राजपाल जी, मेने किसी हिन्दू-विन्दु के संस्कार नहीं किये या नाम नहीं रखे हैं ,मे जट्टों की परम्परा का पालन करता हूँ ,ये भाम्ण जिनका आप अनुकरण कर रहे हो ,इन्होने उत्तरभारत में अधिकतर तीज त्यौहार जट्टों के ले कर उनको हिन्दू त्यौहार बना दिया । जट्टों के सभी त्यौहार प्रक्रति और मानव के आपसी सम्बन्धों पर आधारित हैं । किसी भगवान् या देवी देवता से इन् त्योहारों का कोई लेनादेना नहीं हे । यदि आप गौर करें तो पायेंगे की इन् भाम्णों ने , ये जहाँ भी गए वहीँ के स्थानीय वासिओं के मत के अनुसार देवी-देवता और त्यौहार खड़े कर दिए या, अपना लिए , ताकि वे आसानी से इनके कहे अनुसार चलें ,और इन् की बातों पर विशवास करने लग जाएँ ,ताकि इनकी भगवान् नामक सामान की दुकानदारी चलती रहे । जिसमे अभोतिक आस्था और विशवास ,डर की पुडिया में लपेट कर दिया जाता हे । यानी जनता के धन से मंदिर बनाओ ,उनसे ही चढ़ावा चढ़वावो ,उनको ही डर से अपना गुलाम बनाओ और नीचा दीखाओ । हींग लगे ना फिट्कड़ी ,रंग चोखा ।
में भी बीजेपी और मोदी का समर्थक हूँ ,पर हिन्दुत्व के मुद्दे पर नहीं । देशभक्ति ,विकास ,और मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर ।