,ये भाम्ण जिनका आप अनुकरण कर रहे हो ,इन्होने उत्तरभारत में अधिकतर तीज त्यौहार जट्टों के ले कर उनको हिन्दू त्यौहार बना दिया । जट्टों के सभी त्यौहार प्रक्रति और मानव के आपसी सम्बन्धों पर आधारित हैं । किसी भगवान् या देवी देवता से इन् त्योहारों का कोई लेनादेना नहीं हे । यदि आप गौर करें तो पायेंगे की इन् भाम्णों ने , ये जहाँ भी गए वहीँ के स्थानीय वासिओं के मत के अनुसार देवी-देवता और त्यौहार खड़े कर दिए या, अपना लिए , ताकि वे आसानी से इनके कहे अनुसार चलें ,और इन् की बातों पर विशवास करने लग जाएँ ,ताकि इनकी भगवान् नामक सामान की दुकानदारी चलती रहे । जिसमे अभोतिक आस्था और विशवास ,डर की पुडिया में लपेट कर दिया जाता हे । यानी जनता के धन से मंदिर बनाओ ,उनसे ही चढ़ावा चढ़वावो ,उनको ही डर से अपना गुलाम बनाओ और नीचा दीखाओ । हींग लगे ना फिट्कड़ी ,रंग चोखा ।

में भी बीजेपी और मोदी का समर्थक हूँ ,पर हिन्दुत्व के मुद्दे पर नहीं । देशभक्ति ,विकास ,और मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर ।


बड्डे भाई, कृपया बताना चाहोगे कि आपका विवाह किस पद्धति से हुआ था? मुस्लिम जाटों का विवाह नहीं होता, बल्कि निकाह पढ़ा जाता है। सिख जाटों का विवाह अधिकतर गुरुद्वारों में या फिर सिख पद्धति से होता है। इनके अलावा शेष जाट अधिकतर हिंदू पद्धति से विवाह करते हैं। कृपया करके यह भी बताना कि आपके नाम में ये रवि, इंद्र (एक हिंदू भगवान), सिंह (एक हिंदू उपनाम) वगैरह क्या है? मुंबई में बहुत से ऐसे मामले सामने आए हैं कि मुस्लिमों को किराए पर फ्लैट नहीं दिए गए, यहां तक कि उन्हें बेचे भी नहीं गए। वे मुस्लिम हैं, ऐसा उनके नाम से मालूम पड़ा। आपके नाम को जानकर लोग आपको हिंदू समझ लेते हैं, इस प्रकार आपको गैर हिंदू होने की आंच नहीं झेलनी पड़ती।

क्या आप यहां यह घोषणा करना चाहोगे कि आप अपने बच्चों का विवाह हिंदू पद्धति से नहीं करोगे, बल्कि तथाकथित जट्ट पद्धति से करोगे ( अगर ऐसी कोई पद्धति है इस दुनिया में तो)?
 
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि ब्राह्मण क्षत्रियों को पढ़ाना सबसे ज्यादा पसंद करते थे। वर्तमान में उन सब बातों का कोई महत्त्व ही नहीं रह गया। महान हिंदू धर्म के अधिकांश महानायक गैर ब्राह्मण हैं। शिव, श्री राम, श्री कृष्ण, बुद्ध, महावीर…इनमें से कोई भी ब्राह्मण नहीं है। राम ने जिस आतताई रावण का वध किया, वह जरूर ब्राह्मण था। यदि हिंदू धर्म ब्राह्मणवादी होता तो वे सभी नायकों को गैर ब्राह्मण और खलनायक को रावण क्यों बनाते?

इतिहास लिनक्स का मोहताज नहीं, वैसे क्या अप लिंक दे सकते है आप की इन ऊट पटांग बातो का ?

आप की जानकारी के लिए ये भी बताना जरुरी है ये जितने भी ग्रन्थ है किसी भी ब्राह्मण ने नहीं लिखे, लिखे होते तो जरुर ब्राह्मण हीरो होता और जैसा आपने कहा ब्राह्मणों को विलन बनाया गया ये दर्शाता है की लिखने वाले कैसे दबाव मैं थे ब्रह्मंनो के - रामायण लिखी वाल्मीकि ने और महाभारत लिखा वेदव्यास ने जो एक मचुअरे के पुत्र थे, गीता लिखी श्री कृष्णा ने जो यादव थे आगे आप समझ ही गए होंगे
 
इतिहास लिनक्स का मोहताज नहीं, वैसे क्या अप लिंक दे सकते है आप की इन ऊट पटांग बातो का ?

आप की जानकारी के लिए ये भी बताना जरुरी है ये जितने भी ग्रन्थ है किसी भी ब्राह्मण ने नहीं लिखे, लिखे होते तो जरुर ब्राह्मण हीरो होता और जैसा आपने कहा ब्राह्मणों को विलन बनाया गया ये दर्शाता है की लिखने वाले कैसे दबाव मैं थे ब्रह्मंनो के - रामायण लिखी वाल्मीकि ने और महाभारत लिखा वेदव्यास ने जो एक मचुअरे के पुत्र थे, गीता लिखी श्री कृष्णा ने जो यादव थे आगे आप समझ ही गए होंगे

In the epic Mahābhārata, Drona (Sanskrit: द्रोण, droṇa) or Dronacharya (Sanskrit: द्रोणाचार्य, droṇācārya) was the royal guru to Kauravasand Pandavas. He was a master of advanced military arts, including the Devāstras. Arjuna was his favorite student. Droṇa's love for Arjuna was second only to his love for his son Aśvatthāma. He was considered to be a partial incarnation of Bṛhaspati.
Droṇacarya was born as a Bharadvaja Brahmin, in Dehradun 9000 BC.

