nehadeshwal
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१ चौधरी न हल जोड़ना था मुह अँधेरे
वो उठ गया सुबेरे सुबेरे
उठ ते ऐ करया करे था धुम्रपान,
होक्के प गया उसका ध्यान.
चिलम भर ली, होक्के प धर ली.
घूँट मारी, देख्या के अवाज नी आ री.
बोल्या ऐ ले भाई
नै रुक री सं सारी
चौधरी था चातर, नै न खोलण खातर
धरती मह मारया हाथ, किस्मत न दिया साथ
उसने १ दिकड़ा पा गया.
चिलम तार क, दिकड़ा नै मह गोया ,
बोला ऐ ले भाई
यो के होया, भाग फूट गया, दिकड़ा मह ऐ टूट गया
बोल्या ऐ ले भाई
सारा ऐ काम फूट गया
जल्दी मह करया गया काम ,उठया त चिलम प पैर धरया गया
चिलम बी टूट गी,
बोल्या ऐ ले भाई. किस्मत ऐ फूट गी.
हल काँधे प टेक, हाली का बना लिया भेष
गाम त लिकड ते ऐ लगया सिली हवा का झोका,
खेस ओढ़न लगया, वो बी दे गया धोखा.
उसकी बहु न खेस आली खूंटी प रात न अपनी घाघरी टांग दी थी
अँधेरे मह वा ऐ ले ली साथ
ओढ़न लगया , सर मह क लिकड़ गया
बोल्या ऐ ले भाई
सारा ऐ काम बिगड़ गया
सारे काम गलत हो रे थे बारी बारी
फेर करी उसने हल जोडन की तयारी
१ बैल तो जुंए तले आया, दूसरा नी आया
बोल्या- रै खसम तन्ने बी क्यूँ खाया ,
रौशनी सी हुयी, जब बात का तोल पाया
१ बैल की जंगाह १ गाँ खोल लाया
बोल्या ऐ ले भाई
इब चौधरी के साथ तो होया जो होया
सुणो घर मह चौधरण का हाल
तडके तड़क उठ ते ऐ , उसकी गेल बी होया कमाल,
बाल्टी धो क, सान्नी भे क
धार काढान बैठ गी ,
अर जब थण नी पाए त
उसके तले क हट गी.
दिवा ला क देख्या, उसकी जंगाह बैल बांध रया था
बोली ऐ ले भाई
वो उठ गया सुबेरे सुबेरे
उठ ते ऐ करया करे था धुम्रपान,
होक्के प गया उसका ध्यान.
चिलम भर ली, होक्के प धर ली.
घूँट मारी, देख्या के अवाज नी आ री.
बोल्या ऐ ले भाई
नै रुक री सं सारी
चौधरी था चातर, नै न खोलण खातर
धरती मह मारया हाथ, किस्मत न दिया साथ
उसने १ दिकड़ा पा गया.
चिलम तार क, दिकड़ा नै मह गोया ,
बोला ऐ ले भाई
यो के होया, भाग फूट गया, दिकड़ा मह ऐ टूट गया
बोल्या ऐ ले भाई
सारा ऐ काम फूट गया
जल्दी मह करया गया काम ,उठया त चिलम प पैर धरया गया
चिलम बी टूट गी,
बोल्या ऐ ले भाई. किस्मत ऐ फूट गी.
हल काँधे प टेक, हाली का बना लिया भेष
गाम त लिकड ते ऐ लगया सिली हवा का झोका,
खेस ओढ़न लगया, वो बी दे गया धोखा.
उसकी बहु न खेस आली खूंटी प रात न अपनी घाघरी टांग दी थी
अँधेरे मह वा ऐ ले ली साथ
ओढ़न लगया , सर मह क लिकड़ गया
बोल्या ऐ ले भाई
सारा ऐ काम बिगड़ गया
सारे काम गलत हो रे थे बारी बारी
फेर करी उसने हल जोडन की तयारी
१ बैल तो जुंए तले आया, दूसरा नी आया
बोल्या- रै खसम तन्ने बी क्यूँ खाया ,
रौशनी सी हुयी, जब बात का तोल पाया
१ बैल की जंगाह १ गाँ खोल लाया
बोल्या ऐ ले भाई
इब चौधरी के साथ तो होया जो होया
सुणो घर मह चौधरण का हाल
तडके तड़क उठ ते ऐ , उसकी गेल बी होया कमाल,
बाल्टी धो क, सान्नी भे क
धार काढान बैठ गी ,
अर जब थण नी पाए त
उसके तले क हट गी.
दिवा ला क देख्या, उसकी जंगाह बैल बांध रया था
बोली ऐ ले भाई
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