नई दिल्ली: अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने जाटों को आबीसी कोटे के तहत केन्द्रीय सूची में शामिल करने सम्बंधी कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कांग्रेस से पूछा है कि पिछले कई दशकों से जाट ओबीसी के तहत केन्द्र में आरक्षण की मांग कर रहे हैं, तब कांग्रेस कहां थी। उन्होंने कहा कि केन्द्र में कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में जाटों को ओबीसी की केन्द्रीय सूची में शामिल करने में देर क्यों हो रही है? यह एक प्रशासनिक फैसला है, इसके लिए संसद से किसी तरह का बिल पास कराने की भी जरूरत नहीं है।
मलिक ने कहा कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति लंबे समय से जाटों को ओबीसी दर्जे के तहत केन्द्रीय सूची में शामिल कराने की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है। समिति के तत्वावधान में 8 फरवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल जाट रैली होने जा रही है। उन्होंने कहा कि अपना अधिकार मांग रहे जाटों से घबराकर दिग्विजय सिंह भ्रमित करने वाले बयान दे रहे हैं।
यशपाल मलिक ने कहा कि उनकी समिति सिर्फ उत्तर प्रदेश के जाटों को ओबीसी के तहत केन्द्र में आरक्षण देने की वकालत नहीं कर रही है, बल्कि हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड के जाटों को यही लाभ दिए जाने के पक्ष में है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की आठ फरवरी को दिल्ली में प्रस्तावित रैली में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल समेत पूरे देश से जाट पहुंचेंगे।
मलिक ने कहा कि जाटों को लेकर कांग्रेस की नीति हमेशा से भ्रमित करने वाली रही है। मिसाल के तौर पर भरतपुर और धौलपुर को छोड़कर राजस्थान में जाटों को ओबीसी में आरक्षण का लाभ दिया गया, जबकि हरियाणा के जाटों को राज्यस्तर पर इस लाभ से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राहुल गांधी के 2012 के विधानसभा चुनाव के मिशन के तहत जाटों से सम्बंधित बयान दिया है। अगर वास्तव में कांग्रेस जाटों की भलाई चाहती है, तो तत्काल उन्हें ओबीसी के तहत केन्द्रीय सूची में शामिल करने की घोषणा करे।