(I have link)


भाई एक तरफ आप ब्राह्मणों को कोस रहे हो, दूसरी तरफ एक ब्राह्मण दयानंद सरस्वती द्वारा शुरू किए गए आर्य समाज का हवाला दे रहे हो। क्या आर्य समाज पद्धति से विवाह को 'जट्ट पद्धति' का विवाह माना जाए? कृपया अपनी बात के पक्ष में कोई लिंक दें, अनर्गल बहस का कोई फायदा नहीं है.

आपका ऐसा कहना हास्यास्पद है कि ब्राह्मणों ने वाल्मीकि पर दबाव डालकर रावण को ब्राह्मण लिखवाया.
जब ब्राह्मण किसी गैर ब्राह्मण को पढ़ने ही नहीं देते थे तो फिर वाल्मीकि और वेद व्यास कैसे पढ़ गए?
 
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Kayastha (also referred to as Kayasth or Kayeth) is a caste or community of Hindus originating in India. Kayastha means "scribe" in Sanskrit, reflecting the caste's traditional role as record-keepers and administrators of the state. Kayasthas have historically occupied the highest government offices, serving as ministers and advisors during early medieval Indian kingdoms and the Mughal Empire, and in important administrative positions during the British Raj. In modern times, they have attained success in politics, as well as in the arts and various professional fields.

(I have link)



Tyagi is a surname with its origins in North India and Pakistan. The name is prevalent in both Hindu and Muslim communities.It is aSanskrit word meaning "the renouncer". Once localized to Western Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana,Rajasthan and Delhi, they are now also found in Sindh and Punjab provinces of Pakistan due to the migration of some Muslim Tyagis to those areas. Taga and Tagha are alternative names that are sometimes used for the community. Surnames common to the community include Tyagi and Chaudhry. Tyagi also meaning "sacrificing (oneself)" has led some Tyagis to claim Brahmin ancestors who rejected priestly occupations and were traditionally either landowning agriculturists or soldiers.

(No where is mentioned they became Tyagi to stop Kshtriyas from farming)
 
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आपका ऐसा कहना हास्यास्पद है कि ब्राह्मणों ने वाल्मीकि पर दबाव डालकर रावण को ब्राह्मण लिखवाया.
जब ब्राह्मण किसी गैर ब्राह्मण को पढ़ने ही नहीं देते थे तो फिर वाल्मीकि और वेद व्यास कैसे पढ़ गए?

आपकी सोच हस्यापद्द है
आप मेरी ही बात को ठीक कहने मैं लगे है, ब्राह्मणों ने राजाओं पर अपना कब्ज़ा रखा, जैसे आपने अभी खुद कहा और उनके अलावा किसी और क्षत्रिय को न पढने दिया न ही कुछ और करने दिया सिवाय लड़ाई के


वैसे आप की ये सोच अजीब है और निराली है जो ये सोचती है ब्राह्मणों ने सब को एक साथ ले के आगे बढ़ने का काम किया, सचमुच काफी अनोखे हो आप - आप ऐसी दलीले सुप्रीम कोर्ट मैं क्यूँ नहीं रखते ताकि आरक्षण से मुक्ति मिले?
 
वैसे बड़े भाई भी जवाब दे सकते है पर उससे पहले आप ये पढ़ ले http://www.aryasamajmandirmarriage.com/procedure.html


Arya Samaj is a Humanity reform movement founded by Rishi Dayananda Saraswati on 10 April 1875. He was a Rishi who believed in the infallible authority of theVedas.

Dayanand Saraswati was born on 12, February, 1824 in Tankara, near Morvi in the Kathiawad region (now Rajkot district of Gujarat). His original name was Mool Shankar. His father's name was Karshanji Lalji Tiwari and mother's name was Yashodabai. Theirs was a Brahmin family.

(Do you want link?)
 

आपकी सोच हस्यापद्द है
आप मेरी ही बात को ठीक कहने मैं लगे है, ब्राह्मणों ने राजाओं पर अपना कब्ज़ा रखा, जैसे आपने अभी खुद कहा और उनके अलावा किसी और क्षत्रिय को न पढने दिया न ही कुछ और करने दिया सिवाय लड़ाई के


वैसे आप की ये सोच अजीब है और निराली है जो ये सोचती है ब्राह्मणों ने सब को एक साथ ले के आगे बढ़ने का काम किया, सचमुच काफी अनोखे हो आप - आप ऐसी दलीले सुप्रीम कोर्ट मैं क्यूँ नहीं रखते ताकि आरक्षण से मुक्ति मिले?


ब्राह्मणों ने चाहे कुछ भी किया, लेकिन हिंदू धर्म उनकी बपौती नहीं है।

और कृपया मुझे शब्दों के जाल में उलझाने का प्रयास न करें।
 
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