एक बर सुरजा फ़ौज मै तै छुट्टी आरया था / सांझ नै रामप्यारी नै बुज्झी अक आज के साग बणाऊँ / सुरजा बोल्या - आलू एंड गोभी रांध ले / और इतणा कह कै बाहर गाम मै घुम्मण लिकड़ ग्या / रामप्यारी सोच मै पड़गी के घरां आलू बी सै , गोभी बी सै ,अर यो एंड के होया / रामप्यारी अपणी पड़ोसण धोरै बुज्झण गई / पड़ोसण नै कोणी बेरा था / उसनै सोची अक ना बताई तो रामप्यारी आगै बेजती हो ज्यागी / पड़ोसण बोल्यी - एंड तो गोबर हो सै / बस फेर के था रामप्यारी नै घरां आकै , गोबर का छौंक ला कै साग बणा दिया / रोटी खाते टेम सुरजा बोल्या - आज तो सब्जी चरचरी बण री सै / रामप्यारी बोल्यी - एंड कीमे घणा पड़ग्या होगा /