rakeshsehrawat
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भाई एक जाट है जो जाट नै छोड कै सब गेल भाईचारे बनावै था ना वे दिन घणे पुराने ना होए जब खोर धोरे न्यारे बोरे बिछा कै रोटी खाया करते ये अंतरू फंतरू और ये हाम ए हैं जिन नै ये छाती कै ला लिए ना बाहमण इन नै घरां बडन दें ना बानिए फेर यू बोला (बावला)जाट याद आवैगा अर् ये न्यू रोवैंगें ज्यूकर कोल्हू पाटे पाछै कुते रोया करैं
और भाई सुमित मै बाट देखुंगा इनके सो कॉल्ड बायकाट की हम तो फेर भी गुजारा कर जांगे अर उसतैं जब जाटां मै एका हो जागा फेर कुनसी कुण मे छिपेंगे????
और भाई सुमित मै बाट देखुंगा इनके सो कॉल्ड बायकाट की हम तो फेर भी गुजारा कर जांगे अर उसतैं जब जाटां मै एका हो जागा फेर कुनसी कुण मे छिपेंगे????
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