ravinderjeet
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म्हारी गाळ में एक बुड्ढा था ( वो ए जिसकी लान्गड़ खींची थी ) | वो बालकां नु खेलन ना दिया करदा , मारण भाज्दा, गाली बकता | उका बड्डा छोरा न्यारा होगया तो घेर में वे बाडन तें बरज दिए एर ना ओन्ने डांगर बांधन्न दे | उका पोता माहरे हाण का था वो बोल्या यो म्हारा दादा हामने घणा सतावन लाग्रया से आओ इने भी सतावां गे | ऊ बूढ़े की एक आदत थी अक वो रात नु आपनी खाट बिछा कें फेर घरां रोटी खाण जाया करदा | एक दिन जब वो घरां गया तो उकी बिछे होए गूदडाँ पे बोबर लीप आये एर जब वो रोटी खा कें आया अँधेरे में उने किम्मे धिख्या तो आथ ना | सीधा गोबर स्नान होग्या | फेर हांडया सारी रात नाह्न्दा , गूदडे धोन्दा ,गाली बकता |